हिंदी व्याकरण

उपसर्ग (Upsarg in Hindi): परिभाषा, भेद, उदाहरण और संपूर्ण व्याकरण

Upsarg in Hindi Definition, Types and Examples - उपसर्ग की परिभाषा और भेद नोट्स

उपसर्ग (Upsarg in Hindi): परिभाषा, भेद, उदाहरण और संपूर्ण व्याकरण अध्ययन

प्रस्तावना (Introduction)

हिंदी व्याकरण में शब्द-निर्माण की प्रक्रिया में उपसर्ग (Upsarg) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी भाषा को समृद्ध बनाने और उसके शब्द-भंडार में वृद्धि करने के लिए उपसर्गों की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे टीजीटी, पीजीटी, नेट-जेआरएफ, यूपीएससी और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाएँ) की दृष्टि से यह टॉपिक बहुत अधिक स्कोरिंग माना जाता है। इस लेख में हम उपसर्ग की परिभाषा, उसके भेदों (संस्कृत, हिंदी और विदेशी उपसर्ग), तथा दो उपसर्गों से बने महत्वपूर्ण शब्दों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

1. उपसर्ग की परिभाषा और अर्थ

  • उपसर्ग का शाब्दिक अर्थ: उपसर्ग दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘उप’ (पास या समीप) + ‘सर्ग’ (सृष्टि करना या निर्माण करना)। इसका अर्थ होता है— किसी शब्द के पास आकर नया शब्द बनाना।

  • परिभाषा: वे शब्दांश जो किसी शब्द के पूर्व अथवा पहले लगकर उस शब्द का अर्थ बदल देते हैं अथवा उसमें नई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। अथवा, वे लघुत्तम सार्थक शब्द खंड जो अन्य शब्दों के आदि (शुरुआत) में जुड़कर उनका अर्थ बदल देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।

  • सामान्य उदाहरण:

    • प्र + हार = प्रहार (चोट करना)

    • उप + कार = उपकार (भलाई)

    • आ + हार = आहार (भोजन) (यहाँ ‘हार’ मूल शब्द के आगे क्रमशः प्र, उप और आ उपसर्ग जुड़ने से उनके अर्थ में पूर्ण परिवर्तन हो गया है।)

2. उपसर्ग के मुख्य भेद

हिंदी भाषा में प्रयोग के आधार पर उपसर्गों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  1. संस्कृत के उपसर्ग (तत्सम)

  2. हिंदी के उपसर्ग (तद्भव)

  3. विदेशी उपसर्ग (उर्दू / अंग्रेजी)

(क) संस्कृत के उपसर्ग (तत्सम उपसर्ग)

संस्कृत भाषा में कुल 22 मूल उपसर्ग माने गए हैं, जो तत्सम शब्दों के साथ हिंदी में प्रयुक्त होते हैं। इनके प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • अति (अधिक): अतिशय, अतिक्रमण, अतिवृष्टि, अतिशीघ्र, अत्यन्त, अत्याचार

  • अधि (प्रधान/श्रेष्ठ): अधिनियम, अधिनायक, अधिकृत, अधिकरण, अध्यक्ष, अध्ययन

  • अनु (पीछे): अनुचर, अनुज, अनुकरण, अनुकूल, अनुवाद, अनुभव

  • अप (बुरा): अपयश, अपशब्द, अपकर, अपकीर्ति, अपव्यय, अपशकुन

  • अभि (पास): अभिवादन, अभिमान, अभिनव, अभिनय, अभिभाषण, संयोग

  • अव (हीनता): अवगुण, अवनति, अवगति, अवशेष, अवज्ञा, आरोहण

  • (तक/से): आघात, आरक्षण, आमरण, आगमन, आजीवन, आजन्म

  • उत् (श्रेष्ठ): उत्पत्ति, उत्कंठा, उत्पीड़न, उत्कृष्ट, उन्नत, उल्लेख

  • उप (सहायक): उपभोग, उपवन, उपमन्त्री, उपयोग, उपनाम, उपहार

  • दुर् / दुस् (कठिन/बुरा): दुर्दशा, दुराग्रह, दुर्गण, दुराचार, दुवस्था, दुरुपयोग, दुश्चिन्ता, दुःशासन, दुष्कर, दुष्कर्म, दुस्साहस, दुसाध्य

  • नि / निस् (बिना/बाहर): निडर, निगम, निवास, निषेध, निबन्ध, निषिद्ध, निश्चय, निश्चल, निष्काम, निष्कर्म, निष्पाप, निष्फल

  • निर् (बिना): निराकार, निरादर, नीरोग, नीरस, निरीह, निरक्षर

  • प्र (आगे): प्रदान, प्रवल, प्रयोग, प्रसार, प्रहार, प्रबल

  • परा (विपरीत): पराजय, पराभव, पराक्रम, परामर्श, परावर्तन

  • परि (चारों ओर): परिक्रमा, परिवार, परिपूर्ण, परिश्रम, परीक्षा, पर्याप्त

  • प्रति (प्रत्येक): प्रतिदिन, प्रत्येक, प्रतिकूल, प्रतिहिंसा, प्रतिरूप, प्रतिध्वनि

  • वि (विशेष): विजय, विहार, विख्यात, व्याधि, व्यसन, व्यवहार

  • सु (अच्छा): सुगन्ध, सुयश, सुमन, सुलभ, सुबोध, सुशील

  • सम् (अच्छी तरह): सन्तोष, संगठन, संलग्न, संकल्प, संशय, संरक्षा

  • अन् (नहीं/बुरा): अनन्त, अनुपयोगी, अनुपयुक्त, अनागत, अनिष्ट, अनुपम

(ख) हिंदी के उपसर्ग (तद्भव उपसर्ग)

हिंदी के उपसर्ग ज्यादातर संस्कृत उपसर्गों के अपभ्रंश हैं और ये विशेष तौर पर तद्भव शब्दों के पहले आते हैं:

  • अन (नहीं): अनबन, अनपढ़, अनजान, अनहोनी, अनमोल, अनचाहा

  • अध (आधा): अधपका, अधमरा, अधजला, अधखिला, अधनंगा, अधगला

  • उन (एक कम): उन्चालीस, उन्नीस, उनतीस, उनसठ, उन्नासी

  • (अव): औगुन, औगढ़, औसर, औघट, औतार

  • कु (बुरा): कुपुत्र, कुरूप, कुख्यात, कुचक्र, कुरीति

  • चौ (चार): चौराहा, चौमासा, चौपाया, चौरंगा, चौकन्ना, चौमुखा

  • पच (पाँच): पचरंगा, पचमेल, पचकूटा, पचमढ़ी

  • पर (दूसरा): परहित, परदेशी, परजीवी, परकोटा, परलोक, परोपकार

  • बिन (बिना): बिन खाया, बिनब्याहा, बिनबोया, बिनमाँगा, बिनबुलाया

  • भर (पूरा): भरपेट, भरपूर, भरकम, भरसक, भरमार, भरपाई

  • (सहित): सफल, सबल, सगुण, सजीव, सावधान, सकर्मक

  • चिर (सदैव): चिरयौवन, चिरपरिचित, चिरकाल, चिरायु, चिरस्थायी

  • (नहीं): नकुल, नास्तिक, नग, नपुंसक, नगण्य, नेति

  • बहु (ज्यादा): बहुमूल्य, बहुवचन, बहुमत, बहुभुज, बहुविवाह, बहुसंख्यक

  • आप (स्वयं): आपकाज, आपबीती, आपकही, आपसुनी

  • सम (समान): समकोण, समतल, समदर्शी, समकालीन, समग्र

  • दु (बुरा/हीन): दुत्कार, दुबला, दुर्जन, दुर्बल, दुकाल

(ग) विदेशी के उपसर्ग (उर्दू, फारसी और अंग्रेजी)

हिंदी में विदेशी भाषाओं के प्रभाव से कई उपसर्गों का प्रयोग होने लगा है:

उर्दू के उपसर्ग:

  • ला (बिना): लावारिस, लाचार, लाजवाब, लापरवाह, लापता

  • बद (बुरा): बदसूरत, बदनाम, बददिमाग, बदबू, बदकिस्मत

  • बे (बिना): बेकाम, बेअसर, बेरहम, बेईमान

  • कम (थोड़ा): कमबख्त, कमज़ोर, कमदिमाग, कमअकल, कमउम्र

  • गैर (के बिना): गैरकानूनी, गैरजरूरी, गैरहाज़िर, गैरसरकारी

  • ना (अभाव): नाराज, नालायक, नामुमकिन, नादान, नापसन्द

  • खुश (श्रेष्ठता): खुशनुमा, खुशगवार, खुशमिज़ाज, खुशबू, खुशदिल

  • हम (बराबर): हमउम्र, हमदर्दी, हमराज, हमपेशा

  • ऐन (ठीक): ऐनवक्त, ऐनजगह, ऐनमौके

  • सर (मुख्य): सरताज, सरदार, सरपंच, सरकार

  • बेश (अत्यधिक): बेशकीमती, बेशुमार, बेशक्ल, बेशऊर

  • बा (सहित): बाकायदा, बाइज्जत, बाअदब, बामौका

  • अल (निश्चित): अलबत्ता, अलविदा, अलसुबह, अलगरज

अंग्रेजी के उपसर्ग:

  • सब (अधीन): सब-रजिस्ट्रार, सब-जज, सब-कमेटी, सब-इंस्पेक्टर

  • हाफ (आधा): हाफकमीज, हाफटिकट, हाफपेन्ट, हाफशर्ट

  • को (सहित): को-आपरेटिव, को-आपरेशन, को-एजुकेशन

  • हैड (मुख्य): हैडमास्टर, हैडऑफिस, हैडक्लर्क, हैडबॉय

  • वाइस (सहायक): वाइसराय, वाइस-चांसलर, वाइस-प्रेसीडेंट

3. दो उपसर्गों से निर्मित महत्वपूर्ण शब्द

हिंदी व्याकरण में कई ऐसे शब्द भी होते हैं जिनमें एक साथ दो उपसर्गों का प्रयोग किया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से ये बहुत महत्वपूर्ण हैं:

  • निर् + आ + करण = निराकरण

  • प्रति + उप + कार = प्रत्युपकार

  • सु + सम् + कृत = सुसंस्कृत

  • अन् + आ + हार = अनाहार

  • सम् + आ + चार = समाचार

  • अन् + आ + सक्ति = अनासक्ति

  • अ + सु + रक्षित = असुरक्षित

  • सम् + आ + लोचना = समालोचना

  • सु + सम् + गठित = सुसंगठित

  • अ + नि + यंत्रित = अनियंत्रि

  • अति + आ + चार = अत्याचार

निष्कर्ष (Conclusion)

उपसर्ग हिंदी व्याकरण का एक बेहद दिलचस्प और स्कोरिंग हिस्सा है। शब्दों के आगे जुड़कर उनके अर्थ को चमकाने या बदलने वाले ये शब्दांश भाषा की सुंदरता को बढ़ाते हैं। यदि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करनी है, तो संस्कृत, हिंदी और विदेशी उपसर्गों के साथ-साथ दो उपसर्गों वाले शब्दों का नियमित अभ्यास करना अत्यंत आवश्यक है।

उपसर्ग किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
वे शब्दांश जो किसी शब्द के पूर्व अथवा पहले लगकर उस शब्द का अर्थ बदल देते हैं अथवा उसमें नई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। उदाहरण के लिए— प्र + हार = प्रहार, उप + कार = उपकार, और आ + हार = आहार।

संस्कृत में कुल कितने मूल उपसर्ग होते हैं?
संस्कृत भाषा में कुल 22 मूल उपसर्ग माने गए हैं, जो तत्सम शब्दों के साथ हिंदी में प्रयुक्त होते हैं (जैसे— अति, अधि, अनु, अप, अभि, अव, आ, उत्, उप, दुर्, दुस्, नि, निस्, निर्, प्र, परा, परि, प्रति, वि, सु, सम्, अन्)।

हिंदी के उपसर्ग (तद्भव उपसर्ग) क्या होते हैं और ये कहाँ प्रयोग किए जाते हैं?
हिंदी के उपसर्ग ज्यादातर संस्कृत उपसर्गों के अपभ्रंश हैं, और ये विशेष तौर पर तद्भव शब्दों के पहले आते हैं। इसके प्रमुख उदाहरण हैं— अन (अनबन, अनपढ़), अध (अधपका, अधमरा), उन (उन्नीस, उनतीस), कु (कुपुत्र, कुरूप), और भर (भरपेट, भरपूर) आदि।

हिंदी में कुल कितने उपसर्ग होते हैं?
पाठ्यसामग्री के अनुसार, संस्कृत भाषा में कुल 22 मूल उपसर्ग माने गए हैं, जो तत्सम शब्दों के साथ हिंदी में प्रयुक्त होते हैं। इसके अलावा, हिंदी के अपने तद्भव उपसर्ग तथा उर्दू, फारसी और अंग्रेजी के विदेशी उपसर्ग भी हिंदी में व्यापक रूप से प्रयोग किए जाते हैं।

संधि की परिभाषा, भेद, नियम और उदाहरण

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