अंतिम संशोधित (Last Updated): August 26, 2026
यमक अलंकार के उदाहरण, अर्थ एवं स्पष्टीकरण (Yamak Alankar in Hindi)
हिंदी काव्यशास्त्र में जब काव्य में एक ही शब्द बार-बार आए और हर बार उसका अर्थ भिन्न-भिन्न (अलग) हो, तब वहाँ ‘यमक अलंकार’ (Yamak Alankar) होता है। इसके मुख्य रूप से दो भेद होते हैं—परावृत्ति यमक या अभंग यमक (जहाँ पूरे पद की आवृत्ति हो) और भागावृत्ति यमक या संभग यमक (जहाँ मात्र अंश की आवृत्ति हो)। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से आपकी पाठ्य-सामग्री से लिए गए प्रमुख उदाहरण नीचे दिए गए हैं।
📌 यमक अलंकार के प्रमुख उदाहरण (Yamak Alankar Examples)
1. ‘काली घटा का घमंड घटा।’ (Kali Ghata Ka Ghamand Ghata)
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काव्य पंक्ति:
काली घटा का घमंड घटा।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: आकाश में छाई हुई काली घटा का गर्व अब कम हो गया है।
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स्पष्टीकरण: पहले ‘घटा’ का तात्पर्य बादल तथा दूसरे ‘घटा’ का अर्थ कम होना है।
2. ‘तरणि के साथ ही तरल तरंग में तरणि डूबी थी हमारी ताल में।’ (Tarani aur Tarani Yamak)
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काव्य पंक्ति:
तरणि के साथ ही तरल तरंग में तरणि डूबी थी हमारी ताल में।
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स्पष्टीकरण: यहाँ ‘तरणि’ शब्द की आवृत्ति से भिन्न अर्थ प्रकट होते हैं।
3. ‘कंद मूल भोग करे, कंद मूल भोग करे। तीन बेर खाती ते वे, तीन बेर खाती है।’ (Teen Ber Khati Hai)
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काव्य पंक्ति:
कंद मूल भोग करे, कंद मूल भोग करे।
तीन बेर खाती ते वे, तीन बेर खाती है।
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स्पष्टीकरण: यहाँ पहले ‘तीन बेर’ का अर्थ तीन बार और दूसरे ‘तीन बेर’ का अर्थ तीन फल है।
4. ‘कनक-कनक तें सो गुनी मादकता अधिकाय।’ (Kanak Kanak Te Sau Guni)
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काव्य पंक्ति:
कनक-कनक तें सो गुनी मादकता अधिकाय।
वा खाये बौराय जग, वा पाये बौराय।
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स्पष्टीकरण: एक ‘कनक’ का अर्थ धतूरा और दूसरे ‘कनक’ का अर्थ सोना है।
5. ‘सारंग ले सरंग चली, सारंग पुगो आय। सारंग ले सरंग धरयौ, सारंग सारंग माय।’ (Sarang Yamak Alankar)
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काव्य पंक्ति:
सारंग ले सरंग चली, सारंग पुगो आय।
सारंग ले सरंग धरयौ, सारंग सारंग माय।
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स्पष्टीकरण: यहाँ ‘सारंग’ शब्द अलग-अलग संदर्भों में भिन्न अर्थों में प्रयुक्त हुआ है।
6. ‘सुज्यो कहूँ तरु अर्क ते अर्क समान उदोतु।’ (Arak Yamak Alankar)
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काव्य पंक्ति:
सुज्यो कहूँ तरु अर्क ते अर्क समान उदोतु।
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स्पष्टीकरण: यहाँ पहले ‘अर्क’ का अर्थ वृक्ष (आक) तथा दूसरे ‘अर्क’ का अर्थ सूर्य है।
7. ‘तो पर वारो उरबसी सुन राधिके सुजान। तू मोहन के उरबसी हवै उरबसी समान।’ (Urbasi Yamak Alankar)
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काव्य पंक्ति:
तो पर वारो उरबसी सुन राधिके सुजान।
तू मोहन के उरबसी हवै उरबसी समान।
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स्पष्टीकरण: यहाँ ‘उरबसी’ शब्द के अर्थ हृदय में बसने और अप्सरा उर्वशी के रूप में भिन्न हैं।
8. ‘निबल के बल राम है।’ (Nibal Ke Bal Ram)
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काव्य पंक्ति:
निबल के बल राम है।
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स्पष्टीकरण: यह संभग यमक या भागावृत्ति यमक का उदाहरण है।
9. ‘मोहन अब मत्त मांहि है, मोह न अब मन मांहि है।’ (Mohan aur Moh)
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काव्य पंक्ति:
मोहन अब मत्त मांहि है, मोह न अब मन मांहि है।
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स्पष्टीकरण: यहाँ शब्दों के अंश की आवृत्ति से यमक अलंकार बना है।
10. ‘माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। करका मनका डारि दे मनका मनका फेर।’ (Mala Pherat Jug Bhaya)
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काव्य पंक्ति:
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
करका मनका डारि दे मनका मनका फेर।
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स्पष्टीकरण: यहाँ ‘मनका’ शब्द के अर्थ माला का दाना और मन का विचार अलग-अलग हैं।
11. ‘पच्छी परछिने ऐसे परे पर छीने वीर, तेरी बरछी ने बर छीने हैं खलन के।’ (Pachhi Parchhine)
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काव्य पंक्ति:
पच्छी परछिने ऐसे परे पर छीने वीर,
तेरी बरछी ने बर छीने हैं खलन के।
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स्पष्टीकरण: यहाँ शब्दों की पुनरावृत्ति से भिन्न अर्थ प्रकट होते हैं।
12. ‘फूल रहें हैं फूलकर फूल उपवन में।’ (Phool Rahe Hain Phoolkar)
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काव्य पंक्ति:
फूल रहें हैं फूलकर फूल उपवन में।
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स्पष्टीकरण: यह भागावृत्ति यमक (संभग यमक) का सुंदर उदाहरण है।
📌 निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में, ‘यमक अलंकार’ (Yamak Alankar Meaning) काव्य में शब्दों के दोहराव के माध्यम से अनूठा सौंदर्य और अर्थ-चमत्कार उत्पन्न करता है। इसके दोनों भेद (अभंग और सभंग यमक) छात्रों के लिए व्याकरण अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।