अंतिम संशोधित (Last Updated): September 29, 2026
तार सप्तक क्या है? इतिहास, प्रकाशन वर्ष, सभी चारों सप्तकों के कवि और महत्वपूर्ण तथ्य (Taar Saptak in Hindi: History, Poets, and Trick)
हिंदी साहित्य के इतिहास में प्रयोगवाद का आरंभ और विकास जिस ऐतिहासिक पड़ाव के साथ जुड़ा हुआ है, वह है— ‘तार सप्तक’। हिंदी कविता के आधुनिक काल में यह केवल कुछ कवियों का संकलन मात्र नहीं था, बल्कि यह हिंदी काव्य जगत में एक नए युग, आधुनिक चेतना और नवीन भाव-बोध की स्वर्णिम शुरुआत थी।
📌 Quick Overview (मुख्य बिंदु):
मुख्य विषय: तार सप्तक और प्रयोगवादी कवि (Taar Saptak Kavi)
कुल तार सप्तक: चार (1943, 1951, 1959, 1979 ई.)
संपादक एवं प्रवर्तक: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
उपयोगी परीक्षाएँ: UGC NET, TGT, PGT, RPSC और अन्य हिंदी साहित्य प्रतियोगी परीक्षाएँ।
तार सप्तक की मूल संकल्पना, नामकरण और संपादन (Concept, Naming, and Editing of Taar Saptak)
हिंदी कविता के इतिहास में जिस प्रयोगवाद की नींव पड़ी, उसके पीछे सबसे महत्वपूर्ण योगदान ‘तार सप्तक’ का है।
💡 विशेष जिज्ञासा (तार सप्तक के संपादक कौन हैं?): पाठकों और परीक्षार्थियों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि तार सप्तक के संपादक कौन हैं? तो आपको बता दें कि हिंदी साहित्य के इस ऐतिहासिक संकलन का संपादन और सफल प्रकाशन प्रयोगवाद के प्रवर्तक सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के यशस्वी संपादकत्व में संपन्न हुआ था।
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मूल संकल्पना और नामकरण: साहित्यिक गलियारों में इस बात की प्रामाणिक जानकारी मिलती है कि ‘तार सप्तक’ की मूल संकल्पना और इसका नामकरण प्रसिद्ध कवि व आलोचक प्रभाकर माचवे के मस्तिष्क की उपज था।
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अज्ञेय की परिभाषा: संपादक अज्ञेय ने तार सप्तक की रूपरेखा को स्पष्ट करते हुए लिखा था—
“एक ही प्रकार की भाव-चेतना के तार में पिरोए सात कवियों की रचनाओं का संकलन ‘तार सप्तक’ कहलाता है।”
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राहों के अन्वेषी: पहले तार सप्तक (1943 ई.) की ऐतिहासिक भूमिका में संपादक अज्ञेय ने इन सातों कवियों के बारे में एक बेहद प्रसिद्ध और क्रांतिकारी पंक्ति लिखी थी—
“ये सातों कवि किसी एक स्कूल के नहीं हैं, वे राही नहीं, अपितु ‘राहों के अन्वेषी’ हैं।” इसके अतिरिक्त अज्ञेय ने यह भी स्पष्ट किया कि ये सातों कवि एक-दूसरे से सोच-विचार में पूर्णतः भिन्न रहे।
चारों तार सप्तक: प्रकाशन वर्ष, संकलित कवि और महत्वपूर्ण कथन (Taar Saptak ke Kaviyon ki Trick)
प्रत्येक तार सप्तक में सात-सात कवियों की रचनाएँ संकलित थीं, जो पूर्णतः नवीन भाव-बोध और विभिन्न रचना-शैलियों पर आधारित थीं। आपको चारों तार सप्तक कवियों को याद करने की ट्रिक भी शेयर की जा रही है ।
विशेष : पहले तार सप्तक का नाम ‘तार सप्तक’ है।
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तार सप्तक (1943 ई.)
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दूसरा सप्तक (1951 ई.)
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तीसरा सप्तक (1959 ई.)
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चौथा सप्तक (1979 ई.)
(1) प्रथम तार सप्तक (प्रकाशन वर्ष – 1943 ई.)
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स्मरण रखने का सूत्र (ट्रिक): प्रभु राम की आज्ञा से भारत-भूषण ने गिरिजा पर्वत पर जाकर नेमीचंद को मुक्त करवाया।
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प्रथम तार सप्तक के कवि:
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प्रभाकर माचवे
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रामविलास शर्मा
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अज्ञेय
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भारतभूषण अग्रवाल
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गिरिजाकुमार माथुर
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नेमिचन्द्र जैन
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गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’
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(2) दूसरा सप्तक (प्रकाशन वर्ष – 1951 ई.)
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विशेष कथन: दूसरे सप्तक के संबंध में यह रेखांकित किया गया है कि—
“प्रयोग अपने आप में इष्ट नहीं है, वह तो साधन है।”
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स्मरण रखने का सूत्र (ट्रिक): रघुवीर और धर्मवीर जैसे शमशेर पुत्रों ने माँ भवानी के आशीर्वाद से शकुंतला के गर्भ से हरि-नरेश के रूप में जन्म लिया।
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दूसरे तार सप्तक के कवि:
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भवानीप्रसाद मिश्र
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शकुंतला माथुर (कवयित्री)
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हरिनारायण व्यास
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शमशेर बहादुर सिंह
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नरेश मेहता
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रघुवीर सहाय
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धर्मवीर भारती
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(3) तीसरा सप्तक (प्रकाशन वर्ष – 1959 ई.)
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विशेष कथन: तीसरे सप्तक के संबंध में यह महत्वपूर्ण बात कही गई है कि—
“तीसरे सप्तक में हम समझते हैं कि तीसरे सप्तक के कवि अपने-अपने विकास क्रम में अधिक परिपक्व और मंझे हुए कवि के रूप में पाठकों के सम्मुख आ रहे हैं।” यह सप्तक ‘नई कविता’ को समर्पित माना जाता है।
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स्मरण रखने का सूत्र (ट्रिक): कुँवर केदार ने प्रयाग के मैदान में अपनी कीर्ति से सर्वेश्वर विजय प्राप्त की।
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तीसरे तार सप्तक के कवि:
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प्रयागनारायण त्रिपाठी
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कीर्ति चौधरी (कवयित्री)
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मदन वात्स्यायन
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केदारनाथ सिंह
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कुँवर नारायण
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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
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विजयदेव नारायण साही
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(4) चौथा सप्तक (प्रकाशन वर्ष – 1979 ई.)
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विशेष कथन: चौथे सप्तक के बारे में यह विशेषता बताई गई है कि—
“यहाँ संकलित कविताएँ बोलती अधिक हैं और कहती कम हैं।”
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स्मरण रखने का सूत्र (ट्रिक): अवध के राजकुमार श्रीराम ने नंदराज को स्वदेशी सुमन भेंट किये।
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चौथा तार सप्तक के कवि:
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अवधेश कुमार
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राजकुमार कुंभज
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स्वदेश भारती
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नन्दकिशोर आचार्य
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सुमन राजे (कवयित्री)
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श्रीराम वर्मा
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राजेन्द्र किशोर
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प्रकाशन अंतराल: प्रथम तार सप्तक के आठ वर्ष बाद दूसरा सप्तक तथा दूसरे सप्तक के आठ वर्ष बाद तीसरा सप्तक प्रकाशित हुआ था, परंतु चौथा सप्तक तीसरे के पूरे बीस वर्ष बाद (1979 ई.) प्रकाशित हुआ।
प्रयोगवाद क्या है? अर्थ, विशेषताएँ, प्रमुख कवि
💡 परीक्षा उपयोगी विशेष टिप्स (Exam Tips for Students)
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महत्वपूर्ण बिंदु: परीक्षा की दृष्टि से हमेशा ध्यान रखें कि तार सप्तक के प्रवर्तक और संपादक अज्ञेय हैं, जबकि इसकी मूल संकल्पना प्रभाकर माचवे की थी।
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स्मार्ट ट्रिक: चारों सप्तकों के प्रकाशन वर्ष (1943, 1951, 1959, 1979) और उनके कवियों के नाम कंठस्थ कर लें क्योंकि टीजीटी, पीजीटी और नेट परीक्षाओं में इनसे लगातार प्रश्न पूछे जाते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में कहा जा सकता है कि ‘तार सप्तक’ हिंदी कविता के प्रयोगवाद का आधार स्तंभ है। इसने हिंदी साहित्य को रूढ़िवादी परंपराओं से निकालकर नए प्रयोगों, वैचारिक स्वतंत्रता और आधुनिक मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया है।
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