हिंदी व्याकरण

हिंदी व्याकरण: सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Hindi Vyakaran) – परिभाषा, अंग, भेद, नोट्स और PDF

हिंदी व्याकरण सम्पूर्ण नोट्स PDF – संधि, समास, कारक, काल, अलंकार (हिंदी साहित्य चैनल)

हिंदी व्याकरण वह शास्त्र है जो हिंदी भाषा को शुद्ध रूप में बोलने, लिखने और समझने के नियम बताता है। वर्ण से लेकर शब्द, पद और वाक्य तक भाषा की हर इकाई कैसे बनती और बदलती है, यह सब व्याकरण में पढ़ा जाता है। इस लेख में सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण को एक ही जगह सरल भाषा में समझाया गया है: परिभाषा, अंग, वर्णमाला, संधि, शब्द-भेद, समास, कारक, काल, वाक्य, शब्द-भंडार और काव्य-तत्त्व, सब उदाहरणों और तालिकाओं के साथ।

पंचमाक्षर वाली वर्तनी में इसे हिन्दी व्याकरण भी लिखा जाता है; दोनों रूप एक ही विषय के हैं। जो विद्यार्थी इसे Hindi Vyakaran, Hindi Grammar in Hindi या Hindi Grammar notes नाम से खोजते हैं, उनके लिए भी यही पूरी जानकारी है। हर टॉपिक के बाद उसके विस्तृत लेख का लिंक दिया है, अंत में हिंदी व्याकरण MCQ और FAQ हैं, और पूरी पढ़ाई के लिए हिंदी व्याकरण नोट्स PDF का फ्री डेमो भी है।

⚡ संक्षिप्त उत्तर: हिंदी व्याकरण क्या है?

हिंदी व्याकरण वह शास्त्र है जो हिंदी भाषा के शुद्ध रूप (बोलने, लिखने और समझने) के नियम बताता है। इसके तीन मुख्य अंग हैं: वर्ण-विचार (ध्वनि और वर्ण), शब्द-विचार (शब्दों की रचना, भेद और रूपांतर) और वाक्य-विचार (वाक्य की रचना, भेद और शुद्धता)। कुछ विद्वान पद-विचार को अलग मानकर चार अंग गिनते हैं।

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हिंदी व्याकरण क्या है? अर्थ और परिभाषा

“व्याकरण” शब्द वि + आ + कृ धातु से बना है, जिसका अर्थ है किसी वस्तु को अलग-अलग करके उसका ठीक-ठीक विश्लेषण करना। भाषा वाक्यों से बनती है, वाक्य शब्दों से और शब्द मूल ध्वनियों (वर्णों) से। व्याकरण इन्हीं इकाइयों का अध्ययन करता है और उनके प्रयोग के नियम तय करता है।

एक ज़रूरी बात याद रखिए: व्याकरण भाषा का अनुगामी है। पहले भाषा बनती है, फिर उसके नियम खोजे जाते हैं। फिर भी व्याकरण भाषा को स्थिर और शुद्ध रखता है, इसीलिए लिखित और मानक (परिनिष्ठित) हिंदी व्याकरण के नियमों पर टिकी है। Hindi grammar को ठीक से समझ लेने पर शुद्ध लेखन, वाक्य-शुद्धि और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न तीनों आसान हो जाते हैं।

हिंदी जिस लिपि में लिखी जाती है, उसकी बनावट और विशेषताएँ जानने के लिए देवनागरी लिपि का इतिहास और विशेषताएँ पढ़ें। हिंदी के क्षेत्रीय रूप समझने के लिए पश्चिमी हिंदी की बोलियाँ और पूर्वी हिंदी की बोलियाँ उपयोगी हैं।

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हिंदी व्याकरण के अंग: कितने अंग होते हैं?

⚡ संक्षिप्त उत्तर: हिंदी व्याकरण के कितने अंग हैं?

अधिकांश वैयाकरण हिंदी व्याकरण के तीन अंग मानते हैं: (1) वर्ण-विचार, (2) शब्द-विचार और (3) वाक्य-विचार। कुछ विद्वान पद-विचार को शब्द-विचार से अलग करके चार अंग मानते हैं। पुराने कुछ व्याकरणों में छंद-विचार भी अंग गिना गया, पर आज छंद काव्यशास्त्र का विषय माना जाता है।

अंग क्या पढ़ते हैं मुख्य टॉपिक
वर्ण-विचार (ध्वनि-विचार) वर्णों के आकार, उच्चारण, भेद और संयोग स्वर-व्यंजन, उच्चारण-स्थान, संधि, वर्तनी
शब्द-विचार (पद-विचार) शब्दों की रचना, भेद, व्युत्पत्ति और रूपांतरण संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, उपसर्ग, प्रत्यय, समास
वाक्य-विचार वाक्य की रचना, भेद, अंग और शुद्धता वाक्य-भेद, पदबंध, विराम-चिह्न, वाक्य-शुद्धि
हिंदी व्याकरण के अंग – वर्ण-विचार, शब्द-विचार और वाक्य-विचार का चार्ट
हिंदी व्याकरण के अंग: वर्ण-विचार, शब्द-विचार और वाक्य-विचार

वर्ण-विचार: हिंदी वर्णमाला में कितने वर्ण हैं?

भाषा की सबसे छोटी इकाई ध्वनि है, और उस ध्वनि का लिखित रूप वर्ण कहलाता है। वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं। हिंदी वर्णमाला के दो मुख्य भाग हैं: स्वर और व्यंजन।

⚡ संक्षिप्त उत्तर: हिंदी वर्णमाला में कुल कितने वर्ण हैं?

केंद्रीय हिंदी निदेशालय की मानक वर्णमाला (संशोधित संस्करण 2024) के अनुसार हिंदी में अब कुल 53 वर्ण हैं: 11 स्वर + 2 अयोगवाह (अं, अः) + 40 व्यंजन (33 मूल + 4 संयुक्त क्ष, त्र, ज्ञ, श्र + 2 उत्क्षिप्त ड़, ढ़ + 1 विशिष्ट व्यंजन ळ)। पहले ळ के बिना यह गिनती 52 थी। मूल वर्ण 44 (11 स्वर + 33 मूल व्यंजन) और अयोगवाह सहित 46 माने जाते हैं।

वर्ग वर्ण संख्या
स्वर अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ 11
अयोगवाह अं (अनुस्वार), अः (विसर्ग) 2
स्पर्श व्यंजन क से म तक (क, च, ट, त, प वर्ग) 25
अंतःस्थ व्यंजन य, र, ल, व 4
ऊष्म (संघर्षी) व्यंजन श, ष, स, ह 4
संयुक्त व्यंजन क्ष, त्र, ज्ञ, श्र 4
उत्क्षिप्त (द्विगुण) व्यंजन ड़, ढ़ 2
विशिष्ट व्यंजन (2024 में जोड़ा गया) ळ 1
कुल 11 स्वर + 2 अयोगवाह + 40 व्यंजन 53

परीक्षा-सूत्र: प्रश्न में “मूल वर्ण” पूछा जाए तो 44, “अयोगवाह सहित मूल वर्ण” हो तो 46, और “मानक वर्णमाला के कुल वर्ण” पूछे जाएँ तो नई मानक वर्णमाला के अनुसार 53 चुनें। पुरानी पुस्तकों में यही कुल संख्या 52 लिखी मिलती है, क्योंकि उनमें ळ नहीं गिना गया है।

स्वरों के ह्रस्व-दीर्घ भेद, व्यंजनों के उच्चारण-स्थान, अल्पप्राण-महाप्राण और घोष-अघोष का पूरा विवरण वर्ण विचार: वर्णमाला, स्वर, व्यंजन और उच्चारण स्थान लेख में दिया गया है।

संधि: परिभाषा और भेद

दो निकटवर्ती वर्णों के मेल से जो परिवर्तन (विकार) होता है, उसे संधि कहते हैं। जैसे विद्या + आलय = विद्यालय। संधि के तीन भेद हैं: स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। स्वर संधि के पाँच भेद हैं: दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि।

संधि उदाहरण पहचान
दीर्घ (स्वर) विद्या + आलय = विद्यालय सवर्ण स्वर मिलकर दीर्घ
गुण (स्वर) महा + इंद्र = महेंद्र अ/आ + इ/ई = ए
वृद्धि (स्वर) सदा + एव = सदैव अ/आ + ए/ऐ = ऐ
यण (स्वर) इति + आदि = इत्यादि इ/ई के बाद भिन्न स्वर = य्
व्यंजन संधि जगत् + ईश = जगदीश व्यंजन में परिवर्तन
विसर्ग संधि निः + चल = निश्चल विसर्ग में परिवर्तन

सूत्र, नियम और ट्रिक के लिए संधि की परिभाषा, भेद, नियम और उदाहरण और विसर्ग संधि के नियम और ट्रिक्स पढ़ें।

शब्द-विचार: शब्द के कितने भेद होते हैं?

वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं। जब शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर व्याकरण के नियमों से बँध जाता है, तब वह पद कहलाता है। शब्दों के भेद चार आधारों पर किए जाते हैं।

आधार भेद उदाहरण
स्रोत / उत्पत्ति तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी अग्नि, आग, पगड़ी, स्कूल
रचना / बनावट रूढ़, यौगिक, योगरूढ़ घर, विद्यालय, पंकज
प्रयोग / रूपांतर विकारी (4) और अविकारी (4) लड़का, मैं, अच्छा, जाना; यहाँ, के बिना, और, अरे
अर्थ सार्थक-निरर्थक, एकार्थी-अनेकार्थी आदि पानी; वानी (निरर्थक)

⚡ संक्षिप्त उत्तर: प्रयोग के आधार पर शब्द के कितने भेद हैं?

प्रयोग (रूपांतर) के आधार पर हिंदी में 8 पद-भेद हैं। विकारी (4), जिनका रूप लिंग, वचन, कारक या काल से बदलता है: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया। अविकारी या अव्यय (4), जिनका रूप सदा एक-सा रहता है: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक।

सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण – शब्द के भेद: विकारी और अविकारी (8 पद-भेद) चार्ट
शब्द के भेद: विकारी और अविकारी (8 पद-भेद)

संज्ञा

किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, भाव या अवस्था के नाम को संज्ञा कहते हैं। इसके पाँच भेद माने जाते हैं: व्यक्तिवाचक (राम, गंगा, जयपुर), जातिवाचक (लड़का, नदी, पर्वत), भाववाचक (मिठास, बचपन, मित्रता), समूहवाचक (सेना, भीड़, कक्षा) और द्रव्यवाचक (सोना, तेल, पानी)।

सर्वनाम

संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द सर्वनाम हैं। इसके छह भेद हैं: पुरुषवाचक (मैं, तू, वह), निजवाचक (आप, स्वयं, खुद), निश्चयवाचक (यह, वह), अनिश्चयवाचक (कोई, कुछ), संबंधवाचक (जो, सो) और प्रश्नवाचक (कौन, क्या)। सर्वनाम वचन और कारक से बदलता है, लिंग से नहीं।

विशेषण

संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द विशेषण है। इसके चार भेद हैं: गुणवाचक (अच्छा, काला), संख्यावाचक (एक, पहला), परिमाणवाचक (थोड़ा, दो किलो) और सार्वनामिक (यह घर, वह लड़का)। विस्तार के लिए विशेषण की परिभाषा, भेद और उदाहरण देखें।

क्रिया

जिस शब्द से किसी काम का करना या होना पता चले, वह क्रिया है। कर्म के आधार पर क्रिया सकर्मक (राम पुस्तक पढ़ता है) और अकर्मक (बच्चा हँसा) होती है। रचना के आधार पर प्रेरणार्थक, नामधातु, संयुक्त और पूर्वकालिक क्रियाएँ भी पढ़ी जाती हैं। पूरा विवरण क्रिया की परिभाषा और भेद में है।

अव्यय (अविकारी शब्द)

जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक या काल से नहीं बदलता, वे अव्यय हैं: क्रियाविशेषण (धीरे, यहाँ), संबंधबोधक (के पास, की ओर), समुच्चयबोधक (और, किंतु) और विस्मयादिबोधक (अरे!, हाय!)। बल देने वाले शब्द (ही, भी, तो) निपात कहलाते हैं।

उपसर्ग और प्रत्यय

शब्द के पहले जुड़कर अर्थ बदलने वाले शब्दांश उपसर्ग (प्र, परा, अप, सम्) और शब्द के बाद जुड़ने वाले शब्दांश प्रत्यय (-ता, -पन, -आई) कहलाते हैं। उदाहरणों सहित सूची के लिए उपसर्ग: परिभाषा, भेद और उदाहरण पढ़ें।

समास: परिभाषा और 6 भेद

दो या अधिक पदों के मेल से बने नए सार्थक शब्द को समास (समस्त पद) कहते हैं, जैसे राजा का पुत्र = राजपुत्र। समस्त पद को फिर से अलग करना विग्रह कहलाता है। समास के छह भेद हैं, जिन्हें प्रधान पद से पहचाना जाता है।

समास प्रधान पद पहचान उदाहरण
अव्ययीभाव पूर्वपद समस्त पद अव्यय का काम करता है प्रतिदिन, यथाशक्ति, आजन्म
तत्पुरुष उत्तरपद कारक-चिह्न लुप्त राजपुत्र, हस्तलिखित
कर्मधारय उत्तरपद विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय नीलकमल, घनश्याम
द्विगु उत्तरपद पूर्वपद संख्यावाची, समूह का बोध त्रिलोक, नवरात्र, चौराहा
द्वंद्व दोनों पद ‘और’, ‘तथा’, ‘या’ लुप्त माता-पिता, दाल-रोटी
बहुव्रीहि अन्य (तीसरा) पद ‘जो’, ‘जिसका’, ‘वाला’ दशानन, पीतांबर

⚡ संक्षिप्त उत्तर: संधि और समास में क्या अंतर है?

संधि में दो वर्णों का मेल होता है और उनमें विकार आता है (विद्या + आलय = विद्यालय); इसे तोड़ना संधि-विच्छेद कहलाता है। समास में दो या अधिक पदों का मेल होता है और बीच के चिह्न या शब्द लुप्त होते हैं (राजा का पुत्र = राजपुत्र); इसे तोड़ना विग्रह कहलाता है।

लिंग, वचन, कारक और काल

संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के रूप जिन कारणों से बदलते हैं, वे हैं: लिंग, वचन, कारक और काल। हिंदी में लिंग दो हैं (पुल्लिंग और स्त्रीलिंग) और वचन भी दो हैं (एकवचन और बहुवचन)।

कारक के 8 भेद और चिह्न

संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया से संबंध बताने वाला रूप कारक है। हिंदी वैयाकरण आठ कारक मानते हैं; संस्कृत परंपरा (पाणिनि) में छह कारक माने गए हैं।

कारक चिह्न (परसर्ग) उदाहरण
कर्ता ने (भूतकाल में); शून्य राम ने पुस्तक पढ़ी
कर्म को माँ बच्चे को सुलाती है
करण से, के द्वारा, के साथ कलम से लिखो
संप्रदान को, के लिए पिता पुत्र के लिए आम लाए
अपादान से (अलग होने के अर्थ में) पेड़ से पत्ता गिरा
संबंध का, के, की; रा, रे, री राम का घर
अधिकरण में, पर घर में, मेज़ पर
संबोधन हे, अरे, ओ, अजी हे राम!

याद रखने का सूत्र: “को” के दो कारक हैं (कर्म और संप्रदान) और “से” के भी दो (करण और अपादान)। इन्हें पहचानने के लिए वाक्य का अर्थ देखें: “से” में अलग होने का भाव हो तो अपादान, साधन का भाव हो तो करण।

काल के 3 मुख्य भेद

क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने का समय पता चले, वह काल है। मुख्य भेद तीन हैं: भूतकाल (राम ने पुस्तक पढ़ी), वर्तमानकाल (राम पुस्तक पढ़ता है) और भविष्यत्काल (राम पुस्तक पढ़ेगा)। परीक्षाओं में भूतकाल के छह भेद विशेष रूप से पूछे जाते हैं।

हिंदी व्याकरण नोट्स एक नज़र में – संधि, समास, कारक और काल के भेद
हिंदी व्याकरण नोट्स एक नज़र में: संधि, समास, कारक और काल

वाक्य-विचार: वाक्य, वाच्य और विराम-चिह्न

सार्थक शब्दों का वह व्यवस्थित समूह जो पूरा भाव प्रकट करे, वाक्य कहलाता है। वाक्य के दो अंग होते हैं: उद्देश्य (जिसके बारे में कहा जाए) और विधेय (जो कहा जाए)।

आधार भेद
रचना के आधार पर (3) सरल (एक क्रिया), संयुक्त (स्वतंत्र वाक्य योजक से जुड़े: और, पर, इसलिए), मिश्र (प्रधान + आश्रित उपवाक्य: कि, जो…वह, यदि…तो)
अर्थ के आधार पर (8) विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, आज्ञावाचक, विस्मयादिबोधक, संदेहवाचक, इच्छावाचक, संकेतवाचक

वाच्य से पता चलता है कि वाक्य में प्रधानता किसकी है। इसके तीन भेद हैं: कर्तृवाच्य (राम पुस्तक पढ़ता है), कर्मवाच्य (कर्म प्रधान) और भाववाच्य (भाव प्रधान)। लिखते समय भाव साफ़ रखने के लिए विराम-चिह्नों (पूर्ण विराम, अल्प विराम, प्रश्नवाचक चिह्न आदि) का सही प्रयोग ज़रूरी है।

परीक्षा में सबसे अधिक अंक गँवाने वाला हिस्सा अशुद्ध वाक्य पहचानना है। लिंग, वचन, कारक और शब्द-क्रम की अशुद्धियाँ वाक्य शुद्धि के नियम और उदाहरण में विस्तार से समझाई गई हैं।

वर्तनी और शब्द-शुद्धि: सबसे आम अशुद्धियाँ

शब्द को लिखने का शुद्ध रूप वर्तनी कहलाता है। देवनागरी की मानक वर्तनी केंद्रीय हिंदी निदेशालय ने तय की है। परीक्षाओं में सबसे ज़्यादा भूल इ-ई, उ-ऊ, श-ष-स, ण-न और संयुक्ताक्षरों में होती है। नीचे कुछ ऐसे शब्द हैं जो बार-बार पूछे जाते हैं:

अशुद्ध शुद्ध अशुद्ध शुद्ध
परिक्षा परीक्षा कवियत्री कवयित्री
श्रीमति श्रीमती गृहणी गृहिणी
अनुरुप अनुरूप भुगोल भूगोल
उपरोक्त उपर्युक्त अत्याधिक अत्यधिक
प्रमाणिक प्रामाणिक आर्शीवाद आशीर्वाद
पुनरावृति पुनरावृत्ति अतिश्योक्ति अतिशयोक्ति

“त्योहार” या “त्यौहार”? शब्दकोशों में मुख्य प्रविष्टि त्योहार है और परीक्षा में यही उत्तर माना जाता है; “त्यौहार” बोलचाल में प्रचलित वैकल्पिक रूप है।

शब्द-भंडार: पर्यायवाची, अनेकार्थी, मुहावरे और लोकोक्तियाँ

व्याकरण के साथ शब्द-भंडार भी हिंदी का बड़ा हिस्सा है। समान अर्थ वाले शब्द पर्यायवाची (जल: नीर, पानी, अंबु), उलटे अर्थ वाले विलोम, एक से अधिक अर्थ वाले अनेकार्थी, और उच्चारण में मिलते-जुलते पर अर्थ में भिन्न श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं। 300 से अधिक उदाहरणों के लिए पर्यायवाची शब्द और अनेकार्थक शब्द पढ़ें।

विशेषता मुहावरा लोकोक्ति
रूप वाक्यांश (पूर्ण वाक्य नहीं) पूर्ण वाक्य
उदाहरण आँखें चुराना अधजल गगरी छलकत जाय
परिवर्तन लिंग-वचन-काल के अनुसार बदलता है सामान्यतः अपरिवर्तित रहती है
अर्थ की प्रकृति लाक्षणिक या व्यंजक अर्थ नीति या अनुभव की सीख

काव्य-तत्त्व: शब्द-शक्ति, रस, छंद और अलंकार

प्रतियोगी परीक्षाओं के हिंदी व्याकरण में काव्य के ये तत्त्व भी पूछे जाते हैं। शब्द के अर्थ का बोध कराने वाली शक्ति शब्द-शक्ति है, जिसके तीन भेद हैं: अभिधा (“वह गाय दुह रहा है”), लक्षणा (“गंगा में घर है” अर्थात् किनारे पर) और व्यंजना (“सूरज डूब गया” अर्थात् अब घर चलो)। विस्तार से शब्द शक्ति: परिभाषा, भेद और उदाहरण पढ़ें।

रस काव्य को पढ़ने-सुनने से मिलने वाला आनंद है। शास्त्रीय रूप से नौ रस माने गए हैं (शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत, शांत); बाद में वात्सल्य और भक्ति रस भी जोड़े गए। स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव और संचारी भाव के लिए रस के अंग और संचारी भाव के उदाहरण पढ़ें।

अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाते हैं। शब्द के स्तर पर चमत्कार हो तो शब्दालंकार (अनुप्रास, यमक, श्लेष) और अर्थ के स्तर पर हो तो अर्थालंकार (उपमा, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति)। सभी अलंकारों का सार अलंकार की परिभाषा और विद्वानों के मत में है।

छंद वर्ण, मात्रा, यति और गति के नियमों से बँधी रचना है। मात्रा-गणना पर आधारित छंद मात्रिक और वर्ण-गणना पर आधारित छंद वर्णिक कहलाते हैं। उदाहरण के लिए कुण्डलिया छंद और कवित्त छंद देखें।

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हिंदी व्याकरण कैसे पढ़ें और याद करें?

⚡ संक्षिप्त उत्तर: हिंदी व्याकरण पढ़ने का सही क्रम क्या है?

  1. वर्ण-विचार से शुरू करें: वर्णमाला, उच्चारण-स्थान और वर्तनी।
  2. फिर संधि, उपसर्ग-प्रत्यय और समास, क्योंकि इनसे शब्द बनते हैं।
  3. इसके बाद पद-विचार: संज्ञा से अव्यय तक, साथ में लिंग, वचन, कारक और काल।
  4. फिर वाक्य-विचार: वाक्य-भेद, वाच्य, विराम-चिह्न और वाक्य-शुद्धि।
  5. अंत में शब्द-भंडार और काव्य-तत्त्व, और हर अध्याय के बाद MCQ हल करें।

याद रखने के लिए हर टॉपिक की एक पन्ने की तालिका बनाइए, जैसे ऊपर कारक और समास की तालिकाएँ हैं। परीक्षा से पहले इन्हीं तालिकाओं का दोहराव सबसे तेज़ काम करता है। जहाँ विद्वानों में मतभेद है (जैसे वर्णों की संख्या या कारकों की संख्या), वहाँ प्रश्न के शब्द ध्यान से पढ़िए, क्योंकि उत्तर उसी पर निर्भर करता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में हिंदी व्याकरण

RPSC (स्कूल व कॉलेज व्याख्याता), REET, TGT, PGT, राज्य शिक्षक भर्ती, पटवारी, KVS/NVS, SSC और UGC NET/JRF हिंदी जैसी लगभग हर परीक्षा में हिंदी व्याकरण से प्रश्न आते हैं। इनमें संधि-विच्छेद, समास-विग्रह, कारक, शब्द-शुद्धि, वाक्य-शुद्धि, पर्यायवाची-विलोम, मुहावरे-लोकोक्तियाँ और अलंकार सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिक हैं। प्रश्न अब सीधे परिभाषा से कम और कथन-आधारित या पहचान वाले अधिक आते हैं, इसलिए उदाहरणों के साथ अभ्यास ज़रूरी है।

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हिंदी व्याकरण MCQ: 10 अभ्यास प्रश्न

नीचे दिए प्रश्न हल कीजिए और फिर “✅ उत्तर देखें” पर टैप करके अपना उत्तर जाँचिए।

प्रश्न 1. ‘व्याकरण’ शब्द किस धातु से बना है?

(A) गम्
(B) कृ
(C) भू
(D) दृश्

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) कृ
व्याकरण = वि + आ + कृ। इसका अर्थ है भाषा का विश्लेषण करके उसके नियम बताना।

प्रश्न 2. प्रयोग के आधार पर हिंदी में पद-भेद कितने हैं?

(A) चार
(B) छह
(C) आठ
(D) दस

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) आठ
विकारी 4 (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया) और अविकारी 4 (क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक)।

प्रश्न 3. इनमें अविकारी शब्द कौन-सा है?

(A) लड़का
(B) अच्छा
(C) धीरे
(D) जाना

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) धीरे
‘धीरे’ क्रियाविशेषण है, जिसका रूप लिंग-वचन से नहीं बदलता।

प्रश्न 4. ‘विद्यालय’ में कौन-सी संधि है?

(A) गुण
(B) दीर्घ
(C) यण
(D) वृद्धि

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) दीर्घ
विद्या + आलय: आ + आ = आ, यह दीर्घ स्वर संधि है।

प्रश्न 5. ‘दशानन’ में कौन-सा समास है?

(A) द्विगु
(B) कर्मधारय
(C) बहुव्रीहि
(D) तत्पुरुष

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) बहुव्रीहि
दस हैं आनन (मुख) जिसके, अर्थात् रावण। अन्य पद प्रधान होने से बहुव्रीहि।

प्रश्न 6. ‘पेड़ से पत्ता गिरा’ में ‘से’ किस कारक का चिह्न है?

(A) करण
(B) अपादान
(C) कर्म
(D) संबंध

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) अपादान
यहाँ ‘से’ अलग होने का भाव बताता है, इसलिए अपादान कारक है।

प्रश्न 7. ‘को’ चिह्न किन दो कारकों में आता है?

(A) कर्ता और कर्म
(B) कर्म और संप्रदान
(C) करण और अपादान
(D) संबंध और अधिकरण

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) कर्म और संप्रदान
‘को’ कर्म (बच्चे को सुलाती है) और संप्रदान (गरीब को दान दो) दोनों में आता है।

प्रश्न 8. केंद्रीय हिंदी निदेशालय की नई मानक वर्णमाला (2024) में कुल वर्ण कितने हैं?

(A) 44
(B) 46
(C) 52
(D) 53

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) 53
11 स्वर + 2 अयोगवाह + 40 व्यंजन = 53। विशिष्ट व्यंजन ‘ळ’ जुड़ने से पुरानी गिनती 52 बढ़कर 53 हो गई। मूल वर्ण 44 और अयोगवाह सहित 46 होते हैं।

प्रश्न 9. ‘गंगा में घर है’ में कौन-सी शब्द-शक्ति है?

(A) अभिधा
(B) लक्षणा
(C) व्यंजना
(D) तात्पर्या

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) लक्षणा
मुख्यार्थ (गंगा की धारा) में बाधा है, इसलिए अर्थ होता है गंगा का किनारा।

प्रश्न 10. इनमें लोकोक्ति कौन-सी है?

(A) आँखें चुराना
(B) हाथ मलना
(C) अधजल गगरी छलकत जाय
(D) दाँत खट्टे करना

✅ उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) अधजल गगरी छलकत जाय
लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है; बाकी तीनों वाक्यांश हैं, यानी मुहावरे।

FAQ: हिंदी व्याकरण से जुड़े प्रश्न

❓ हिंदी व्याकरण किसे कहते हैं?
जो शास्त्र हिंदी भाषा के शुद्ध रूप (बोलने, लिखने और समझने) के नियम बताता है, उसे हिंदी व्याकरण कहते हैं। इसमें वर्ण, शब्द, पद और वाक्य के नियम पढ़े जाते हैं।
❓ हिंदी व्याकरण के कितने अंग होते हैं?
अधिकांश वैयाकरण तीन अंग मानते हैं: वर्ण-विचार, शब्द-विचार और वाक्य-विचार। कुछ विद्वान पद-विचार को अलग मानकर चार अंग गिनते हैं।
❓ हिंदी वर्णमाला में कुल कितने वर्ण हैं?
केंद्रीय हिंदी निदेशालय की मानक वर्णमाला (संशोधित संस्करण 2024) के अनुसार कुल 53 वर्ण हैं: 11 स्वर, 2 अयोगवाह (अं, अः) और 40 व्यंजन। इसमें विशिष्ट व्यंजन ‘ळ’ नया जोड़ा गया है, इसलिए पुरानी गिनती 52 अब 53 हो गई है। मूल वर्ण 44 माने जाते हैं।
❓ कथन (I): संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया विकारी शब्द हैं। कथन (II): क्रियाविशेषण भी विकारी शब्द है। कौन-सा कथन सही है?
केवल कथन (I) सही है। क्रियाविशेषण अविकारी (अव्यय) है, क्योंकि उसका रूप लिंग, वचन या काल से नहीं बदलता।
❓ सत्य या असत्य: संधि में पदों का और समास में वर्णों का मेल होता है।
असत्य। संधि में दो वर्णों का मेल होता है (विद्या + आलय = विद्यालय), जबकि समास में दो या अधिक पदों का मेल होता है (राजा का पुत्र = राजपुत्र)।
❓ अभिकथन (A): हिंदी में ‘को’ और ‘से’ दोनों दो-दो कारकों के चिह्न हैं। कारण (R): ‘को’ कर्म और संप्रदान में तथा ‘से’ करण और अपादान में आता है।
A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
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लेखक परिचय: केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान) | हिंदी साहित्य चैनल के संचालक
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