अंतिम संशोधित (Last Updated): September 16, 2026
विशेषण की परिभाषा, भेद और उदाहरण (Visheshan in Hindi) – संपूर्ण व्याकरण नोट्स
हिंदी व्याकरण में विशेषण (Visheshan in Hindi) का अध्ययन किए बिना भाषा की सुंदरता और उसकी विशेषता को पूरी तरह समझना संभव नहीं है। चाहे आप किसी प्रतियोगी परीक्षा (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC) की तैयारी कर रहे हों या स्कूल-कॉलेज के छात्र हों, शब्दों के सही प्रयोग और व्याकरणिक नियमों को मजबूत करने के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण टॉपिक है। इस लेख में हम बेहद सरल भाषा और स्पष्ट उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे कि विशेषण किसे कहते हैं, इसके कितने भेद होते हैं और परीक्षा में इससे जुड़े प्रश्नों को आसानी से कैसे हल किया जा सकता है।
📌 इस आर्टिकल में आप क्या-क्या सीखेंगे? (Quick Overview):
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🔹 विशेषण की सटीक परिभाषा और उसके मूल अर्थ को बेहद सरल उदाहरणों के साथ समझना।
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🔹 विशेष्य, उद्देश्य विशेषण, विधेय विशेषण और प्रविशेषण के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से जानना।
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🔹 विशेषण के सभी 5 प्रमुख भेदों (गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक, सार्वनामिक और व्यक्तिवाचक विशेषण) का विस्तृत अध्ययन।
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🔹 परीक्षा में अक्सर उलझाने वाले निश्चित व अनिश्चित संख्यावाचक और परिमाणवाचक विशेषण के तुलनात्मक अंतर को आसान ट्रिक्स से सीखना।
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🔹 UGC NET, TGT, PGT, RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी परीक्षा-केंद्रित महत्वपूर्ण नोट्स और उदाहरण।
विशेषण की परिभाषा एवं अवधारणा (Visheshan ki Paribhasha / Definition of Visheshan)
वह शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाते हैं, अर्थात संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, दशा, अवस्था, संख्या, परिमाण आदि का बोध कराते हैं, तो उन्हें विशेषण कहा जाता है।
💡 विशेष टिप (आसान परिभाषा): विशेषण यानी “ख़ासियत बताने वाला शब्द”! जैसे हम आम बोलचाल में कहते हैं कि “वह कुत्ता बहुत काला है” या “मेरे पास दो पेंसिल हैं”। यहाँ “काला” कुत्ते की और “दो” पेंसिलों की खासियत या गिनती बता रहा है। बस, दुनिया की कोई भी चीज़ कैसी है (अच्छी, बुरी, बड़ी, छोटी) या कितनी है (एक, दो, थोड़ा, बहुत), यह बताने वाले शब्दों को ही विशेषण कहते हैं!
जैसे: अच्छा, बुरा, दुबला, पतला, नया, पुराना, चार, दस, यह, वह आदि।
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विशेष्य (Visheshya) – जिस पद की विशेषता बतलाई जाती है उसे विशेष्य कहा जाता है, अर्थात संज्ञा पद को ही विशेष्य के नाम से जाना जाता है।
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जैसे – अच्छे विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। (अच्छे – विशेषण, विद्यार्थी – विशेष्य)
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उद्देश्य विशेषण / विशेष्य विशेषण (Attributive / Objective Visheshan) – विशेषण जो किसी संज्ञा के पूर्व में प्रयुक्त होकर उसकी विशेषता बतलाता है, तो विशेषण के उस रूप को विशेष्य विशेषण या उद्देश्य विशेषण के नाम से जाना जाता है।
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जैसे – चतुर बालक काम कर रहे हैं।
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विधेय विशेषण (Predicative Visheshan) – विशेषण का वह रूप जो संज्ञा या सर्वनाम के बाद में प्रयुक्त होकर उसकी विशेषता बताने का काम करता है, तो उसे विधेय विशेषण कहा जाता है।
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जैसे – मोहन ईमानदार है।
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प्रविशेषण (Pravisheshan) – जो शब्द विशेषण की भी विशेषता बतलाते हैं, उन्हें प्रविशेषण कहा जाता है।
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जैसे – “राम बहुत अच्छा लड़का है।” (अच्छा – विशेषण, बहुत – प्रविशेषण)
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नोट : प्रविशेषण का प्रयोग उद्देश्य व विधेय दोनों ही रूपों में किया जाता है। यदि विकल्प में प्रविशेषण मौजूद हो तो पहली प्राथमिकता उसे ही दी जाती है।
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विशेषण के प्रकार / भेद (Visheshan ke Prakar / Types of Visheshan)
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गुणवाचक विशेषण (Qualitative Adjective / Adjective of Quality)
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संख्यावाचक विशेषण (Numeral Adjective / Adjective of Number)
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परिमाणवाचक विशेषण (Quantitative Adjective / Adjective of Quantity)
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सार्वनामिक विशेषण (Demonstrative / Possessive / Pronominal Adjective)
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व्यक्तिवाचक विशेषण (Proper Adjective)
कुछ विद्वानों ने व्यक्तिवाचक विशेषण को एक अलग से प्रकार माना है। वस्तुतः इसका समावेश गुणवाचक विशेषण में ही हो जाता है। इन विशेषणों का निर्माण व्यक्तिवाचक संज्ञाओं में प्रत्यय जोड़ कर किया जाता है, इसलिए इसे व्यक्तिवाचक विशेषण मानते हैं।
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जैसे – जयपुरी, बीकानेरी आदि।
[1] गुणवाचक विशेषण (Gunvachak Visheshan)
वह विशेषण शब्द जो किसी वस्तु या व्यक्ति के गुण, दोष, रंग, आकार, अवस्था, काल, दिशा, गंध, आयु, स्पर्श, स्वाद आदि का बोध कराते हैं, तो उन्हें गुणवाचक विशेषण कहा जाता है।
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गुणबोधक – विनम्र, अच्छा, भला, सच्चा, चतुर, सीधा, उदार, परिश्रमी आदि।
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दोषबोधक – बुरा, खराब, अशिष्ट, दुश्चरित्र, झूठा, पापी, अन्यायी, आलसी आदि।
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रंगबोधक – नीला, पीला, हरा, लाल, काला, श्वेत आदि सभी रंग।
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कालबोधक – पुराना, नवीन, प्रागैतिहासिक, नूतन, अभिनव, दैनिक, साप्ताहिक, वार्षिक, मासिक, प्राचीन आदि।
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स्थानबोधक – दिल्लीवाला, जयपुरी, अजमेरी, रूसी, चीनी, जापानी, भारतीय आदि। (इन्हीं विशेषण शब्दों को व्यक्तिवाचक विशेषणों में शामिल किया जाता है।)
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गंधबोधक – खुशबूदार, बदबूदार, सुगंधित, महकती आदि।
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दिशाबोधक – पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, दक्षिणी, ऊपरी, बाहरी, भीतरी आदि।
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दशाबोधक – स्वस्थ, रोगी, बीमार, दुबला, पतला, तंदुरुस्त, गरीब, अमीर, पुष्ट आदि।
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स्पर्शबोधक – मुलायम, खुरदरा, चिकना, ठण्डा, गर्म, कठोर, मखमली आदि।
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रूपबोधक – सुन्दर, भद्दा, सुरम्य, आकर्षक, कुरूप आदि।
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स्वादबोधक – मीठा, नमकीन, खट्टा, तीखा, कसैला, कड़वा आदि।
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अन्य रूप – ‘सा, से, सी, सरिस, सदृश, तुल्य, रूपी, समान’ आदि शब्द जोड़कर भी गुणवाचक विशेषण बनाए जाते हैं।
अतिरिक्त एवं तुलनात्मक उदाहरण:
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सच्चे आदमी कभी हारते नहीं हैं। (सच्चे – गुणबोधक विशेषण)
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कोमल फूल खिले हैं। (कोमल – गुणबोधक विशेषण, फूल – विशेष्य)
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पुराने अखबार बेच दो। (पुराने – कालबोधक विशेषण)
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पुरानी कार बेच दो। (विशेषण, विशेष्य)
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लाल मुँह वाला अन्दर बैठा है। (रंगबोधक)
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राम ईमानदार है। (विधेय विशेषण)
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गाय बहुत अच्छी है। (प्रविशेषण, विधेय विशेषण)
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चिकना यह पत्थर लगा दो। (विशेषण, विशेष्य, विधेय वि., स्पर्शबोधक)
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वह परिश्रमी छात्र है। (गुणबोधक)
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यह घर बिकाऊ है। (विधेय विशेषण का अन्य उदाहरण)
वाक्य शुद्धि के नियम, अशुद्धियाँ और उदाहरण
[2] संख्यावाचक विशेषण (Sankhyavachak Visheshan)
वे विशेषण जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित या अनिश्चित संख्या का बोध कराते हैं, तो उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहा जाता है। इनके दो उपभेद किए जाते हैं:
- निश्चित संख्यावाचक विशेषण
- अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
1. निश्चित संख्यावाचक विशेषण (Nishchit Sankhyavachak Visheshan)
ऐसे विशेषण जो संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित संख्या का बोध कराते हैं।
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पूर्ण संख्या बोधक – एक, पाँच, दस, बीस, सौ, हजार (सभी पूर्ण संख्याएँ)।
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अपूर्ण संख्या बोधक – सवा, डेढ़ (1.5), ढाई (2.5), साढ़े तीन, आधा, पौन आदि।
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क्रमवाची संख्या बोधक – पहला, दूसरा, तीसरा, पाँचवा आदि।
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गुणा या आवृति बोधक – एकगुना, दोगुना, चौगुना, सौगुना आदि।
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समूह बोधक – दोनों, पाँचों, बीसों, युग्म, सैकड़ा, सतह, दर्जन आदि।
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प्रतिवाचक (One by one) – प्रत्येक, हर-एक, प्रतिदिन, प्रतिव्यक्ति, प्रतिसप्ताह, प्रतिमाह आदि।
उदाहरण:
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आपके द्वारा दी गई उदाहरण पंक्तियों में प्रयुक्त विशेषण शब्दों को बोल्ड करके नीचे प्रस्तुत किया गया है:
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अशोक ने दो केले खाए। (पूर्ण संख्या वाचक)
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पाँचवें लड़के को बुलाओ। (क्रमवाची निश्चित संख्या वाचक)
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सवा दो रुपए में प्रत्येक पुस्तक खरीदी। (अपूर्ण संख्या बोधक, प्रतिवाचक)
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एक दर्जन अनार लाओ। (समूह बोधक)
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चारों भाई साथ खेल रहे हैं। (निश्चित संख्यावाचक – समूह बोधक)
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2. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण (Anishchit Sankhyavachak Visheshan)
ऐसे विशेषण जो संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित संख्या का बोध नहीं कराते हैं, तो उन्हें अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहा जाता है।
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जैसे – थोड़ा, बहुत, कम, ज्यादा, ज़रा-सा, कुछ, सैकड़ों, पचासों, हजारों, दस-बारह, चंद आदि।
उदाहरण:
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कमरे की कुछ खिड़कियाँ खुली हैं.
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ललिता ने बहुत समोसे खाए.
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अधिकतर यात्री बस द्वारा पहुँच गए.
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मैदान में हज़ारों दर्शक बैठे हैं। (अनिश्चित संख्यावाचक)
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परीक्षा में कुछ छात्र अनुत्तीर्ण हो गए। (अनिश्चित संख्यावाचक)
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[3] परिमाणवाचक विशेषण (Parimanvachak Visheshan)
वह विशेषण जो किसी वस्तु या पदार्थ की निश्चित या अनिश्चित माप-तोल, मात्रा, नाप आदि का बोध कराते हैं, तो उन्हें परिमाणवाचक विशेषण कहा जाता है।
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निश्चित परिमाणवाचक – पाँच किलो, दो लीटर, दस गज, पाँच किलोमीटर, दो सौ ग्राम, एक मीटर आदि निश्चित परिमाणवाचक विशेषणों की श्रेणी में गिने जाते हैं।
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अनिश्चित परिमाणवाचक – थोड़ा, बहुत, अधिक, कम, ज्यादा, ज़रा-सा, ढेर सारा, अपार आदि अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
💡 विशेष टिप (तुलनात्मक अंतर): अनिश्चित संख्यावाचक और अनिश्चित परिमाणवाचक इन दोनों ही रूपों में प्रायः एक ही जैसे शब्दों (जैसे – थोड़ा, बहुत, कुछ) का प्रयोग होता है। अतः यदि विशेष्य गणना योग्य (गिनने योग्य) है तो वह अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण होता है और यदि विशेष्य मापने-तोलने योग्य हो तो वहाँ अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण होता है।
उदाहरण:
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राम ने दो मीटर कपड़ा खरीदा – निश्चित परिमाणवाचक
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सब्ज़ी में थोड़ा नमक और डालो – अनिश्चित परिमाणवाचक
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राम ने एक तोला सोना खरीदा – निश्चित परिमाणवाचक
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हमने दो सौ किमी की यात्रा तय की – निश्चित परिमाणवाचक
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वह ढेर सारा मक्खन बिखरा पड़ा था – अनिश्चित परिमाणवाचक
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गिलास में थोड़ा दूध बचा है – अनिश्चित परिमाणवाचक (क्योंकि दूध तौला/मापा जाता है)
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समारोह में बहुत पानी खर्च हुआ – अनिश्चित परिमाणवाचक
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[4] सार्वनामिक विशेषण (Sarvnamik Visheshan)
जो विशेषण सर्वनाम शब्दों से ही मिलकर अर्थात जिन सर्वनामों का प्रयोग सार्वनामिक विशेषण की भाँति किया जाता है, उन्हें संकेतवाचक या सार्वनामिक विशेषण कहा जाता है।
💡 विशेष टिप (महत्वपूर्ण नियम): उत्तम पुरुष, मध्यम पुरुष और निजवाचक सर्वनाम शब्दों को छोड़कर शेष सर्वनाम शब्द यदि किसी संज्ञा के पूर्व में प्रयुक्त होकर उसकी विशेषता बतलाते हैं, तो वह सर्वनाम न होकर सार्वनामिक विशेषण कहे जाते हैं।
तुलनात्मक एवं स्पष्ट उदाहरण:
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यह मेरी पुस्तक है। (यहाँ ‘यह’ स्वतंत्र रूप से संज्ञा के स्थान पर आया है, अतः यह निश्चयवाचक सर्वनाम है)
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यह पुस्तक मेरी है। (यहाँ ‘यह’ ठीक ‘पुस्तक’ संज्ञा के पहले आकर उसकी ओर संकेत कर रहा है, अतः यह सार्वनामिक विशेषण है)
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वह आदमी जा रहा है। (सार्वनामिक विशेषण / संकेतवाचक विशेषण)
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कोई आदमी आपसे मिलने आया था। (सार्वनामिक विशेषण)
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उस घर में मेरा मित्र रहता है। (सार्वनामिक विशेषण)
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इसे नहीं उस लड़की को देखो। (इसे – निश्चयवाचक सर्वनाम, उस – सार्वनामिक विशेषण)
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कौन सा पेन तुम्हारा है? (प्रश्नवाचक सार्वनामिक विशेषण)
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📌 निष्कर्ष (Conclusion)
हिंदी व्याकरण में विशेषण (Visheshan) वाक्य की सुंदरता, स्पष्टता और अर्थ की गहराई को बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले ये शब्द (चाहे वे गुण, संख्या, परिमाण या संकेत के रूप में हों) भाषा को प्रामाणिक बनाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC एवं विभिन्न स्कूल-कॉलेज स्तर की परीक्षाओं में विशेषण के भेदों और विशेष्य-विशेषण की पहचान से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस मास्टर गाइड और तुलनात्मक उदाहरणों के अभ्यास से आप परीक्षा में इन प्रश्नों को आसानी से हल कर सकते हैं।
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