काव्यशास्त्र

उपमा अलंकार (Upma Alankar): परिभाषा, अंग, भेद और उदाहरण

Upma Alankar ke Bhed aur Udaharan

अंतिम संशोधित (Last Updated): September 23, 2026

उपमा अलंकार (Upma Alankar): परिभाषा, अंग, भेद और संपूर्ण उदाहरण सहित

काव्य की शोभा बढ़ाने वाले धर्मों को अलंकार कहते हैं। अलंकारों में उपमा अलंकार का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। यदि आप हिंदी व्याकरण, स्कूल परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे टीजीटी-पीजीटी, नेट-जेआरएफ) की तैयारी कर रहे हैं, तो उपमा अलंकार को विस्तार से समझना आपके लिए बेहद जरूरी है। आइए इसे बिल्कुल सरल और व्यवस्थित तरीके से समझते हैं।

उपमा शब्द का अर्थ

  • ‘उपमा’ शब्द ‘उप’ और ‘मा’ के योग से बना है।
  • यहाँ ‘उप’ का अर्थ होता है— ‘समीप’ (पास) और ‘मा’ का अर्थ होता है— ‘मापना’ (अर्थात समीप रखकर तुलना करना)।
  • सामान्य अर्थ: उपमा का सामान्य अर्थ है ‘समानता’ या ‘तुलना’। अर्थात् जब किसी एक वस्तु की दूसरी वस्तु से किसी विशेष गुण, स्वभाव आदि के आधार पर समानता स्थापित की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है।
  • उदाहरण: “मुख कमल के समान सुंदर है।”—कथन में ‘मुख’ (एक वस्तु) की समानता (तुलना) दूसरी वस्तु ‘कमल’ से की गई है, अतः यहाँ उपमा अलंकार मानी जायेगी।

उपमा अलंकार की परिभाषा (Upma Alankar ki Paribhasha)

जहाँ दो भिन्न वस्तुओं या व्यक्तियों में उनकी किसी समान विशेषता, रूप, गुण या धर्म के कारण समानता या तुलना दिखाई जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। संस्कृत काव्यशास्त्र के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘चंद्रालोक’ और ‘कुवलयानन्द’ के अनुसार:

“स्फुटं सुन्दरयोः साम्यमुपमेत्यभिधीयते।”

अर्थात्, दो सुंदर वस्तुओं (उपमेय और उपमान) के स्पष्ट साम्य (समानता) को उपमा कहते हैं।

उपमा अलंकार के प्रमुख अंग (Upma Alankar ke Ang)

किसी भी सादृश्यमूलक अर्थालंकार के मुख्यतः चार अंग माने जाते हैं:
  1. उपमेय (प्रस्तुत पदार्थ): कवि जिस पदार्थ का वर्णन करता है, उसे ‘उपमेय’ या ‘प्रस्तुत पदार्थ’ कहा जाता है। (जैसे: “चन्द्रमा-सा कान्तिमय मुख रूप दर्शन है तुम्हारा” में ‘मुख’ उपमेय है)।
  2. उपमान (अप्रस्तुत पदार्थ): कवि अपने द्वारा वर्णित सामान्य पदार्थ की जिस प्रसिद्ध पदार्थ से समानता व्यक्त करता है, अर्थात् जो उदाहरण प्रस्तुत करता है, उसे ‘उपमान’ या ‘अप्रस्तुत पदार्थ’ कहा जाता है। (जैसे: उपर्युक्त उदाहरण में ‘चन्द्रमा’ उपमान है)।
    • नोट: संस्कृत में उपमेय को ‘प्राकृत’ तथा उपमान को ‘सम’ भी कहते हैं।
  3. वाचक शब्द: समानता के अर्थ को प्रकट करने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, वे वाचक शब्द कहलाते हैं। जैसे— सा, सी, से, सम, सरिस, इव, जिमि, सदृश, लौं इत्यादि उपमा वाचक शब्द माने जाते हैं।
  4. साधारण धर्म: उपमेय (प्रस्तुत पदार्थ) तथा उपमान (अप्रस्तुत पदार्थ) दोनों में जो समान विशेषता या समान लक्षण या समान गुण पाये जाते हैं, उसे साधारण धर्म कहा जाता है।

उपमा अलंकार के भेद (Upma Alankar ke Bhed)

उपमा के मुख्य रूप से दो भेद माने जाते हैं:

  • पूर्णोपमा अलंकार
  • लुप्तोपमा अलंकार

(1) पूर्णोपमा अलंकार

उपमा अलंकार के जिस पद में उपमा के चारों अंग मौजूद रहते हैं, उसे पूर्णोपमा अलंकार माना जाता है।
  • पूर्णोपमा के अन्य प्रमुख उदाहरण:
    1. “राम लखन सहित, सोहत पर्ण-निकेत। जिमि बस वासव अमरपुर, सची जयन्त समेत।”
      • उपमेय: राम-सीता-लखन, पर्ण-निकेत
      • उपमान: वासव (इन्द्र), शची-जयन्त (इन्द्र का पुत्र), अमरपुर (इन्द्रवती नगरी)
      • साधारण धर्म: सोहत (शोभा पाना)
      • वाचक शब्द: जिमि (जैसे)
    2. “मोम सा तन घुल चुका, अब दीप सा दिल जल रहा है।”
      • उपमेय: तन, दिल
      • उपमान: मोम, दीप
      • साधारण धर्म: घुल चुका, जल रहा है
      • वाचक शब्द: सा, सा
    3. “पीपर पात सरिस मन डोला।”
      • उपमेय: मन
      • उपमान: पीपर पात
      • साधारण धर्म: डोला
      • वाचक शब्द: सरिस
    4. “पहेली सा जीवन है व्यस्त।”
      • उपमेय: जीवन
      • उपमान: पहेली
      • साधारण धर्म: है व्यस्त
      • वाचक शब्द: सा

काव्य हेतु : परिभाषा, भेद और विभिन्न आचार्यों के मत

(2) लुप्तोपमा अलंकार

उपमा अलंकार के जिस पद में उपमा के चारों अंगों में से कोई एक या अधिक अंग लुप्त होते हैं, उसे लुप्तोपमा अलंकार माना जाता है। इसके मुख्य भेद और उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  1. धर्मलुप्तोपमा:
    • उदाहरण: “कोटि कुलिस सम वचन तुम्हारा।”
    • विश्लेषण: यहाँ वचन (उपमेय) है, कुलिस (उपमान) है और सम (वाचक शब्द) है, परंतु ‘कठोरता’ नामक साधारण धर्म का यहाँ कथन नहीं किया गया है, अतः यह धर्मलुप्तोपमा है.
  2. उपमेय लुप्तोपमा:
    • उदाहरण: “बिलपत लखन सिय सब रानी।”
    • विश्लेषण: कटु बानी (उपमेय – कड़वी बोली), कुलिस (उपमान – वज्र), कठोर (साधारण धर्म), और वाचक शब्द लुप्त है.
  3. अन्य लुप्तोपमा उदाहरण:
    • उदाहरण 1: “नई लगनि कुल की सकुच, विकल भई अकुलाई। दुहूँ ओर ऐंची फिरिति, फिरकी लौं दिनु जाइ।” (यहाँ उपमेय लुप्त है, उपमान ‘फिरकी’ है, साधारण धर्म ‘दूहुँ ओर ऐंची फिरती’ है और वाचक शब्द ‘लौं’ है).
    • उदाहरण 2: “तीन लोक झाँकी, ऐसी दूसरी न झाँकी जैसी। झाँकी हम झाँकी, बाँकी जुगलकिसोर की।” (यहाँ जुगल किशोर की झाँकी ‘उपमेय’ है, उपमान लुप्त है, साधारण धर्म ‘बाँकी’ (सुंदर) है और वाचक शब्द ‘ऐसी’ है).
    • उदाहरण 3: “चंचल हैं ज्यों मीन, अरुणारे पंकज सरिस। निरखि न होय अधीन, ऐसो नरनागर कवन।” (यहाँ उपमेय लुप्त है, उपमान ‘मीन/पंकज’ है, साधारण धर्म ‘चंचल/अरुनारे’ है और वाचक शब्द ‘ज्यों/सरिस’ है).

उपमा का अन्य भेद: मालोपमा अलंकार

  • जब किसी पद में एक ही उपमेय के लिए अनेक उपमानों का प्रयोग कर दिया जाता है, तब वहाँ मालोपमा अलंकार माना जाता है.
  • मालोपमा के उदाहरण:
    1. “मुख चन्द्र और कमल के समान है।”—यहाँ ‘मुख’ उपमेय के लिए ‘चन्द्र’ और ‘कमल’ दो उपमान कहे गए हैं.
    2. “चन्द्रमा सा कान्तिमय, मुदु कमल सा कोमल मुख।”

📌 उपमा अलंकार के 10 महत्वपूर्ण उदाहरण (Upma Alankar ke Udaharan)

1. ‘मंजुल मुख राशि के समान सुंदर है’

  • काव्य पंक्ति:

    मंजुल मुख राशि के समान सुंदर है,

    देखत छवि मन होत विभोर सदा।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: किसी सुंदर मुख की राशि चंद्रमा या खजाने के समान अत्यंत सुंदर है, जिसकी छवि देखकर मन हमेशा विभोर हो जाता है।

  • स्पष्टीकरण: यहाँ मुख (उपमेय) की तुलना ‘मंजुल मुख राशि’ (उपमान) से ‘समान’ (वाचक शब्द) और ‘सुंदर’ (साधारण धर्म) के माध्यम से की गई है, जिससे यहाँ उपमा अलंकार स्पष्ट होता है।

2. ‘कमल के समान लगता है मनोहर।’

  • काव्य पंक्ति:

    कमल के समान लगता है मनोहर,

    रूप तुम्हारा हे जग के पालनहार।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: हे प्रभु! आपका रूप इस संसार में कमल के फूल के समान अत्यंत मनोहर और आकर्षक लगता है।

  • स्पष्टीकरण: रूप (उपमेय) की तुलना कमल (उपमान) से ‘के समान’ (वाचक) तथा ‘मनोहर’ (साधारण धर्म) के द्वारा की गई है।

3. ‘नंदन जैसा नहीं और उपवन है कोई।’

  • काव्य पंक्ति:

    नंदन जैसा नहीं और उपवन है कोई,

    जहँ बसत निरंतर सुरत-प्रसाद सोई।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: स्वर्ग के नंदन वन जैसा सुंदर इस संसार में अन्य कोई उपवन नहीं है, जहाँ देवताओं की कृपा बरसती हो।

  • स्पष्टीकरण: यहाँ किसी विशिष्ट उपवन (उपमेय) की तुलना इंद्र के ‘नंदन वन’ (उपमान) से ‘जैसा’ (वाचक शब्द) के जरिए की गई है।

4. ‘पड़ी थी बिजली सी सरस विकराल।’

  • काव्य पंक्ति:

    पड़ी थी बिजली सी सरस विकराल,

    विकल हो उठे लोक सभी तत्क्षण काल।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: वह विपत्ति या आफत ऐसे टूटी मानो कोई रसयुक्त और अत्यंत भयानक बिजली आ गिरी हो।

  • स्पष्टीकरण: यहाँ उस विकराल स्थिति (उपमेय) की तुलना ‘बिजली’ (उपमान) से ‘सी’ (वाचक) और ‘सरस विकराल’ (साधारण धर्म) के साथ की गई है।

5. ‘नीरज सरिस नयन रघुवर के।’

  • काव्य पंक्ति:

    नीरज सरिस नयन रघुवर के,

    जासु विलोकहिं भव-भय हर के।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: भगवान श्री राम (रघुवर) के नेत्र कमल के समान सुंदर हैं, जिनके दर्शन मात्र से संसार के सभी भय दूर हो जाते हैं।

  • स्पष्टीकरण: नेत्रों (उपमेय) की तुलना कमल यानी ‘नीरज’ (उपमान) से ‘सरिस’ (वाचक शब्द) के माध्यम से की गई है।

6. ‘वारिज नयन राम इत आये।’

  • काव्य पंक्ति:

    वारिज नयन राम इत आये,

    सकल जनन के दुःख बिसराये।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: कमल जैसे नेत्रों वाले (वारिज नयन) श्री राम इधर पधारे हैं, जिन्होंने सभी लोगों के दुखों को भुला दिया है।

  • स्पष्टीकरण: श्री राम के नयनों (उपमेय) की तुलना ‘वारिज’ यानी कमल (उपमान) से की गई है, जो उपमा अलंकार का सुंदर उदाहरण है।

7. ‘हरिमुख सम सुंदर कहु कैसे।’

  • काव्य पंक्ति:

    हरिमुख सम सुंदर कहु कैसे,

    उपमान मिलै नहिं जगत में जैसे।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: भगवान श्री हरि के मुख के समान सुंदर इस संसार में अन्य कोई दूसरा मुख या उपमान कैसे मिल सकता है?

  • स्पष्टीकरण: हरि के मुख (उपमेय) की तुलना के लिए संसार में अन्य किसी उपमान का न मिलना और ‘सम’ (वाचक) शब्द का प्रयोग उपमा अलंकार को दर्शाता है।

8. ‘कनक बेलि सी सुवरन बारी।’

  • काव्य पंक्ति:

    कनक बेलि सी सुवरन बारी,

    लसत रूप की ज्योति अपारि।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: सोने की लता (कनक बेलि) के समान सुनहरे और कोमल शरीर वाली वह नायिका रूप की अपार ज्योति से सुशोभित हो रही है।

  • स्पष्टीकरण: सुवर्ण शरीर या नायिका (उपमेय) की तुलना ‘कनक बेलि’ (उपमान) से ‘सी’ (वाचक शब्द) के द्वारा की गई है।

9. ‘बिना प्राण के जैसे गात।’

  • काव्य पंक्ति:

    बिना प्राण के जैसे गात,

    तैसे ही सूनी सगरी रात।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: जिस प्रकार शरीर प्राणों के बिना व्यर्थ व निष्प्राण हो जाता है, वैसे ही यह पूरी रात सूनी लग रही है।

  • स्पष्टीकरण: सूनी रात (उपमेय) की तुलना ‘बिना प्राण के शरीर’ (उपमान) से ‘जैसे’ (वाचक शब्द) के माध्यम से की गई है।

10. ‘दया की तरह उदार, दुआ की तरह मददगार।’

  • काव्य पंक्ति:

    दया की तरह उदार, दुआ की तरह मददगार,

    ऐसी शख्सियत थी उनकी जग में अपार।

  • काव्य पंक्ति का अर्थ: उनका स्वभाव दया के समान अत्यंत उदार और हर परिस्थिति में दुआ की तरह सहायता करने वाला था।

  • स्पष्टीकरण: व्यक्तित्व की उदारता और मदद करने के गुण की तुलना क्रमशः ‘दया’ और ‘दुआ’ (उपमान) से ‘की तरह’ (वाचक) शब्द के द्वारा की गई है।

निष्कर्ष (Conclusion)

उम्मीद है कि उपमा अलंकार (Upma Alankar) से जुड़ा यह लेख आपको अच्छी तरह समझ आ गया होगा। हिंदी व्याकरण में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इसके अंगों (उपमेय, उपमान, वाचक शब्द, साधारण धर्म) और इसके भेदों (पूर्णोपमा व लुप्तोपमा) का अभ्यास करना बहुत जरूरी है। यदि इस टॉपिक से संबंधित आपका कोई भी सवाल या सुझाव हो, तो आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बता सकते हैं!

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

उपमा अलंकार किसे कहते हैं और इसका शाब्दिक अर्थ क्या है?
‘उपमा’ शब्द ‘उप’ और ‘मा’ के योग से बना है, जहाँ ‘उप’ का अर्थ ‘समीप’ (पास) और ‘मा’ का अर्थ ‘मापना’ या तुलना करना है। जब किसी एक वस्तु की दूसरी प्रसिद्ध वस्तु से किसी विशेष गुण या स्वभाव के आधार पर समानता या तुलना की जाती है, तो वहाँ उपमा अलंकार होता है (जैसे— “मुख कमल के समान सुंदर है”)।
उपमा अलंकार के कितने अंग होते हैं?
उपमा अलंकार के मुख्य रूप से चार अंग (अवयव) होते हैं: उपमेय: जिस वस्तु या पदार्थ का वर्णन किया जा रहा हो. उपमान: जिससे तुलना की जा रही हो (प्रसिद्ध वस्तु). वाचक शब्द: समानता प्रकट करने वाले शब्द (जैसे— सा, सी, सम, सरिस, जिमि आदि). साधारण धर्म: उपमेय और उपमान दोनों में पाया जाने वाला समान गुण.
पूर्णोपमा और लुप्तोपमा अलंकार में क्या अंतर है?
पूर्णोपमा अलंकार: जहाँ काव्य या पद में उपमा के चारों अंग (उपमेय, उपमान, वाचक शब्द और साधारण धर्म) स्पष्ट रूप से मौजूद रहते हैं. लुप्तोपमा अलंकार: जहाँ उपमा के चारों अंगों में से कोई एक या अधिक अंग लुप्त (गायब) होते हैं (जैसे धर्मलुप्तोपमा या उपमेयलुप्तोपमा)।
मालोपमा अलंकार क्या होता है? इसका एक उदाहरण दीजिए।
जब किसी पद में एक ही उपमेय के लिए अनेक उपमानों का प्रयोग किया जाता है, तब वहाँ मालोपमा अलंकार होता है। उदाहरण: “मुख चन्द्र और कमल के समान है।” (यहाँ मुख एक उपमेय है, लेकिन उसके लिए चन्द्रमा और कमल दो उपमानों का प्रयोग किया गया है)।

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