काव्यशास्त्र

कवित्त छंद की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण | Kavitt Chhand in Hindi

कवित्त छंद की परिभाषा, नियम और उदाहरण चार्ट (Kavitta Chhand Definition and Examples in Hindi)

अंतिम संशोधित (Last Updated): September 21, 2026

कवित्त छंद (Kavitt Chhand in Hindi) – परिभाषा, प्रकार और संपूर्ण उदाहरण

यदि आप हिंदी व्याकरण में कवित्त छंद (Kavitt Chhand), इसके प्रकार, परिभाषा और उदाहरणों की तलाश कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी है। इस आर्टिकल में हमने परीक्षा की दृष्टि से कवित्त छंद और घनाक्षरी छंद की संपूर्ण जानकारी को बहुत ही सरल भाषा में समझाया है।

1. कवित्त छंद क्या है? (Kavitt Chhand Definition)

कवित्त छंद हिंदी साहित्य (विशेषकर रीतिकाल और भक्तिकाल) का एक अत्यंत लोकप्रिय और महत्वपूर्ण वार्णिक वृत्त (या वर्णिक छंद) है। इसे ‘घनाक्षरी छंद’ के नाम से भी जाना जाता है।

  • छंद का प्रकार: यह एक मात्रिक-वार्णिक (मुख्यतः वर्णों की गणना पर आधारित) और सामयिक/मुक्तक छंद माना जाता है।

  • चरण (पैर): इसके प्रत्येक पद में सामान्यतः 4 चरण होते हैं।

  • वर्णों की संख्या:

    • साधारण कवित्त (घनाक्षरी) के प्रत्येक चरण में कुल 31 वर्ण होते हैं (16 और 15 वर्णों पर यति/विराम होता है)।

    • इसके अन्य मुख्य भेद भी होते हैं जैसे रूपमाला, देवघनाक्षरी, कवित्त (घनाक्षरी) आदि, जहाँ वर्णों की संख्या बदल सकती है (जैसे 32 वर्णों का ‘रूपघनाक्षरी’ और 33 वर्णों का ‘देवघनाक्षरी’)।

  • यति और गति: इसमें प्रत्येक चरण के अंत में गुरु-लघु (या नियमों के अनुसार) यति होती है। साधारण कवित्त में 16 और 15 वर्णों पर विराम (यति) होता है और अंत में सामान्यतः गुरु वर्ण होता है।

कवित्त छंद का उदाहरण (Kavitt Chhand Example)

डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के, सुमन झिंगुला सौहैं तन छबि भारी है।

पवन झुलावै केकी कीर बतरावै शदेवश कोकिल हलावे हुलसावे कर तारी है।

पूरित पराग सो उतारो करै राई नोन, कंजकली नायिका लतान सिर मारी है।

मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि, प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी है।।

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2. कवित्त छंद के प्रकार (Types of Kavitt Chhand)

मुख्य रूप से कवित्त छंद के दो भेद माने जाते हैं:

(क) मनहरण कवित्त (Manharan Kavitt)

  • लक्षण: इसके प्रत्येक चरण में 31-31 वर्ण होते हैं और 16 व 15 वर्णों पर यति होती है।

  • उदाहरण:

    खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, वलि, बनिक को बनिज, न चाकर को चाकरी।

    जीविका बिहीन लोग सीद्यमान सोच बस, कहें एक एकनसों, ‘कहाँ जाई, का करी?’

    वेदहू पुरान कही, लोकहू बिलोकिआत, साँकरे सबै पै, राम! रावरें कृपा करी।

    दारिद-दसानन दहाई दुनी, दीनबंधु! दुरित-दहन देखि तुलसी हहा करी।।

3. घनाक्षरी छंद (Ghanakshari Chhand)

यह भी कवित्त का ही एक रूप है जो दंडक श्रेणी में आता है।

  • लक्षण: इसके प्रत्येक चरण में 32 या 33 वर्ण होते हैं। इसमें लघु-गुरु का कोई कड़ा नियम नहीं होता।

घनाक्षरी छंद के दो भेद (Types of Ghanakshari Chhand):

  1. रूप घनाक्षरी: इसके प्रत्येक चरण में 32 वर्ण होते हैं।

    • उदाहरण:

      नगर से दूर कुछ गाँव सी बस्ती है एक, हरे हरे खेतों के समीप अति अभिराम।

      जहाँ पत्रजाल अन्तराल से झलकते हैं, लाल रूपरैल श्वेत छज्जों के सँवारे धाम।।

  2. देव घनाक्षरी: इसके प्रत्येक चरण में 33 वर्ण होते हैं।

    • उदाहरण:

      झील्ली झनकारै पिक चातक पुकारे बन, मोरनि गुहारे उठै जुगनू चमकि-चमकि।

      घोर घन कारे भारे धुरवा धुरावे धाय, धू्मनि मचावै नाचै दामिनी दमकै दमिक।।

कवित्त छंद के प्रमुख उदाहरण:

उदाहरण 1: देव कवि का प्रसिद्ध कवित्त

सानग सँवारी सब भाँति सिंगार कियो,

बेनी सुफन मधि माल पहिराई है।

कहै ‘कविदेव’ रतिनाथ के मदन जू को,

मानहुँ अनंग छबि रूप छिटकाई है ॥

ऐसी रति-रूप सुधा रस की खानि प्यारी,

जाको रूप निरखि त्रिभूवन सुख पाई है।

देखि छबि ऐसी सुख पाइये अपार आज,

राधा वर-जोरे की जुगल छवि छाई है ॥

  • विशेषता: इस कवित्त छंद में प्रत्येक चरण में वर्णों की निश्चित गणना (31 वर्ण) और तुकबंदी का सुंदर संयोजन मिलता है।

उदाहरण 2: भूषण का वीर रस प्रधान कवित्त

साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धारी,

सरजा सिवा जंग जीतन चलत है।

भूरि भुज फंड के वे बाल बिहंग गैंद,

केल के जिमी हेर नागिन डसत है ॥

कौतुक देखत सारे सुरलोक आए सब,

घूमत भृंगार जैसे मत्त गयंद है।

भूषण भनत ऐसे बीर छत्रपति सिव,

तेज पुंज छायो जग चहुँ दिसि भंद है ॥

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4. निष्कर्ष (Conclusion)

संक्षेप में कहें तो, कवित्त छंद और घनाक्षरी छंद हिंदी काव्यशास्त्र के ऐसे वर्णिक छंद हैं जो वर्णों की निश्चित संख्या और यति-गति के नियमों पर आधारित होते हैं। बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे RPSC, UPTET, Hindi Sahitya) में इनसे जुड़े प्रश्न और उदाहरण अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इनकी मात्राओं और वर्णों की गिनती का अभ्यास करना बहुत जरूरी है।

5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कवित्त छंद किसे कहते हैं? (Kavitt Chhand Kise Kehte Hain?)
कवित्त एक वर्णिक छंद है जिसके प्रत्येक चरण में 31 वर्ण होते हैं, जिसमें 16 और 15 वर्णों पर यति (विराम) होती है और अंत में गुरु वर्ण आता है।
मनहरण कवित्त में कुल कितने वर्ण होते हैं? (Manharan Kavitta Varn Sankhya)
मनहरण कवित्त के प्रत्येक चरण में 31-31 वर्ण होते हैं और 16 व 15 वर्णों पर यति होती है।
घनाक्षरी छंद के कितने भेद हैं? (Ghanakshari Chhand Types)
घनाक्षरी छंद के दो मुख्य भेद हैं—रूप घनाक्षरी (जिसमें 32 वर्ण होते हैं) और देव घनाक्षरी (जिसमें 33 वर्ण होते हैं)।
कवित्त छंद किस प्रकार का छंद है? (Is Kavitt a Varnik or Matrik Chhand?)
कवित्त एक वर्णिक छंद है, क्योंकि इसमें मात्राओं की नहीं बल्कि वर्णों की गणना की जाती है।
घनाक्षरी छंद किस श्रेणी के अंतर्गत आता है? (Ghanakshari Chhand Category)
घनाक्षरी छंद ‘दंडक’ श्रेणी का वर्णिक छंद है, जिसके प्रत्येक चरण में 32 या 33 वर्ण होते हैं।
रूप घनाक्षरी और देव घनाक्षरी में क्या अंतर है? (Difference between Roop and Dev Ghanakshari)
रूप घनाक्षरी के प्रत्येक चरण में 32 वर्ण होते हैं, जबकि देव घनाक्षरी के प्रत्येक चरण में 33 वर्ण होते हैं।

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