हिंदी लेखक

हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय: जन्म, रचनाएँ, पुरस्कार, साहित्यिक परिचय | UGC NET

हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय – हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक और ललित निबंधकार

हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय(Hazari Prasad Dwivedi ka Jivan Parichay) | जन्म, रचनाएँ, पुरस्कार और साहित्यिक परिचय (UGC NET, TGT, PGT, RPSC)

इस लेख में हम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी(Hazari Prasad Dwivedi) का कवि/लेखक परिचय, साहित्यिक परिचय, व्यक्तित्व और कृतित्व, प्रमुख रचनाएँ, निबंध-शैली, पुरस्कार और सम्मान एक ही जगह समझेंगे। यह सामग्री UGC NET हिंदी, TGT, PGT, RPSC,CLASS 10, CLASS 12 और विश्वविद्यालयी परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

📌 संक्षिप्त परिचय (Quick Overview):

बिंदु विवरण
पूरा नाम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
बचपन का नाम वैद्यनाथ द्विवेदी
जन्म 19 अगस्त 1907 ई. (श्रावण 11, संवत् 1964)
जन्मस्थान ओझवलिया (आरत दुबे का छपरा), जिला बलिया
माता-पिता पं. अनमोल दुबे और ज्योतिषमती
विवाह 1927 ई., भगवती देवी से
मृत्यु 19 मई 1979 ई., दिल्ली (ब्रेन ट्यूमर)
प्रमुख सम्मान पद्मभूषण (1957), साहित्य अकादमी पुरस्कार (1973)
प्रमुख निबंध-संग्रह अशोक के फूल, कल्पलता, कुटज, आलोक पर्व
प्रसिद्ध उपन्यास बाणभट्ट की आत्मकथा

🎯 हजारी प्रसाद द्विवेदी कौन थे?

संक्षिप्त उत्तर: हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907–1979) हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक, ललित निबंधकार, उपन्यासकार, इतिहासकार और संपादक थे। उनका जन्म 19 अगस्त 1907 को बलिया (उत्तर प्रदेश) में हुआ। वे शांति निकेतन और काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे। उन्हें 1957 में पद्मभूषण और 1973 में ‘आलोक पर्व’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।


📖 हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म कब और कहाँ हुआ? (जन्म और परिवार)

आचार्य हजारी प्रसाद का जन्म श्रावण 11, संवत् 1964, तदनुसार 19 अगस्त 1907 ई. को बलिया जिले के आरत दुबे का छपरा के ओझवलिया नामक गाँव में हुआ था। इनके बचपन का नाम वैद्यनाथ द्विवेदी था।

वस्तुतः आरत दुबे इनके परदादा का नाम था, और उन्हीं के नाम पर गाँव का नाम ‘आरत दुबे का छपरा’ पड़ा। इनके पिता पं. अनमोल दुबे तथा माता ज्योतिषमती थीं। द्विवेदी जी का परिवार ज्योतिष विद्या के लिए प्रसिद्ध था।

Direct Answer: हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 19 अगस्त 1907 ई. को बलिया जिले के ओझवलिया (आरत दुबे का छपरा) गाँव में हुआ था।


🎓 हजारी प्रसाद द्विवेदी की शिक्षा और विवाह

  • प्रारंभिक शिक्षा: बसियापुर के मिडल स्कूल में हुई; 1921 ई. में मिडल उत्तीर्ण किया।
  • संस्कृत शिक्षा: इसके बाद संस्कृत पढ़ने काशी आए और वहाँ से प्रवेशिका परीक्षा उत्तीर्ण की।
  • उच्च शिक्षा: 1923 ई. में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।
  • आचार्य परीक्षा: ज्योतिष विषय से 1930 ई. में प्रथम श्रेणी में आचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण की।
  • विवाह: बीस वर्ष की उम्र में 1927 ई. में भगवती देवी से विवाह हुआ। इनसे सात संतानें हुईं।

छात्र जीवन में ही वे मैथिलीशरण गुप्त, सुमित्रानंदन पंत, पं. बनारसीदास चतुर्वेदी आदि बड़े विद्वानों के संपर्क में आए, जिनसे साहित्य-रचना की प्रेरणा मिली।


🏫 हजारी प्रसाद द्विवेदी का करियर और साहित्यिक जीवन (व्यक्तित्व और कृतित्व)

द्विवेदी जी 8 नवम्बर 1930 ई. को गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के शांति निकेतन में अध्यापक नियुक्त हुए। यहीं से उनके साहित्यिक जीवन की सबसे उर्वर अवधि शुरू हुई।

📅 जीवन की प्रमुख घटनाएँ (समयरेखा)

वर्ष घटना
1921 मिडल परीक्षा उत्तीर्ण
1923 काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रवेश
1927 भगवती देवी से विवाह
1930 ज्योतिषाचार्य (प्रथम श्रेणी); शांति निकेतन में नियुक्ति
1930–1950 शांति निकेतन में हिंदी विभाग के अध्यक्ष
1952–53 काशी नागरी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष
1955 राजभाषा आयोग के सदस्य (राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत)
1957 राष्ट्रपति द्वारा ‘पद्मभूषण’
1960 विरोध के चलते काशी हिंदू विश्वविद्यालय से निष्कासन
1962 पश्चिम बंग साहित्य अकादमी द्वारा टैगोर पुरस्कार
अक्टूबर 1967 पुनः काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष
25 फरवरी 1970 विभागाध्यक्ष पद से कार्यमुक्त
1973 ‘आलोक पर्व’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार
4 फरवरी 1979 पक्षाघात का शिकार
19 मई 1979 दिल्ली में निधन

शांति निकेतन के बाद वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष बने, फिर कुछ समय पंजाब विश्वविद्यालय में भी विभागाध्यक्ष रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट्. की उपाधि प्रदान की।


🏆 हजारी प्रसाद द्विवेदी को मिले पुरस्कार और सम्मान

सम्मान वर्ष किसलिए / किसके द्वारा
स्वर्ण पदक — ‘सूर साहित्य’ के लिए, इंदौर साहित्य समिति द्वारा
मंगला प्रसाद पारितोषिक — ‘कबीर’ नामक रचना पर
पद्मभूषण 1957 राष्ट्रपति द्वारा
टैगोर पुरस्कार 1962 पश्चिम बंग साहित्य अकादमी द्वारा
साहित्य अकादमी पुरस्कार 1973 निबंध संग्रह ‘आलोक पर्व’ पर
डी.लिट्. — लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा

Direct Answer: हजारी प्रसाद द्विवेदी को ‘आलोक पर्व’ निबंध संग्रह पर 1973 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।


📚 हजारी प्रसाद द्विवेदी की प्रमुख रचनाएँ(hazari prasad dwivedi ki pramukh rachnaye)

✍️ आलोचनात्मक रचनाएँ

क्रम रचना वर्ष
1 सूर साहित्य 1936
2 हिंदी साहित्य की भूमिका 1940
3 कबीर 1942
4 आधुनिक हिंदी साहित्य पर विचार 1949
5 साहित्य का मर्म 1949
6 नाथ सम्प्रदाय 1950
7 प्राचीन भारत का कलात्मक विनोद 1952
8 हिंदी साहित्य का आदिकाल 1952
9 हिंदी साहित्य का उद्भव और विकास 1953
10 मेघदूत : एक पुरानी कहानी 1957
11 लालित्य तत्त्व 1962
12 कालिदास की लालित्य योजना 1965
13 साहित्य सहचर 1965
14 मध्यकालीन बोध का स्वरूप 1970

अन्य: मृत्युंजय रवींद्र, सहज साधना, सूर और उनका काव्य, अपभ्रंश का रसात्मक साहित्य, साहित्य का साथी।

📝 निबंध संग्रह (Hazari Prasad Dwivedi ke Nibandh)

क्रम निबंध संग्रह वर्ष
1 अशोक के फूल 1948
2 कल्पलता 1951
3 मध्यकालीन धर्म साधना 1952
4 विचार और वितर्क 1957
5 विचार प्रवाह 1959
6 कुटज 1964
7 आलोक पर्व 1972

📖 उपन्यास

उपन्यास वर्ष
बाणभट्ट की आत्मकथा 1946
चारुचंद्र लेख 1963
पुनर्नवा 1973
अनामदास का पोथा 1976

ध्यान दें: ‘अनामदास का पोथा’ पहले ‘अथ रेकब आख्यान’ नाम से प्रकाशित हुआ था।

🗂️ संपादित ग्रंथ

संक्षिप्त पृथ्वीराजरासो (1957), संदेश रासक (1960), महापुरुषों का स्मरण (1977), सिक्ख गुरुओं का पुण्य स्मरण (1979)।

ग्रंथावली: अगस्त 1981 ई. में उनकी उपलब्ध संपूर्ण रचनाओं का संकलन 11 खंडों में ‘हजारी प्रसाद द्विवेदी ग्रन्थावली’ के नाम से राजकमल प्रकाशन से छपा। पहला संस्करण दो वर्ष में समाप्त हो जाने से 1998 ई. में संशोधित संस्करण प्रकाशित हुआ।


✨ हजारी प्रसाद द्विवेदी की निबंध-शैली और भाषा(hazari prasad dwivedi ki bhasha shaili)

द्विवेदी जी के निबंधों को सामान्यतः दो वर्गों में बाँटा जा सकता है:

  • विचारात्मक निबंध: इनमें दार्शनिक और सामाजिक जीवन संबंधी तत्त्वों की प्रधानता है।
  • आलोचनात्मक निबंध: इनमें साहित्य के विभिन्न अंगों का शास्त्रीय विवेचन और साहित्यिक कृतियों पर आलोचनात्मक दृष्टि प्रमुख है।

भाषा: विशुद्ध खड़ी बोली, जिसमें प्रांजल व्यवहारिकता के साथ संस्कृतनिष्ठ शास्त्रीय भाषा का भी अच्छा प्रयोग है।

शैली के रूप: गवेषणात्मक, वर्णनात्मक, व्यंग्यात्मक और व्यास शैली।

विषय की दृष्टि से उनके निबंधों में भारतीय संस्कृति, इतिहास, ज्योतिष और विविध धर्म-संप्रदाय प्रमुखता से आए हैं। उनके गद्य में विचारों की तेजस्विता, कथन का लालित्य और बंध की शास्त्रीयता का ऐसा संगम है कि कबीर, तुलसी और टैगोर इनके यहाँ एक साथ एकाकार हो गए हैं। साथ ही उनके साहित्य में विराट मानववाद के दर्शन होते हैं।

Direct Answer: हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा विशुद्ध खड़ी बोली है, जिसमें संस्कृतनिष्ठ शब्दावली और सहज व्यवहारिकता का संतुलन मिलता है।

🧑‍🏫 द्विवेदी जी का प्रभाव: शिष्य और परंपरा

  • डॉ. नामवर सिंह द्विवेदी जी के शिष्य रहे; उनकी ख्याति का मुख्य आधार उनका आलोचक व्यक्तित्व रहा।
  • ललित निबंध की त्रयी में हजारी प्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र और कुबेरनाथ राय की गणना होती है। विद्यानिवास मिश्र ने स्वयं स्वीकार किया कि हिंदी में लिखने की प्रेरणा उन्हें द्विवेदी जी से मिली।
  • द्विवेदी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर कई पुस्तकें हैं, जैसे: साहित्यकार और चिंतक : आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी (डॉ. राममूर्ति त्रिपाठी), हजारी प्रसाद द्विवेदी : समग्र पुनरावलोकन (चौथीराम यादव), आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की जययात्रा (डॉ. नामवर सिंह), दूसरी परंपरा की खोज (नामवर सिंह)।

💡 परीक्षार्थियों के लिए विशेष टिप्स (UGC NET / TGT / PGT / RPSC)

🎯 याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • 📌 जन्म: 19 अगस्त 1907, ओझवलिया (बलिया)। निधन: 19 मई 1979, दिल्ली।
  • 📌 बचपन का नाम: वैद्यनाथ द्विवेदी। पिता: अनमोल दुबे। माता: ज्योतिषमती।
  • 📌 शांति निकेतन: 1930 में नियुक्ति, 1930–1950 तक हिंदी विभाग के अध्यक्ष।
  • 📌 पद्मभूषण: 1957। टैगोर पुरस्कार: 1962। साहित्य अकादमी: 1973 (‘आलोक पर्व’)।
  • 📌 कल्पलता (1951) में ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ और ‘आम फिर बौरा गए’ जैसे निबंध हैं।
  • 📌 ‘अनामदास का पोथा’ का पहला नाम ‘अथ रेकब आख्यान’ था।
  • 📌 ललित निबंध-त्रयी: द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र, कुबेरनाथ राय।
  • 📌 नामवर सिंह उन्हें ‘दूसरी परंपरा’ का जनक मानते हैं।

💡 याद करने की ट्रिक

  • वर्ष-क्रम की ट्रिक: सूर (36) → भूमिका (40) → कबीर (42) — “सू-भू-क”।
  • निबंध-संग्रह की ट्रिक: अ-क-म-वि-वि-कु-आ = अशोक के फूल, कल्पलता, मध्यकालीन धर्म साधना, विचार और वितर्क, विचार प्रवाह, कुटज, आलोक पर्व।
  • उपन्यास की ट्रिक: बा-चा-पु-अ = बाणभट्ट, चारुचंद्र, पुनर्नवा, अनामदास।

📝 संभावित प्रश्न

  • ‘कबीर’ और ‘सूर साहित्य’ किसकी आलोचनात्मक रचनाएँ हैं?
  • ‘अशोक के फूल’ निबंध के लेखक कौन हैं?
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (1973) द्विवेदी जी को किस कृति पर मिला?

🏁 निष्कर्ष

हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय हमें बताता है कि एक ज्योतिषी परिवार का बालक, अपनी साधना और विद्वत्ता से, हिंदी आलोचना, ललित निबंध और ऐतिहासिक उपन्यास तीनों का शिखर-पुरुष बन गया। उनका साहित्यिक परिचय परंपरा और आधुनिकता, शास्त्र और लोक, संस्कृत और खड़ी बोली के संगम का परिचय है। व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों में उनका केंद्रीय सूत्र मानववाद है। ‘अशोक के फूल’, ‘कुटज’ और ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ जैसी प्रमुख रचनाएँ आज भी पाठकों और परीक्षार्थियों के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं। UGC NET, TGT, PGT और RPSC की तैयारी में उनका अध्ययन अनिवार्य है।


ये आर्टिकल भी  अभी पढ़ें

क्र.सं. अध्ययन श्रेणी (Category) श्रेणी विवरण (Category Overview) सभी लेख देखें
01 📖 हिंदी साहित्य का इतिहास आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल के सभी विस्तृत नोट्स। श्रेणी देखें →
02 🎭 भारतीय काव्यशास्त्र रस, छंद, अलंकार, शब्दशक्ति और प्रमुख आचार्यों के काव्य सिद्धांत। श्रेणी देखें →
03 💡 अलंकार एवं रस परिचय उदाहरण सहित शब्दालंकार, अर्थालंकार और नवरसों के सभी लेख। श्रेणी देखें →
04 ✍️ हिंदी व्याकरण संधि, समास, उपसर्ग, प्रत्यय और प्रतियोगी परीक्षाओं के व्याकरण नियम। श्रेणी देखें →

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 19 अगस्त 1907 ई. (श्रावण 11, संवत् 1964) को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में ‘आरत दुबे का छपरा’ के ओझवलिया गाँव में हुआ था। यह गाँव उनके परदादा आरत दुबे के नाम पर प्रसिद्ध हुआ। उनके बचपन का नाम वैद्यनाथ द्विवेदी था।

हजारी प्रसाद द्विवेदी के माता-पिता का नाम क्या था?
उनके पिता का नाम पं. अनमोल दुबे और माता का नाम ज्योतिषमती था। उनका परिवार ज्योतिष विद्या के लिए प्रसिद्ध था, और द्विवेदी जी ने स्वयं काशी हिंदू विश्वविद्यालय से ज्योतिष विषय में आचार्य की परीक्षा 1930 ई. में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की थी।

हजारी प्रसाद द्विवेदी की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
आलोचना में ‘सूर साहित्य’ (1936), ‘हिंदी साहित्य की भूमिका’ (1940), ‘कबीर’ (1942), ‘हिंदी साहित्य का आदिकाल’ (1952), ‘नाथ सम्प्रदाय’। निबंध-संग्रहों में ‘अशोक के फूल’, ‘कल्पलता’, ‘कुटज’, ‘विचार और वितर्क’, ‘आलोक पर्व’। उपन्यासों में ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ (1946), ‘चारुचंद्र लेख’, ‘पुनर्नवा’ और ‘अनामदास का पोथा’।

हजारी प्रसाद द्विवेदी को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस रचना पर मिला?
उन्हें 1973 ई. में निबंध संग्रह ‘आलोक पर्व’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया। इससे पहले 1957 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद्मभूषण और 1962 में पश्चिम बंग साहित्य अकादमी द्वारा टैगोर पुरस्कार मिल चुका था।

हजारी प्रसाद द्विवेदी की निबंध-शैली और भाषा की विशेषताएँ क्या हैं?
उनकी भाषा विशुद्ध खड़ी बोली है, जिसमें प्रांजल व्यवहारिकता के साथ संस्कृतनिष्ठ शास्त्रीय शब्दों का भी सुंदर प्रयोग है। उनके निबंध मुख्यतः विचारात्मक और आलोचनात्मक वर्गों में बाँटे जाते हैं। शैली के रूप गवेषणात्मक, वर्णनात्मक, व्यंग्यात्मक और व्यास शैली हैं। उनके साहित्य में विराट मानववाद के दर्शन होते हैं।

हजारी प्रसाद द्विवेदी का निधन कब और कैसे हुआ?
4 फरवरी 1979 को वे पक्षाघात (लकवे) के शिकार हो गए और 19 मई 1979 ई. को ब्रेन ट्यूमर के कारण दिल्ली में उनका निधन हो गया।

हजारी प्रसाद द्विवेदी शांति निकेतन में कब और किस पद पर रहे?
वे 8 नवम्बर 1930 ई. को गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के शांति निकेतन में अध्यापक नियुक्त हुए और 1930 से 1950 ई. तक वहाँ हिंदी विभाग के अध्यक्ष पद पर रहे। इसके बाद वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष बने।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *