हिंदी साहित्य के इतिहास में आदिकाल (जिसे ‘वीरगाथा काल’ भी कहा जाता है) हिंदी साहित्य का आरंभिक चरण माना जाता है, जो लगभग संवत 1050 से 1375 विक्रमी तक, यानी 7वीं शताब्दी के मध्य से 14वीं शताब्दी के मध्य तक फैला हुआ है। इस काल की मुख्य विशेषता राजाओं के आश्रय में रची गई वीरगाथात्मक रचनाएं (जैसे रासो ग्रंथ) थीं, जिनमें युद्धों का सजीव और अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन मिलता है। इसके साथ ही इस काल में सिद्ध, नाथ और जैन साहित्य के रूप में धार्मिक और उपदेशात्मक रचनाएं भी प्रचुर मात्रा में रची गईं। इस काल के प्रमुख कवियों में चंद्रबरदाई, अमीर खुसरो और विद्यापति का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।