काव्यशास्त्र

उपमा अलंकार (Upma Alankar): परिभाषा, अंग, भेद और उदाहरण

Upma Alankar ke Bhed aur Udaharan

उपमा अलंकार (Upma Alankar): परिभाषा, अंग, भेद और संपूर्ण उदाहरण सहित

काव्य की शोभा बढ़ाने वाले धर्मों को अलंकार कहते हैं। अलंकारों में उपमा अलंकार का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। यदि आप हिंदी व्याकरण, स्कूल परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे टीजीटी-पीजीटी, नेट-जेआरएफ) की तैयारी कर रहे हैं, तो उपमा अलंकार को विस्तार से समझना आपके लिए बेहद जरूरी है। आइए इसे बिल्कुल सरल और व्यवस्थित तरीके से समझते हैं।

1. उपमा शब्द का अर्थ

  • ‘उपमा’ शब्द ‘उप’ और ‘मा’ के योग से बना है।
  • यहाँ ‘उप’ का अर्थ होता है— ‘समीप’ (पास) और ‘मा’ का अर्थ होता है— ‘मापना’ (अर्थात समीप रखकर तुलना करना)।
  • सामान्य अर्थ: उपमा का सामान्य अर्थ है ‘समानता’ या ‘तुलना’। अर्थात् जब किसी एक वस्तु की दूसरी वस्तु से किसी विशेष गुण, स्वभाव आदि के आधार पर समानता स्थापित की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है।
  • उदाहरण: “मुख कमल के समान सुंदर है।”—कथन में ‘मुख’ (एक वस्तु) की समानता (तुलना) दूसरी वस्तु ‘कमल’ से की गई है, अतः यहाँ उपमा अलंकार मानी जायेगी।

2. उपमा अलंकार के प्रमुख अंग (अवयव)

किसी भी सादृश्यमूलक अर्थालंकार के मुख्यतः चार अंग माने जाते हैं:
  1. उपमेय (प्रस्तुत पदार्थ): कवि जिस पदार्थ का वर्णन करता है, उसे ‘उपमेय’ या ‘प्रस्तुत पदार्थ’ कहा जाता है। (जैसे: “चन्द्रमा-सा कान्तिमय मुख रूप दर्शन है तुम्हारा” में ‘मुख’ उपमेय है)।
  2. उपमान (अप्रस्तुत पदार्थ): कवि अपने द्वारा वर्णित सामान्य पदार्थ की जिस प्रसिद्ध पदार्थ से समानता व्यक्त करता है, अर्थात् जो उदाहरण प्रस्तुत करता है, उसे ‘उपमान’ या ‘अप्रस्तुत पदार्थ’ कहा जाता है। (जैसे: उपर्युक्त उदाहरण में ‘चन्द्रमा’ उपमान है)।
    • नोट: संस्कृत में उपमेय को ‘प्राकृत’ तथा उपमान को ‘सम’ भी कहते हैं।
  3. वाचक शब्द: समानता के अर्थ को प्रकट करने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, वे वाचक शब्द कहलाते हैं। जैसे— सा, सी, से, सम, सरिस, इव, जिमि, सदृश, लौं इत्यादि उपमा वाचक शब्द माने जाते हैं।
  4. साधारण धर्म: उपमेय (प्रस्तुत पदार्थ) तथा उपमान (अप्रस्तुत पदार्थ) दोनों में जो समान विशेषता या समान लक्षण या समान गुण पाये जाते हैं, उसे साधारण धर्म कहा जाता है।

3. उपमा अलंकार के भेद

(1) पूर्णोपमा अलंकार

उपमा अलंकार के जिस पद में उपमा के चारों अंग मौजूद रहते हैं, उसे पूर्णोपमा अलंकार माना जाता है।
  • पूर्णोपमा के अन्य प्रमुख उदाहरण:
    1. “राम लखन सहित, सोहत पर्ण-निकेत। जिमि बस वासव अमरपुर, सची जयन्त समेत।”
      • उपमेय: राम-सीता-लखन, पर्ण-निकेत
      • उपमान: वासव (इन्द्र), शची-जयन्त (इन्द्र का पुत्र), अमरपुर (इन्द्रवती नगरी)
      • साधारण धर्म: सोहत (शोभा पाना)
      • वाचक शब्द: जिमि (जैसे)
    2. “मोम सा तन घुल चुका, अब दीप सा दिल जल रहा है।”
      • उपमेय: तन, दिल
      • उपमान: मोम, दीप
      • साधारण धर्म: घुल चुका, जल रहा है
      • वाचक शब्द: सा, सा
    3. “पीपर पात सरिस मन डोला।”
      • उपमेय: मन
      • उपमान: पीपर पात
      • साधारण धर्म: डोला
      • वाचक शब्द: सरिस
    4. “पहेली सा जीवन है व्यस्त।”
      • उपमेय: जीवन
      • उपमान: पहेली
      • साधारण धर्म: है व्यस्त
      • वाचक शब्द: सा

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(2) लुप्तोपमा अलंकार

उपमा अलंकार के जिस पद में उपमा के चारों अंगों में से कोई एक या अधिक अंग लुप्त होते हैं, उसे लुप्तोपमा अलंकार माना जाता है। इसके मुख्य भेद और उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  1. धर्मलुप्तोपमा:
    • उदाहरण: “कोटि कुलिस सम वचन तुम्हारा।”
    • विश्लेषण: यहाँ वचन (उपमेय) है, कुलिस (उपमान) है और सम (वाचक शब्द) है, परंतु ‘कठोरता’ नामक साधारण धर्म का यहाँ कथन नहीं किया गया है, अतः यह धर्मलुप्तोपमा है.
  2. उपमेय लुप्तोपमा:
    • उदाहरण: “बिलपत लखन सिय सब रानी।”
    • विश्लेषण: कटु बानी (उपमेय – कड़वी बोली), कुलिस (उपमान – वज्र), कठोर (साधारण धर्म), और वाचक शब्द लुप्त है.
  3. अन्य लुप्तोपमा उदाहरण:
    • उदाहरण 1: “नई लगनि कुल की सकुच, विकल भई अकुलाई। दुहूँ ओर ऐंची फिरिति, फिरकी लौं दिनु जाइ।” (यहाँ उपमेय लुप्त है, उपमान ‘फिरकी’ है, साधारण धर्म ‘दूहुँ ओर ऐंची फिरती’ है और वाचक शब्द ‘लौं’ है).
    • उदाहरण 2: “तीन लोक झाँकी, ऐसी दूसरी न झाँकी जैसी। झाँकी हम झाँकी, बाँकी जुगलकिसोर की।” (यहाँ जुगल किशोर की झाँकी ‘उपमेय’ है, उपमान लुप्त है, साधारण धर्म ‘बाँकी’ (सुंदर) है और वाचक शब्द ‘ऐसी’ है).
    • उदाहरण 3: “चंचल हैं ज्यों मीन, अरुणारे पंकज सरिस। निरखि न होय अधीन, ऐसो नरनागर कवन।” (यहाँ उपमेय लुप्त है, उपमान ‘मीन/पंकज’ है, साधारण धर्म ‘चंचल/अरुनारे’ है और वाचक शब्द ‘ज्यों/सरिस’ है).

4. उपमा का अन्य भेद: मालोपमा अलंकार

  • जब किसी पद में एक ही उपमेय के लिए अनेक उपमानों का प्रयोग कर दिया जाता है, तब वहाँ मालोपमा अलंकार माना जाता है.
  • मालोपमा के उदाहरण:
    1. “मुख चन्द्र और कमल के समान है।”—यहाँ ‘मुख’ उपमेय के लिए ‘चन्द्र’ और ‘कमल’ दो उपमान कहे गए हैं.
    2. “चन्द्रमा सा कान्तिमय, मुदु कमल सा कोमल मुख।”

निष्कर्ष (Conclusion)

उम्मीद है कि उपमा अलंकार (Upma Alankar) से जुड़ा यह लेख आपको अच्छी तरह समझ आ गया होगा। हिंदी व्याकरण में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इसके अंगों (उपमेय, उपमान, वाचक शब्द, साधारण धर्म) और इसके भेदों (पूर्णोपमा व लुप्तोपमा) का अभ्यास करना बहुत जरूरी है। यदि इस टॉपिक से संबंधित आपका कोई भी सवाल या सुझाव हो, तो आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बता सकते हैं!

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

उपमा अलंकार किसे कहते हैं और इसका शाब्दिक अर्थ क्या है?
‘उपमा’ शब्द ‘उप’ और ‘मा’ के योग से बना है, जहाँ ‘उप’ का अर्थ ‘समीप’ (पास) और ‘मा’ का अर्थ ‘मापना’ या तुलना करना है। जब किसी एक वस्तु की दूसरी प्रसिद्ध वस्तु से किसी विशेष गुण या स्वभाव के आधार पर समानता या तुलना की जाती है, तो वहाँ उपमा अलंकार होता है (जैसे— “मुख कमल के समान सुंदर है”)।
उपमा अलंकार के कितने अंग होते हैं?
उपमा अलंकार के मुख्य रूप से चार अंग (अवयव) होते हैं: उपमेय: जिस वस्तु या पदार्थ का वर्णन किया जा रहा हो. उपमान: जिससे तुलना की जा रही हो (प्रसिद्ध वस्तु). वाचक शब्द: समानता प्रकट करने वाले शब्द (जैसे— सा, सी, सम, सरिस, जिमि आदि). साधारण धर्म: उपमेय और उपमान दोनों में पाया जाने वाला समान गुण.
पूर्णोपमा और लुप्तोपमा अलंकार में क्या अंतर है?
पूर्णोपमा अलंकार: जहाँ काव्य या पद में उपमा के चारों अंग (उपमेय, उपमान, वाचक शब्द और साधारण धर्म) स्पष्ट रूप से मौजूद रहते हैं. लुप्तोपमा अलंकार: जहाँ उपमा के चारों अंगों में से कोई एक या अधिक अंग लुप्त (गायब) होते हैं (जैसे धर्मलुप्तोपमा या उपमेयलुप्तोपमा)।
मालोपमा अलंकार क्या होता है? इसका एक उदाहरण दीजिए।
जब किसी पद में एक ही उपमेय के लिए अनेक उपमानों का प्रयोग किया जाता है, तब वहाँ मालोपमा अलंकार होता है। उदाहरण: “मुख चन्द्र और कमल के समान है।” (यहाँ मुख एक उपमेय है, लेकिन उसके लिए चन्द्रमा और कमल दो उपमानों का प्रयोग किया गया है)।

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