अंतिम संशोधित (Last Updated): August 27, 2026
असंगति अलंकार के प्रसिद्ध उदाहरण, अर्थ एवं स्पष्टीकरण (Asangati Alankar in Hindi)
हिंदी काव्यशास्त्र और व्याकरण में ‘असंगति’ का अर्थ मेल न खाना होता है। जब किसी काव्य में कार्य कहीं और हो और उसका कारण कहीं और बताया जाए (अर्थात जहाँ कारण और कार्य में संगति या मेल न हो), तब वहाँ ‘असंगति अलंकार’ (Asangati Alankar) होता है। सामान्य नियम यह है कि कारण और कार्य एक ही स्थान पर होते हैं, किंतु इस अलंकार में कवि दोनों स्थानों में भिन्नता दिखाकर अनूठा चमत्कार उत्पन्न करता है। यूजीसी नेट (UGC NET), जेआरएफ (JRF), पीजीटी (PGT), और टीजीटी (TGT) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में असंगति अलंकार के प्रसिद्ध उदाहरणों से जुड़े प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं। इस लेख में हमने परीक्षाओं की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण उदाहरणों को उनके संपूर्ण अर्थ और स्पष्टीकरण के साथ संकलित किया है।
📌 असंगति अलंकार के महत्वपूर्ण उदाहरण(Asangati Alankar ke Udaharan)
1. ‘हृदय घाव मेरे पीर रघुवीरे।’
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काव्य पंक्ति:
हृदय घाव मेरे पीर रघुवीरे।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: चोट या घाव मेरे हृदय में लगा है, लेकिन उसकी पीड़ा (दर्द) भगवान श्री राम (रघुवीर) को हो रही है।
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स्पष्टीकरण: घाव होने का स्थान हृदय है और पीड़ा का अनुभव होने का स्थान रघुवीर का शरीर है, अतः यहाँ कारण और कार्य में असंगति है।
2. ‘लगा-लगी लोचन करे, नाहक मन बान्ध्यो जाए।’
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काव्य पंक्ति:
लगा-लगी लोचन करे, नाहक मन बान्ध्यो जाए।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: प्रेम या आँखें लड़ने का कार्य नयन (आँखें) कर रहे हैं, लेकिन फालतू में बंधन या कष्ट मन को सहना पड़ रहा है।
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स्पष्टीकरण: क्रिया आँखों द्वारा हो रही है और उसका परिणाम मन पर पड़ रहा है, इसलिए यह असंगति अलंकार है।
3. ‘सीता ही ले दस्कन्दर गयो, पे गयो बेचारो समुद्र बान्ध्यो।’
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काव्य पंक्ति:
सीता ही ले दस्कन्दर गयो,
पे गयो बेचारो समुद्र बान्ध्यो।
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स्पष्टीकरण: कार्य और स्थान की भिन्नता के कारण यहाँ असंगति का सुंदर रूप देखने को मिलता है।
4. ‘दृग उरजति टूटत कुटुम्ब जुरात चतुर प्रीत, परत गाँठ दुरजन हिय, दई नई नई यह रीत।’
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काव्य पंक्ति:
दृग उरजति टूटत कुटुम्ब जुरात चतुर प्रीत,
परत गाँठ दुरजन हिय, दई नई नई यह रीत।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: आँखें आपस में उलझती हैं, लेकिन टूटता परिवार है; प्रेम चतुर लोगों का जुड़ता है, लेकिन दुष्टों के हृदय में गाँठ (ईर्ष्या) पड़ जाती है।
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स्पष्टीकरण: क्रिया कहीं और हो रही है और उसका असर या प्रभाव किसी अन्य स्थान पर पड़ रहा है, जो असंगति अलंकार का उत्कृष्ट उदाहरण है।
5. ‘राज देन कहें सुदिन साधा, कहो जान वन केहि अपराधा।’
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काव्य पंक्ति:
राज देन कहें सुदिन साधा,
कहो जान वन केहि अपराधा।
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स्पष्टीकरण: राजतिलक के शुभ दिन तय होने का कार्य और बिना अपराध वन भेजने की घटना में असंगति दर्शाई गई है।
6. ‘रहिमन जिहा बावरी कह गई सरग पताल। आपु तो कह भीतर गई, जूती खात कपाल।’
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काव्य पंक्ति:
रहिमन जिहा बावरी कह गई सरग पताल।
आपु तो कह भीतर गई, जूती खात कपाल।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: रहीम कहते हैं कि पगली जीभ उल्टी-सीधी बात कहकर खुद तो मुँह के अंदर छिप जाती है, लेकिन बेचारी मार (जूतियाँ) सिर (कपाल) को खानी पड़ती है।
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स्पष्टीकरण: गलती या बात जीभ करती है, और उसका दंड कपाल (सिर) को भुगतना पड़ता है। स्थान परिवर्तन के कारण यहाँ पक्की असंगति है।
7. ‘उर में बिजली सी चमकी, नैनों में जलभर आया।’
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काव्य पंक्ति:
उर में बिजली सी चमकी, नैनों में जलभर आया।
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स्पष्टीकरण: चमकने का स्थान हृदय (उर) है और जल (आँसू) भरने का स्थान नैन हैं।
8. ‘क्या जाने आज अचानक किस स्मृति का घन घिर आया।’
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काव्य पंक्ति:
क्या जाने आज अचानक किस स्मृति का घन घिर आया।
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स्पष्टीकरण: मानसिक स्मृति और बादलों के घिरने की स्थिति में विलक्षण असंगति का भाव है।
9. ‘मेरे जीवन की उलझन, बिखरी थी उनकी अलकें। पीली मधु मदिरा किसने थी बंद हमारी पलकें।’
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काव्य पंक्ति:
मेरे जीवन की उलझन, बिखरी थी उनकी अलकें।
पीली मधु मदिरा किसने थी बंद हमारी पलकें।
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स्पष्टीकरण: बाल (अलकें) उनके बिखरे हैं और उलझन जीवन में महसूस हो रही है।
10. ‘विष पीते हैं मेघ, विरहिणी प्राण निकलते।’
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काव्य पंक्ति:
विष पीते हैं मेघ, विरहिणी प्राण निकलते।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: आसमान में बादल (मेघ) विष रूपी पानी पीते हैं, और तड़पकर प्राण विरहिणी नायिका के निकलने लगते हैं।
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स्पष्टीकरण: कार्य (विष/जलपान) बादल कर रहे हैं, और उसका कष्टदायक परिणाम (प्राण निकलना) विरहिणी भुगत रही है। यह असंगति अलंकार का अत्यंत प्रसिद्ध उदाहरण है।
📌 निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में कहा जाए तो, ‘असंगति अलंकार’ काव्य का एक ऐसा अनोखा सौंदर्य है जहाँ कारण और कार्य के पारंपरिक संबंधों को उलट दिया जाता है। जब पाठक कारण और कार्य की इस भिन्नता को समझता है, तो काव्य का असली आनंद प्राप्त होता है। उम्मीद है कि इन प्रमुख उदाहरणों और उनके स्पष्टीकरण से आपको असंगति अलंकार को समझने में पूरी मदद मिली होगी।