हिंदी साहित्य का इतिहास (भाग-1): साहित्येतिहास लेखन पद्धतियाँ और काल-विभाजन
हिंदी साहित्य के इतिहास का अध्ययन करने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि इतिहास लिखने की शुरुआत कैसे हुई और इसके लिए किन-किन पद्धतियों (Methods) का उपयोग किया गया। इस लेख में हम हिंदी साहित्येतिहास लेखन की प्रमुख पद्धतियों और प्रमुख इतिहासकारों के योगदान की विस्तार से चर्चा करेंगे।
1. साहित्येतिहास लेखन की प्रमुख पद्धतियाँ
हिंदी साहित्य का इतिहास लिखने के लिए विद्वानों ने मुख्य रूप से चार पद्धतियों का प्रयोग किया है:
(क) वर्णुक्रम पद्धति (वर्णमाला पद्धति)
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इस पद्धति में लेखकों और कवियों का परिचय उनकी वर्णमाला (क, ख, ग… या A, B, C…) के क्रम के अनुसार दिया जाता है।
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प्रमुख अपनाने वाले: गार्सा द तासी और शिवसिंह सेंगर।
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विशेषता: इस प्रकार के ग्रंथों को इतिहास न कहकर प्रायः ‘साहित्यकोष’ ही कहा जा सकता है।
(ख) कालानुक्रम पद्धति
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इसमें कवियों और लेखकों का परिचय उनकी जन्मतिथि (तिथि के क्रम) के आधार पर कालानुसार दिया जाता है।
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प्रमुख अपनाने वाले: सर जॉर्ज ग्रियर्सन और मिश्रबंधु।
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विशेषता: इस तरह के ग्रंथों को ‘कवित्वसंग्रह’ कहा जा सकता है, क्योंकि इसमें साहित्य की प्रवृत्तियों का विशेष विश्लेषण नहीं होता है।
(ग) वैज्ञानिक पद्धति
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इस पद्धति में लेखक पूरी तरह तटस्थ और निष्पक्ष होकर लेखन कार्य करता है।
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इसमें क्रमबद्धता और तर्कपुष्टि होती है।
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सीमा: इसमें भी कई बार कालानुक्रम पद्धति जैसे दोष आ जाते हैं।
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प्रमुख उदाहरण: डॉ. गणपति चंद्र गुप्त का ग्रंथ – ‘हिंदी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’ (प्रकाशित: 1965 ई.)।
(घ) विधेयवादी पद्धति (सबसे उपयोगी)
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साहित्येतिहास लेखन में यह सर्वाधिक उपयोगी और लोकप्रिय पद्धति मानी जाती है।
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इस पद्धति के जन्मदाता: ‘तेन’ (Taine) हैं।
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मुख्य आधार: इस पद्धति के तहत किसी भी साहित्य का अध्ययन करते समय वहाँ की जाति, वातावरण और विशेष परिस्थितियों का विश्लेषण किया जाता है।
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आचार्य रामचंद्र शुक्ल की परिभाषा:
“प्रत्येक देश का साहित्य वहाँ की जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिंब होता है। आदि से अंत तक इन्हीं चित्तवृत्तियों की परंपरा को परखते हुए साहित्य परंपरा के साथ उनका ‘सामंजस्य बिठाना’ ही साहित्य का इतिहास कहलाता है।”
2. साहित्येतिहास लेखन के प्रारंभिक प्रयास एवं प्रमुख ग्रंथ
1. गार्सा-द-तासी
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यह हिंदी साहित्येतिहास लेखन का प्रथम प्रयास था।
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गार्सा-द-तासी फ्रांस के प्रोफेसर थे और उनके इतिहास की भाषा फ्रेंच थी।
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ग्रंथ का नाम: ‘इस्तवार द ला लिटरेचर ऐंदुई ऐंदुस्तानी’ (यह 2 भागों में प्रकाशित हुआ)।
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प्रथम भाग: 1839 ई. में प्रकाशित (इसमें 738 कवि/लेखक थे, जिसमें हिंदी कवियों की संख्या 72 थी)।
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दूसरा भाग: 1847 ई. में प्रकाशित।
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विशेष तथ्य: इसमें प्रथम कवि ‘अंगद’ और अंतिम कवि ‘हेमंत’ को माना गया है।
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हिंदी अनुवाद: सन 1953 ई. में डॉ. लक्ष्मी सागर वार्ष्णेय ने इसका हिंदी अनुवाद ‘हिंदुई साहित्य का इतिहास’ नाम से किया।
2. शिवसिंह सेंगर
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यह हिंदी साहित्येतिहास का दूसरा प्रयास था।
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ग्रंथ का नाम: ‘शिवसिंह सरोज’ (रचना काल: 1883 ई.)।
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इसे हिंदी साहित्येतिहास का प्रारंभिक बिंदु माना जाता है। इसमें लगभग 1000 कवियों का जीवनचरित्र और उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं।
3. सर जॉर्ज ग्रियर्सन
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ग्रंथ का नाम: ‘द मॉडर्न वर्नेक्यूलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान’ (प्रकाशन सन 1888 ई., अंग्रेजी भाषा में)।
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इसका प्रकाशन बंगाल की एशियाटिक सोसाइटी की पत्रिका के विशेषांक के रूप में हुआ था।
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डॉ. किशोरी लाल गुप्त इसे हिंदी साहित्य का प्रथम इतिहास मानते हैं।
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इसमें पहली बार कवियों और लेखकों का कालक्रमानुसार विवरण प्रस्तुत किया गया और काल-विभाजन का प्रथम प्रयास किया गया। इसमें 952 कवियों को स्थान दिया गया था।
4. मिश्रबंधु (श्याम बिहारी मिश्र, शुकदेव बिहारी मिश्र, गणेश बिहारी मिश्र)
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ग्रंथ का नाम: ‘मिश्रबंधु विनोद’ (यह 4 भागों में विभक्त था)।
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प्रथम 3 भागों का प्रकाशन 1913 ई. में तथा चतुर्थ भाग का प्रकाशन 1934 ई. में हुआ।
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इसमें लगभग 5000 कवियों को स्थान दिया गया। इसे हिंदी का प्रथम ‘इतिवृत्त संग्रह’ भी माना जाता है।
5. आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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प्रकाशन वर्ष: 1929 ई. में ‘हिंदी शब्द सागर’ की भूमिका के रूप में प्रकाशित।
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इसमें 900 वर्षों के इतिहास को 4 खंडों में विभक्त किया गया तथा 1000 कवियों को स्थान दिया गया।
हिंदी साहित्य के प्रमुख इतिहास ग्रंथ और उनके रचनाकार (वर्णानुक्रम सूची)
| क्र.सं. | इतिहासकार / रचनाकार का नाम | ग्रंथ / पुस्तक का नाम (और अन्य विवरण) |
| 1. | आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र | वाङ्मय विमर्श |
| 2. | अज्ञेय | हिंदी साहित्य का आधुनिक इतिहास |
| 3. | इंद्रपाल सिंह | रीतिकालिन प्रबंध काव्य |
| 4. | कृष्ण शंकर शुक्ल | आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास |
| **5. ** | गुलाब राय | हिंदी साहित्य का सुबोध इतिहास |
| 6. | गौरीशंकर सत्येन्द्र | साहित्य की झाँकी |
| 7. | चंद्रकांत बाली | पंजाब प्रान्तীয় हिंदी साहित्य का इतिहास |
| 8. | जयकिशन खंडेलवाल | हिंदी साहित्य की प्रवृत्तियाँ (1949) |
| 9. | डा. नगेंद्र | हिंदी साहित्य का इतिहास (संपादित) |
| 10. | डॉ. किशोरीलाल गुप्त | हिंदी साहित्य का प्रथम इतिहास |
| 11. | डॉ. टीकम सिंह तोमर | हिंदी वीर काव्य |
| 12. | डॉ. नलिना विलोचन शर्मा | हिंदी साहित्य का इतिहास दर्शन |
| 13. | डॉ. नामवर सिंह | आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ |
| 14. | डॉ. बच्चन सिंह |
आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास
• हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास (1996) |
| 15. | डॉ. भागीरथ मिश्र | हिंदी काव्यशास्त्र का इतिहास (1965 ई.) |
| 16. | डॉ. माता प्रसाद गुप्त | हिंदी पुस्तक साहित्य (आधुनिक साहित्य संपत्ति का ‘बीजक’ कहा जाता है।) |
| 17. | डॉ. मोतीलाल मेनारिया |
राजधानी भाषा और साहित्य
• राजस्थानी पिंगल साहित्य
• राजस्थानी साहित्य की रूपरेखा |
| 18. | डॉ. रमा शंकर शुक्ल ‘रसाल’ | हिंदी साहित्य का इतिहास (पुस्तक के रूप में बड़ा ग्रंथ है।) |
| 19. | डॉ. रामप्रसाद मिश्र | हिंदी साहित्य का वस्तुपरक इतिहास |
| 20. | डॉ. रामनरेश त्रिपाठी | कविता कौमुदी (4 भाग) |
| 21. | डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी | हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास (1986) |
| 22. | डॉ. गणपति चंद्र गुप्त | हिंदी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास (1965 ई.) |
| 23. | नन्ददुलारे वाजपेयी | आधुनिक साहित्य |
| 24. | पदुमलाल पन्नालाल बख्शी | हिंदी साहित्य विमर्श |
| 25. | पादरी एफ. ई. | द हिस्ट्री ऑफ हिंदी लिटरेचर |
| 26. | परशुराम चतुर्वेदी | उत्तरी भारत की संत परंपरा |
| 27. | प्रभाकर माचवे | हिंदी साहित्य की कहानी |
| 28. | प्रभुदयाल मित्तल | चैतन्य संप्रदाय और उसका साहित्य |
| 29. | बाबू श्यामसुन्दर दास | हिंदी भाषा और साहित्य |
| 30. | भगवती प्रसाद सिंह | रामभक्ति रसिक संप्रदाय |
| 31. | मधुकान्त / वियोगी हरि | ब्रजमाधुरी सार (वियोगी हरि) |
| 32. | राहुल सांकृत्यायन | हिंदी काव्यधारा |
| 33. | रामचंद्र तिवारी | हिंदी का गद्य साहित्य |
| 34. | रामखेलावन पांडेय | हिंदी साहित्य का नया इतिहास |
| 35. | राममूर्ति त्रिपाठी | आदिकालीन हिंदी साहित्य की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि |
| 36. | रामविलास शर्मा | हिंदी जाति का साहित्य – भारतेंदु युग और हिंदी भाषा की विकास परंपरा |
| 37. | लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय | हिंदुई साहित्य का इतिहास |
| 38. | विजयेन्द्र स्नातक | राधावल्लभ संप्रदायः सिद्धांत और साहित्य |
| 39. | विश्वनाथ प्रसाद मिश्र | हिंदी साहित्य का अतीत (2 भाग) |
| 40. | वियोगी हरि | ब्रजमाधुरी सार |
| 41. | वासुदेव सिंह | हिंदी साहित्य का उद्भव काल |
| 42. | शिवकुमार मिश्र | हिंदी साहित्येतिहास के सिद्धांत |
| 43. | शंभुनाथ सिंह |
हिंदी साहित्य की सामाजिक पृष्ठभूमि
• आदिकालीन हिंदी साहित्य (1970) |
| 44. | सियाराम तिवारी | खंडकाव्य |
हिंदी साहित्य का काल विभाजन(Hindi sahitya ka kal Vibhajan)
1. सर जॉर्ज ग्रियर्सन का काल-विभाजन
सर जॉर्ज ग्रियर्सन ने अपने ग्रंथ में कवियों को कालक्रमानुसार प्रस्तुत किया है, जिसमें वैज्ञानिकता का अभाव माना जाता है। उन्होंने निम्नलिखित काल-नाम दिए हैं:
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चारण काल
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पंद्रहवीं शती का धार्मिक पुनर्जागरण
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जायसी और उनकी कविता
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ब्रज का कृष्ण सम्प्रदाय
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मुगल दरबार
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तुलसी दास
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रीतिकाल
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तुलसीदास के अन्य परवर्ती कवि
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अठारहवीं शताब्दी
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कम्पनी के शासन में हिन्दुस्तान
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विविध अज्ञात कवि
2. मिश्रबंधु का काल-विभाजन
‘मिश्रबंधु विनोद’ की रचना चार भागों में हुई है (जिसके प्रथम तीन भागों का प्रकाशन 1913 ई. में व चौथे भाग का प्रकाशन 1914 ई. में हुआ था)। मिश्रबंधुओं ने हिंदी साहित्य के इतिहास को इस प्रकार विभाजित किया है:
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(1) आरंभिक काल
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(क) पूर्व आरंभिक काल – 700–1343
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(ख) उत्तर आरंभिक काल – 1344–1444
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(2) माध्यमिक काल
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(क) पूर्व माध्यमिक काल – 1445–1560
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(ख) प्रौढ़ माध्यमिक काल – 1561–1680
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(3) अलंकृत काल
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(क) पूर्व अलंकृत काल – 1681–1590
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(ख) उत्तर अलंकृत काल – 1391–1889
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(4) परिवर्तन काल – 1890–1925
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(5) वर्तमान काल – 1926 से अब तक
3. डॉ. रामकुमार वर्मा का काल-विभाजन
डॉ. रामकुमार वर्मा ने 1938 ई. में “हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास” नामक पुस्तक लिखी, जिसमें हिंदी साहित्य का विभाजन इस प्रकार किया गया है:
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(1) सन्धि काल – 750–1000
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(2) चारण काल – 1000–1375
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(3) भक्तिकाल – 1375–1700
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(4) रीतिकाल – 1700–1900
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(5) आधुनिक काल – 1900 से अब तक
4. हिंदी साहित्य का काल विभाजन (आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार)
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने इतिहास ग्रंथ में हिंदी साहित्य को मुख्य रूप से 4 काल-खंडों में विभाजित किया है:
| क्र.सं. | काल का नाम | अन्य नाम / धारा | संवत काल |
| 1. | आदिकाल | वीरगाथा काल | संवत 1050 से 1375 |
| 2. | पूर्व मध्यकाल | भक्ति काल | संवत 1375 से 1700 |
| 3. | उत्तर मध्यकाल | रीति काल | संवत 1700 से 1900 |
| 4. | आधुनिक काल | गद्य काल | संवत 1900 से 1984 |
नोट: आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा दिया गया ‘वीरगाथा काल’ नाम सर्वाधिक विवादास्पद रहा है।
निष्कर्ष एवं अगला भाग
इस प्रकार, हिंदी साहित्य के इतिहास को लिखने और समझने के लिए विभिन्न विद्वानों ने अपनी-अपनी पद्धतियों और शोध का सहारा लिया, जिससे आज हमारे पास एक स्पष्ट इतिहास उपलब्ध है।
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