अंतिम संशोधित (Last Updated): August 26, 2026
उपमा अलंकार के 10 प्रसिद्ध उदाहरण, अर्थ एवं स्पष्टीकरण (Upma Alankar in Hindi)
हिंदी काव्यशास्त्र में जब किन्हीं दो वस्तुओं या व्यक्तियों की उनकी समान रूप-रंग, गुण या धर्म के आधार पर तुलना की जाती है, तब वहाँ ‘उपमा अलंकार’ होता है। यह अलंकार काव्य के सौंदर्य को कई गुना बढ़ा देता है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, JRF, PGT, TGT) और स्कूल-कॉलेज की परीक्षाओं में उपमा अलंकार के मूल उदाहरणों से जुड़े प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं। इस लेख में हमने उपमा अलंकार के 10 सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण उदाहरणों को संकलित किया है, जो इसके अन्य विशिष्ट भेदों से अलग हैं तथा परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।
📌 उपमा अलंकार के 10 महत्वपूर्ण उदाहरण
1. ‘मंजुल मुख राशि के समान सुंदर है’
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काव्य पंक्ति:
मंजुल मुख राशि के समान सुंदर है,
देखत छवि मन होत विभोर सदा।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: किसी सुंदर मुख की राशि चंद्रमा या खजाने के समान अत्यंत सुंदर है, जिसकी छवि देखकर मन हमेशा विभोर हो जाता है।
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स्पष्टीकरण: यहाँ मुख (उपमेय) की तुलना ‘मंजुल मुख राशि’ (उपमान) से ‘समान’ (वाचक शब्द) और ‘सुंदर’ (साधारण धर्म) के माध्यम से की गई है, जिससे यहाँ उपमा अलंकार स्पष्ट होता है।
2. ‘कमल के समान लगता है मनोहर।’
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काव्य पंक्ति:
कमल के समान लगता है मनोहर,
रूप तुम्हारा हे जग के पालनहार।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: हे प्रभु! आपका रूप इस संसार में कमल के फूल के समान अत्यंत मनोहर और आकर्षक लगता है।
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स्पष्टीकरण: रूप (उपमेय) की तुलना कमल (उपमान) से ‘के समान’ (वाचक) तथा ‘मनोहर’ (साधारण धर्म) के द्वारा की गई है।
3. ‘नंदन जैसा नहीं और उपवन है कोई।’
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काव्य पंक्ति:
नंदन जैसा नहीं और उपवन है कोई,
जहँ बसत निरंतर सुरत-प्रसाद सोई।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: स्वर्ग के नंदन वन जैसा सुंदर इस संसार में अन्य कोई उपवन नहीं है, जहाँ देवताओं की कृपा बरसती हो।
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स्पष्टीकरण: यहाँ किसी विशिष्ट उपवन (उपमेय) की तुलना इंद्र के ‘नंदन वन’ (उपमान) से ‘जैसा’ (वाचक शब्द) के जरिए की गई है।
4. ‘पड़ी थी बिजली सी सरस विकराल।’
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काव्य पंक्ति:
पड़ी थी बिजली सी सरस विकराल,
विकल हो उठे लोक सभी तत्क्षण काल।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: वह विपत्ति या आफत ऐसे टूटी मानो कोई रसयुक्त और अत्यंत भयानक बिजली आ गिरी हो।
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स्पष्टीकरण: यहाँ उस विकराल स्थिति (उपमेय) की तुलना ‘बिजली’ (उपमान) से ‘सी’ (वाचक) और ‘सरस विकराल’ (साधारण धर्म) के साथ की गई है।
5. ‘नीरज सरिस नयन रघुवर के।’
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काव्य पंक्ति:
नीरज सरिस नयन रघुवर के,
जासु विलोकहिं भव-भय हर के।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: भगवान श्री राम (रघुवर) के नेत्र कमल के समान सुंदर हैं, जिनके दर्शन मात्र से संसार के सभी भय दूर हो जाते हैं।
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स्पष्टीकरण: नेत्रों (उपमेय) की तुलना कमल यानी ‘नीरज’ (उपमान) से ‘सरिस’ (वाचक शब्द) के माध्यम से की गई है।
6. ‘वारिज नयन राम इत आये।’
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काव्य पंक्ति:
वारिज नयन राम इत आये,
सकल जनन के दुःख बिसराये।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: कमल जैसे नेत्रों वाले (वारिज नयन) श्री राम इधर पधारे हैं, जिन्होंने सभी लोगों के दुखों को भुला दिया है।
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स्पष्टीकरण: श्री राम के नयनों (उपमेय) की तुलना ‘वारिज’ यानी कमल (उपमान) से की गई है, जो उपमा अलंकार का सुंदर उदाहरण है।
7. ‘हरिमुख सम सुंदर कहु कैसे।’
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काव्य पंक्ति:
हरिमुख सम सुंदर कहु कैसे,
उपमान मिलै नहिं जगत में जैसे।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: भगवान श्री हरि के मुख के समान सुंदर इस संसार में अन्य कोई दूसरा मुख या उपमान कैसे मिल सकता है?
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स्पष्टीकरण: हरि के मुख (उपमेय) की तुलना के लिए संसार में अन्य किसी उपमान का न मिलना और ‘सम’ (वाचक) शब्द का प्रयोग उपमा अलंकार को दर्शाता है।
8. ‘कनक बेलि सी सुवरन बारी।’
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काव्य पंक्ति:
कनक बेलि सी सुवरन बारी,
लसत रूप की ज्योति अपारि।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: सोने की लता (कनक बेलि) के समान सुनहरे और कोमल शरीर वाली वह नायिका रूप की अपार ज्योति से सुशोभित हो रही है।
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स्पष्टीकरण: सुवर्ण शरीर या नायिका (उपमेय) की तुलना ‘कनक बेलि’ (उपमान) से ‘सी’ (वाचक शब्द) के द्वारा की गई है।
9. ‘बिना प्राण के जैसे गात।’
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काव्य पंक्ति:
बिना प्राण के जैसे गात,
तैसे ही सूनी सगरी रात।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: जिस प्रकार शरीर प्राणों के बिना व्यर्थ व निष्प्राण हो जाता है, वैसे ही यह पूरी रात सूनी लग रही है।
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स्पष्टीकरण: सूनी रात (उपमेय) की तुलना ‘बिना प्राण के शरीर’ (उपमान) से ‘जैसे’ (वाचक शब्द) के माध्यम से की गई है।
10. ‘दया की तरह उदार, दुआ की तरह मददगार।’
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काव्य पंक्ति:
दया की तरह उदार, दुआ की तरह मददगार,
ऐसी शख्सियत थी उनकी जग में अपार।
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काव्य पंक्ति का अर्थ: उनका स्वभाव दया के समान अत्यंत उदार और हर परिस्थिति में दुआ की तरह सहायता करने वाला था।
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स्पष्टीकरण: व्यक्तित्व की उदारता और मदद करने के गुण की तुलना क्रमशः ‘दया’ और ‘दुआ’ (उपमान) से ‘की तरह’ (वाचक) शब्द के द्वारा की गई है।
📌 निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में कहा जाए तो, ‘उपमा अलंकार’ काव्य के भावों को जीवंत बनाने और किसी वस्तु की सुंदरता या विशेषता को पाठकों के मानस पटल पर स्पष्ट रूप से उकेरने का सबसे बेहतरीन साधन है। जब उपमेय और उपमान के बीच समानता दर्शाई जाती है, तो काव्य का सौंदर्य स्वतः बढ़ जाता है। उम्मीद है कि इन 10 प्रमुख और चुनिंदा उदाहरणों से आपको उपमा अलंकार की मूल अवधारणा को समझने में पूरी मदद मिली होगी।