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विसर्ग संधि (Visarg Sandhi): परिभाषा, नियम, ट्रिक्स और नोट्स

विसर्ग संधि परिभाषा और नियम हिंदी व्याकरण नोट्स

अंतिम संशोधित (Last Updated): September 18, 2026

विसर्ग संधि: परिभाषा, नियम, उदाहरण और परीक्षा उपयोगी नोट्स

हिंदी व्याकरण के अंतर्गत संधि एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्कोरिंग टॉपिक है। विशेष रूप से विसर्ग संधि (Visarg Sandhi in Hindi) से प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UGC NET हिंदी, TGT, PGT, RPSC (स्कूल/कॉलेज व्याख्याता), REET, UPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। यदि आप हिंदी व्याकरण में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, तो विसर्ग संधि के नियमों,विसर्ग संधि के प्रकार,उदाहरण और उसके परिवर्तनों को समझना अनिवार्य है। इस लेख में हम विसर्ग संधि की परिभाषा, इसके सभी महत्वपूर्ण नियमों, ट्रिक्स और बहुविकल्पीय दृष्टिकोण से जुड़े सभी पहलुओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

🎯 Quick Overview (Visarg Sandhi)

  • टॉपिक का नाम: विसर्ग संधि (Visarg Sandhi)

  • संधि का प्रकार: स्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि (मुख्य तीन भेद)

  • परिभाषा: विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर जो विकार (परिवर्तन) होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।

  • मुख्य नियम: ‘ओ’ का बनना, ‘र’ का बनना, ‘ष/स/श’ का बनना और विसर्ग का लोप होना।

  • उपयोगी परीक्षाएँ: UGC NET, TGT, PGT, RPSC, REET, UPSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाएँ।

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1. विसर्ग संधि की परिभाषा(Visarg Sandhi ki Paribhasha)

संस्कृत और हिंदी व्याकरण में विसर्ग (ः) का प्रयोग स्वर के बाद किया जाता है। जब विसर्ग के पश्चात कोई स्वर अथवा व्यंजन आता है, तो उनके मेल से विसर्ग में जो परिवर्तन (विकार) उत्पन्न होता है, उसे विसर्ग संधि कहा जाता है।

विसर्गस्य स्वरव्यञ्जनेन मेलनं विसर्गसंधिः कथ्यते। (विसर्ग का स्वर या व्यंजन के साथ मेल ही विसर्ग संधि है।)

2. विसर्ग संधि के नियम(Visarg Sandhi ke Niyam)

विसर्ग संधि को आसानी से समझने और याद रखने के लिए इसके मुख्य नियमों को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया गया है:

नियम 1: ‘ओ’ का बनना (विसर्ग का ओ में परिवर्तन)

यदि विसर्ग से पहले ‘अ’ हो और उसके बाद किसी भी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण, अथवा य, र, ल, व, ह (सघोष वर्ण) में से कोई हो, तो विसर्ग ‘ओ’ में बदल जाता है।

  • ट्रिक: मनो + विकार = मनोविकार

उदाहरण:

  • अधः + वस्त्र = अधोवस्त्र

  • मनः + विकार = मनोविकार

  • मनः + हर = मनोहर

  • यशः + दा = यशोदा

  • अधः + गति = अधोगति

  • मनः + अनुकूल = मनोनुकूल

  • सरः + ज = सरोज

  • तेजः + रूप = तेजोरूप

  • पयः + धर = पयोधर

वाक्य शुद्धि के नियम, अशुद्धियाँ और उदाहरण

नियम 2: ‘र’ का बनना (विसर्ग का र में परिवर्तन)

यदि विसर्ग से पहले ‘अ’ या ‘आ’ को छोड़कर कोई अन्य स्वर हो और उसके बाद कोई स्वर या सघोष वर्ण हो, तो विसर्ग का ‘र’ (या आधा र) बन जाता है।

विसर्ग संधि के उदाहरण:

  • निः + आशा = निराशा

  • दुः + गम = दुर्गम

  • निः + गुण = निर्गुण

  • दुः + भाग्य = दुर्भाग्य

  • निः + धन = निर्धन

  • निः + बल = निर्बल

  • दुः + उपयोग = दुरुपयोग

  • आशिः + वाद = आशीर्वाद

  • निः + विकार = निर्विकार

नियम 3: ‘ष, स, श’ का बनना (विसर्ग का उष्म व्यंजनों में परिवर्तन)

यदि विसर्ग के बाद च, छ या श हो तो ‘श’; ट, ठ या ष हो तो ‘ष’; और त, थ या स हो तो ‘स’ बनता है।

उदाहरण:

  • निः + चल = निश्चित / निश्चल

  • दुः + शासन = दुःशासन / दुश्शासन

  • निः + संदेह = निस्संदेह

  • निः + चित = निश्चित

  • दुः + साहस = दुःसाहस

  • निः + संतान = निःसंतान

  • धनुः + टकार = धनुष्टकार

  • निः + शुल्क = निःशुल्क

नियम 4: विसर्ग का न बदलना (यथवत रहना)

यदि विसर्ग से पहले ‘अ’ या ‘आ’ हो और विसर्ग के बाद क, ख, प, फ में से कोई वर्ण आए, तो विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता और वह ज्यों का त्यों रहता है।

उदाहरण:

  • प्रातः + काल = प्रातःकाल

  • मनः + कल्पित = मनःकल्पित

  • अंतः + करण = अंतःकरण

  • अतः + करण = अतःकरण

  • रजः + कण = रजःकण

  • अधः + पतन = अधःपतन

  • प्रातः + काल = प्रातःकाल

  • मनः + कामना = मनःकामना

नियम 5: विसर्ग का लोप होना

यदि विसर्ग के बाद ‘र’ वर्ण आए, तो विसर्ग का लोप हो जाता है और उससे पहले का छोटा स्वर दीर्घ (बड़ा) हो जाता है।

उदाहरण:

  • निः + रस = नीरस

  • निः + रोग = नीरोग

  • दुः + राज = दुराज

  • निः + रव = नीरव

  • निः + रंध्र = नीरंध्र

📌 परीक्षार्थियों के लिए विशेष टिप्स (Exam Tips)

  • पहचान की ट्रिक: यदि किसी शब्द के मध्य में ‘ओ’ की मात्रा हो और उसका विच्छेद करने पर पहले पद के अंत में विसर्ग (ः) आए, तो वहाँ अधिकांशतः विसर्ग संधि होती है (जैसे- मनोदशा = मनः + दशा)।

  • अपवाद और विशेष ध्यान: ‘नीरोग’ शब्द की वर्तनी परीक्षा में बहुत पूछी जाती है। नियम के अनुसार यहाँ ‘निः + रोग’ मिलकर ‘नीरोग’ बनता है, अतः वर्तनी शुद्धि के लिहाज से यह अति महत्वपूर्ण है।

  • विसर्ग और व्यंजन में अंतर: विद्यार्थियों को अक्सर विसर्ग संधि और व्यंजन संधि के नियमों में भ्रम होता है; अतः शब्दों के मूल रूप और उनके उच्चारण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

संक्षेप में कहा जा सकता है कि हिंदी व्याकरण में विसर्ग संधि शब्दों के निर्माण और उनके शुद्ध रूप को समझने का एक आधार स्तंभ है। इसके नियम थोड़े तकनीकी अवश्य लग सकते हैं, किंतु नियमित अभ्यास और निश्चित ट्रिक्स के माध्यम से इसे परीक्षाओं में आसानी से हल किया जा सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए विसर्ग, व्यंजन और स्वर संधि के मिले-जुले उदाहरणों का निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. विसर्ग संधि किसे कहते हैं और इसके मुख्य नियम क्या हैं?
उत्तर: जब विसर्ग (ः) के बाद कोई स्वर या व्यंजन आता है, तो उनके परस्पर मेल से विसर्ग में जो विकार उत्पन्न होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। इसके मुख्य नियमों में विसर्ग का ‘ओ’ में बदलना, ‘र’ में बदलना, ‘श/ष/स’ में बदलना तथा विसर्ग का लोप होना शामिल है।

Q2. 'मनोहर' शब्द में कौन सी संधि है और इसका संधि-विच्छेद क्या होगा?
उत्तर: ‘मनोहर’ शब्द में विसर्ग संधि है। इसका सही संधि-विच्छेद मनः + हर होता है, जिसमें नियम के अनुसार विसर्ग ‘ओ’ में परिवर्तित हो जाता है।

Q3. 'नीरस' और 'नीरोग' शब्दों में विसर्ग संधि का कौन सा नियम लागू होता है?
उत्तर: इन शब्दों में यह नियम लागू होता है कि जब विसर्ग के बाद ‘र’ वर्ण आता है, तब विसर्ग का लोप हो जाता है और उससे पहले का लघु स्वर (इ, उ) दीर्घ (ई, ऊ) में बदल जाता है (जैसे- निः + रस = नीरस)।

Q4. किन परिस्थितियों में विसर्ग संधि होने पर भी विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता?
उत्तर: यदि विसर्ग से ठीक पहले ‘अ’ या ‘आ’ स्वर हो और विसर्ग के तुरंत बाद क, ख, प अथवा फ में से कोई वर्ण आए, तो विसर्ग में कोई विकार नहीं होता और वह यथावत बना रहता है (जैसे- प्रातः + काल = प्रातःकाल)।

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