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क्रिया की परिभाषा और भेद (Kriya in Hindi) | TOP FACTS – प्रकार और उदाहरण

क्रिया की परिभाषा और भेद (Kriya in Hindi) थंबनेल - अकर्मक और सकर्मक क्रिया

अंतिम संशोधित (Last Updated): September 16, 2026

हिंदी व्याकरण: क्रिया की परिभाषा, भेद, धातु और संपूर्ण उदाहरण (Kriya in Hindi)

व्याकरण में ‘क्रिया’ (Kriya in Hindi) का अध्ययन किए बिना भाषा की संरचना को समझना असंभव है। यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC, REET) की तैयारी कर रहे हैं या हिंदी व्याकरण के मूल नियमों को मजबूत करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है। इस मास्टर गाइड में हम सरल और स्पष्ट भाषा में जानेंगे कि क्रिया किसे कहते हैं , क्रिया के मूल रूप यानी धातु का क्या अर्थ है, तथा कर्म, संरचना और काल के आधार पर क्रिया के कितने भेद और उदाहरण होते हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

इस आर्टिकल में आप क्या-क्या जानेंगे? (Quick Overview):

  • क्रिया क्या है? (परिभाषा, धातु और प्रत्यय की जानकारी)

  • कर्म के आधार पर क्रिया के भेद: अकर्मक (स्थिर व गतिशील) और सकर्मक (एककर्मी व द्विकर्मी), तथा अपूर्ण क्रियाएँ।

  • संरचना या प्रयोग के आधार पर भेद: संयुक्त, प्रेरणार्थक, पूर्वकालिक, नामधातु और सजातीय क्रिया।

  • काल और वाच्य के आधार पर क्रिया के रूपांतरण।

  • परीक्षा की दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण उदाहरण और विशेष टिप्स।

1. क्रिया की परिभाषा (Definition of Kriya)

  • मुख्य परिभाषा: ऐसे शब्द या पद जिससे किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं।

    विद्वानों और व्याकरण के अनुसार क्रिया के अन्य रूप व परिभाषाएँ:

    • जिस शब्द या शब्द समूह से हम किसी वस्तु के विषय में कुछ विधान करते हैं, उसे क्रिया कहते हैं।

    • जिस विकारी शब्द से वाक्य में किसी काम का करना या होना पाया जाता है, उसे क्रिया कहा जाता है।

    • काम का नाम बताने वाले शब्दों को ही क्रिया कहा जाता है।

    💡 विशेष टिप (आसान परिभाषा): कोई भी काम जिससे किसी एक्टिविटी, स्थिति या कार्य के होने का पता चले, वह क्रिया कहलाता है; जैसे— हँसना,नाचना, रोना, चिल्लाना, पढ़ना, लिखना,पीटना, सोना, दौड़ना आदि।

धातु (Root Word):

संस्कृत में क्रिया रूप को धातु के नाम से जाना जाता है, अर्थात् क्रियाओं के मूल रूप को धातु कहा जाता है। हिन्दी की सामान्य क्रियाओं का ‘ना’ शब्दांश हटा देने के बाद जो शेष बचता है (जैसे- पढ़, लिख, चल आदि), उसे ही धातु के नाम से जाना जाता है (जैसे- पढ़ना, लिखना, चलना आदि)।

  • नियम: प्रत्यय सदैव धातुओं के अन्त में जोड़े जाते हैं न कि क्रिया रूपों में (जैसे: लिखना + एंगे =लिखेंगे)

2. क्रिया के प्रकार और वर्गीकरण (Types of Kriya)

क्रिया मुख्यतः दो ही प्रकार की होती है (कर्म और संरचना के आधार पर), लेकिन इसके विकारक शब्दों और संरचना को शामिल करते हुए क्रिया को प्रमुख रूप से चार भागों में विभाजित किया जा सकता है:

  1. कर्म के आधार पर (अकर्मक, सकर्मक, अपूर्ण अकर्मक, अपूर्ण सकर्मक)

  2. संरचना या प्रयोग के आधार पर (संयुक्त, पूर्वकालिक, प्रेरणार्थक, सजातीय, नामधातु)

  3. काल के आधार पर (भूतकालिक, वर्तमानकालिक, भविष्यकालिक)

  4. वाच्य के आधार पर (कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य) (नोट: काल व वाच्य क्रिया के विकारक तत्व होते हैं।)

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3. कर्म के आधार पर क्रिया के भेद

वाक्य में कर्त्ता और क्रिया के संबंध के आधार पर इसके दो मुख्य उपभेद किए जाते हैं:

  • अकर्मक
  • सकर्मक

[1] अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb):

जब वाक्य में कर्त्ता, क्रिया के साथ कर्म मौजूद न हो तो उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। इसमें कार्य का फल सीधा कर्ता पर पड़ता है (जैसे- कूदना, जागना, उछलना, बरसना)।

  • उदा:

    • अशोक सो रहा है।

    • बच्चा रो रहा है।

अकर्मक क्रिया के दो उप-प्रकार होते हैं:

  • (i) स्थिर अकर्मक क्रियाएँ: क्रियाएँ जिन्हें कर्म की आवश्यकता नहीं होती, वह बिना कर्म के ही पूर्ण लगती हैं जो कर्ता की स्थिर दशा, अवस्था या स्थिति का बोध कराती हैं।

    • बालक रो रहा है।

    • दिनेश हँस रहा है।

    • गेहूँ पिस रहा है।

    • सीता गा रही है।

    • अशोक सो रहा है।

    • राम बैठा है।

  • (ii) गतिशील अकर्मक क्रियाएँ: इनमें भी कर्म की आवश्यकता नहीं होती, इन क्रियाओं को करते समय कर्ता को गतिशील रहना पड़ता है। इन क्रियाओं के साथ कभी स्थान की सूचना देने वाले शब्दों का भी प्रयोग किया जाता है, इन्हें ‘गत्यर्थक’ भी कहते हैं।

    • गाड़ी चलती है।

    • चिड़िया आकाश में उड़ रही है।

    • साँप रेंगता है।

    • चोर भाग रहा है ।
    • अशोक इस समय दरवाजे से निकल रहा है।

📌 महत्वपूर्ण नोट: निम्नलिखित क्रियाएँ सामान्यतः अकर्मक होती हैं— लज्जा होना, बढ़ना, सोना, खेलना, अकड़ना, डरना, बैठना, ठहरना, चमकना, मरना।

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[2] सकर्मक क्रिया (Transitive Verb):

जहाँ वाक्य में क्रिया के साथ कर्म मौजूद होता है और क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है, तो उस क्रिया को सकर्मक क्रिया कहा जाता है।

  • उदा:

    • मेहमान भोजन कर रहे हैं।

    • विद्यार्थी पेपर हल कर रहें है।
    • सुनीता पुस्तक पढ़ रही है।

सकर्मक क्रिया के दो उपभेद किए जाते हैं:

  • 1. एककर्मी क्रिया: जिस वाक्य में क्रिया के साथ केवल एक ही कर्म प्रयुक्त हो।

    • राम पत्र लिखता है।

    • बच्चे निबन्ध लिख रहे हैं।

    • सोहन आकाश में पतंग उड़ा रहा है।

    • बालिका नृत्य कर रही है।

    • सोहन चिड़िया को उड़ा रहा था।

    • किसान हल चला रहा है।

    • धोबी कपड़े धो रहा है।

  • 2. द्विकर्मी क्रिया: जिस वाक्य में क्रिया के साथ दो कर्म प्रयुक्त हों जिनमें से एक मुख्य कर्म और दूसरा गौण कर्म हो।

    • Note: प्रायः प्रधान या मुख्य कर्म निर्जीव अर्थात् अप्राणीवाचक होता है, जबकि अप्रधान या गौण कर्म सजीव अथवा प्राणीवाचक होता है।

    • मैंने उसे पुस्तक दी।

    • राधा ने मोहन को पुस्तक दी।

    • अशोक नौकर से पौधा लगवाता है।

    • अध्यापक जी छात्रों को हिन्दी व्याकरण पढ़ा रहे हैं।

अपूर्ण क्रियाएँ (Incomplete Verbs):

कुछ विद्वानों ने अकर्मक और सकर्मक क्रिया के एक-एक भेद और किए हैं:

  • [1] अपूर्ण अकर्मक क्रिया: ऐसी क्रियाएँ जिनके साथ कर्म मौजूद नहीं होता है लेकिन उन क्रियाओं को अपना अर्थ और भाव पूरा करने के लिए कुछ और विशेषणों (पूरक शब्दों) की आवश्यकता होती है।

    • विश्वजीत डॉक्टर बनेगा।

  • [2] अपूर्ण सकर्मक क्रिया: वह क्रियाएँ जिनके साथ कर्म तो मौजूद होता है फिर भी अर्थ और भाव को पूर्ण करने के लिए कुछ और विशेषणों की आवश्यकता होती है।

    • सर्वेश अशोक को मानता है (मित्र, अच्छे रूप में आदि)।

🔥 सुपर ट्रिक: अकर्मक और सकर्मक क्रिया की चुटकियों में पहचान कैसे करें?

गोल्डन रूल (Golden Rule): क्रियापद से ठीक पहले ‘क्या’, ‘किसे’ या ‘किसको’ लगाकर प्रश्न कीजिए।

  • राम ने आम खाया।
  • बच्चा सोता है।
  • यदि उत्तर मिल जाए ➔ तो वह सकर्मक क्रिया होगी। (जैसे: राम ने क्या खाया? ➔ आम [उत्तर मिला, अतः सकर्मक])

  • यदि कोई उत्तर न मिले ➔ तो वह अकर्मक क्रिया होगी। (जैसे: बच्चा क्या सोता है? ➔ कोई उत्तर नहीं [अतः अकर्मक])

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4. संरचना के आधार पर क्रिया के प्रकार और वर्गीकरण

संरचना या प्रयोग की दृष्टि से क्रिया के पाँच प्रमुख भेद किए जाते हैं:

1. संयुक्त क्रिया (Compound Verb):

जो क्रिया दो या दो से अधिक क्रियाओं या धातु रूपों से मिलकर बनी होती है अर्थात् जब दो या दो से अधिक क्रियाएँ वाक्य में एक साथ प्रयुक्त होकर किसी एक ही कार्य को पूर्ण करती हैं। उन्हें संयुक्त क्रिया कहते है।

  • वह चल सकता है (चल – मुख्य क्रिया, सकता – सहायक क्रिया)।

  • राम ने रावण को बाण से मार गिराया।

  • हम पढ़ाना चाहते हैं।

  • अब मोहन को सो जाना चाहिए।

2. प्रेरणार्थक क्रिया (Causative Verb):

वे क्रियाएँ जिन्हें कर्ता स्वयं न करके दूसरों को प्रेरणा देकर या प्रेरित करके करवाई जाती हैं। उन्हें प्रेरणार्थक क्रिया कहते है।

  • नियम: अकर्मक क्रियाएँ कभी भी प्रेरणार्थक नहीं होती हैं। प्रेरणार्थक क्रियाएँ सदैव सकर्मक होती हैं।

    • प्रथम प्रेरणार्थक: चलाना – चलाता; हँसाना – हँसाता।

    • द्वितीय प्रेरणार्थक: चलाना – चलवाना; हँसाना – हँसवाना।

  • राम श्याम से पत्र लिखवाता है।

  • मोहन ने माली से दूब कटवाई।

  • गोपाल कृष्ण को हँसाता है।

3. पूर्वकालिक क्रिया (Pre-temporal Verb):

जब किसी वाक्य में कर्ता किसी एक क्रिया को पूर्ण करके दूसरी क्रिया प्रारम्भ करता है, तो पहले समाप्त होने वाली क्रिया को पूर्वकालिक क्रिया कहा जाता है।

  • मोहन ने नहाकर भोजन किया।

  • उसने खेलकूद और पढ़कर विश्राम किया।

  • बालक रोते-सोते सो गया।

  • विशेष: पूर्वकालिक क्रिया के साथ ‘ही’ निपात लगने पर यह तात्कालिक क्रिया बन जाती है; जैसे— मोहन ने नहाते ही भोजन किया।

4. नामधातु क्रिया (Denominative Verb):

जो क्रियाएँ विकारी शब्दों यानी संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण शब्दों के अन्त में प्रत्यय जोड़ कर बनाई जाती हैं। वे नामधातु क्रिया कहलाती है ।

  • हाथ (संज्ञा)  – हथियाना

  • बात (संज्ञा) – बतियाना

  • अपना (सर्वनाम) – अपनाना

  • झूठ (विशेषण) – झुठलाना

5. सजातीय क्रिया (Cognate Verb):

वे क्रियाएँ जिनसे कर्म भी बना होता है अर्थात् क्रिया और कर्म एक ही धातु से बने होते हैं। वे सजातीय क्रिया कहलाती है।

  • वह खाना खाता है (‘खा’ धातु)

  • वह गाना गाता है (‘गा’ धातु)

  • भारत ने पाक से लड़ाई लड़ी (‘लड़’ धातु)

5. काल और वाच्य के आधार पर क्रिया का स्वरूप

  • काल के आधार पर: क्रिया के व्यापार, समय, पूर्णता और अपूर्णता का बोध कराने वाले तत्व को काल कहते हैं। इसके 3 मुख्य भेद हैं— भूतकाल, वर्तमानकाल और भविष्यकाल।

  • वाच्य के आधार पर: क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि वाक्य का मुख्य विषय कर्ता है, कर्म है या भाव, उसे वाच्य कहते हैं। इसके 3 भेद हैं— कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य।

📌 निष्कर्ष (Conclusion)

हिंदी व्याकरण में क्रिया की परिभाषा और भेद (Kriya in Hindi) का अध्ययन किसी भी प्रतियोगी परीक्षा या भाषा की संरचना को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। वाक्य की आत्मा कहे जाने वाले इस विकारी शब्द—चाहे वह धातु से बने रूप हों, कर्म के आधार पर अकर्मक व सकर्मक भेद हों, अथवा संरचना और काल के नियम—इनकी स्पष्ट समझ होना अत्यंत आवश्यक है। परीक्षा में शत-प्रतिशत सफलता और अपने व्याकरण को मजबूत करने के लिए इस मास्टर गाइड के सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं और उदाहरणों का नियमित अभ्यास करते रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्रिया किसे कहते हैं और इसका उदाहरण क्या है?
जिस विकारी शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं[cite: 1]। जैसे— पढ़ना, लिखना, हँसना, दौड़ना आदि। इसके बिना किसी भी वाक्य की रचना असंभव है।
प्रश्न 2: क्रिया के मूल रूप को क्या कहा जाता है?
क्रिया के मूल रूप को धातु कहा जाता है[cite: 1]। हिंदी की सामान्य क्रियाओं के अंत से ‘ना’ प्रत्यय हटाने पर जो अंश बचता है, वही धातु कहलाता है[cite: 1]; जैसे— ‘पढ़’ धातु से ‘पढ़ना’ क्रिया बनती है[cite: 1]।
प्रश्न 3: कर्म के आधार पर क्रिया के कितने भेद होते हैं?
कर्म के आधार पर क्रिया के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं[cite: 1]— (1) अकर्मक क्रिया (जिसमें कर्म नहीं होता और फल कर्ता पर पड़ता है) और (2) सकर्मक क्रिया (जिसमें कर्म का होना आवश्यक होता है)[cite: 1]।
प्रश्न 4: अकर्मक और सकर्मक क्रिया में क्या अंतर है?
जिस क्रिया का फल सीधा कर्ता पर पड़े और वाक्य में कर्म न हो, वह अकर्मक क्रिया है[cite: 1] (जैसे- बच्चा सो रहा है[cite: 1])। वहीं, जिस क्रिया का फल कर्म पर पड़े और ‘क्या’ या ‘किसे’ प्रश्न करने पर उत्तर मिले, वह सकर्मक क्रिया है[cite: 1] (जैसे- राम आम खाता है)।
प्रश्न 5: पूर्वकालिक क्रिया किसे कहते हैं?
जब किसी वाक्य में कर्ता एक कार्य को पूरी तरह समाप्त करके तुरंत दूसरी क्रिया शुरू करता है, तो पहले समाप्त होने वाली क्रिया को पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं[cite: 1]। जैसे— मोहन नहाकर पढ़ने बैठा (यहाँ ‘नहाकर’ पूर्वकालिक क्रिया है)।
प्रश्न 6: प्रेरणार्थक क्रिया का क्या अर्थ है?
जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी अन्य व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है या उससे कार्य करवाता है, तब वहाँ प्रेरणार्थक क्रिया होती है[cite: 1]। जैसे— पढ़ाना से पढ़वाना या लिखना से लिखवाना[cite: 1]।
प्रश्न 7: संरचना या प्रयोग की दृष्टि से क्रिया के कितने भेद होते हैं?
संरचना या प्रयोग की दृष्टि से क्रिया के प्रमुख रूप से पाँच भेद माने गए हैं[cite: 1]— संयुक्त क्रिया, पूर्वकालिक क्रिया, प्रेरणार्थक क्रिया, नामधातु क्रिया और सजातीय क्रिया[cite: 1]।

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