हिंदी साहित्य के इतिहास में आदिकाल (जिसे ‘वीरगाथा काल’ भी कहा जाता है) हिंदी साहित्य का आरंभिक चरण माना जाता है, जो लगभग संवत 1050 से 1375 विक्रमी तक, यानी 7वीं शताब्दी के मध्य से 14वीं शताब्दी के मध्य तक फैला हुआ है। इस काल की मुख्य विशेषता राजाओं के आश्रय में रची गई वीरगाथात्मक रचनाएं (जैसे रासो ग्रंथ) थीं, जिनमें युद्धों का सजीव और अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन मिलता है। इसके साथ ही इस काल में सिद्ध, नाथ और जैन साहित्य के रूप में धार्मिक और उपदेशात्मक रचनाएं भी प्रचुर मात्रा में रची गईं। इस काल के प्रमुख कवियों में चंद्रबरदाई, अमीर खुसरो और विद्यापति का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।

महाकवि विद्यापति का जीवन परिचय और साहित्यिक परिचय

विद्यापति की प्रमुख रचनाएँ : जीवन परिचय, रचनाएँ, पदावली एवं साहित्यिक परिचय

विद्यापति की प्रमुख रचनाएँ, व्यक्तित्व एवं कृतित्व: संपूर्ण साहित्यिक परिचय हिंदी साहित्य के इतिहास में जब भी सौंदर्य, प्रेम, भक्ति और...

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रासो काव्य की विशेषताएँ और आदिकालीन हिंदी साहित्य

रासो काव्य की विशेषताएँ: हिंदी आदिकाल का प्रमुख साहित्यिक आयाम एवं संपूर्ण अध्ययन हिंदी साहित्य के इतिहास में आदिकाल (जिसे आचार्य रामच...

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हिंदी का प्रथम कवि कौन है? जानिए विभिन्न विद्वानों के मत | Hindi ka Pratham Kavi

हिंदी का प्रथम कवि कौन: विभिन्न विद्वानों के मत और विश्लेषण हिंदी साहित्य के इतिहास में 'हिंदी का प्रथम कवि कौन है?' यह एक ऐसा प्रश्न ...

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आचार्य शुक्ल के महत्वपूर्ण कथन | हिंदी साहित्य का इतिहास

इस आर्टिकल में हिंदी साहित्य इतिहास(Hindi Sahitya itihas) के अंतर्गत आचार्य शुक्ल के महत्वपूर्ण कथन(ramchandra shukla ke kathan) दिए गए...

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पद्मावती समय

पद्मावती समय – पृथ्वीराज रासो | व्याख्या सहित | प्रश्नोत्तर | Padmavati Samaya

इस आर्टिकल में पृथ्वीराज रासो के 'पद्मावती समय'(Padmavati Samaya) की व्याख्या समझायी गई है , साथ ही प्रश्नोत्तर दिए गए है। पद्मावती सम...

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