कवित्त छंद (Kavitta Chhand in Hindi) – परिभाषा, प्रकार और संपूर्ण उदाहरण
यदि आप हिंदी व्याकरण में कवित्त छंद (Kavitta Chhand), इसके प्रकार, परिभाषा और उदाहरणों की तलाश कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी है। इस आर्टिकल में हमने परीक्षा की दृष्टि से कवित्त छंद और घनाक्षरी छंद की संपूर्ण जानकारी को बहुत ही सरल भाषा में समझाया है।
1. कवित्त छंद क्या है? (Kavitta Chhand Definition)
कवित्त छंद हिंदी व्याकरण और साहित्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध वर्णिक छंद है। परीक्षा की दृष्टि से इसके मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
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यह एक वर्णिक छंद है।
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इसके प्रत्येक चरण में चार चरण होते हैं।
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प्रत्येक चरण में 16 और 15 के विराम (यति) से कुल 31 वर्ण होते हैं।
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इसके प्रत्येक चरण के अंत में गुरु वर्ण होना अनिवार्य है।
कवित्त छंद का उदाहरण (Kavitta Chhand Example)
डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के, सुमन झिंगुला सौहैं तन छबि भारी है।
पवन झुलावै केकी कीर बतरावै शदेवश कोकिल हलावे हुलसावे कर तारी है।
पूरित पराग सो उतारो करै राई नोन, कंजकली नायिका लतान सिर मारी है।
मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि, प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी है।।
2. कवित्त छंद के प्रकार (Types of Kavitta Chhand)
मुख्य रूप से कवित्त छंद के दो भेद माने जाते हैं:
(क) मनहरण कवित्त (Manharan Kavitta)
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लक्षण: इसके प्रत्येक चरण में 31-31 वर्ण होते हैं और 16 व 15 वर्णों पर यति होती है।
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उदाहरण:
खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, वलि, बनिक को बनिज, न चाकर को चाकरी।
जीविका बिहीन लोग सीद्यमान सोच बस, कहें एक एकनसों, ‘कहाँ जाई, का करी?’
वेदहू पुरान कही, लोकहू बिलोकिआत, साँकरे सबै पै, राम! रावरें कृपा करी।
दारिद-दसानन दहाई दुनी, दीनबंधु! दुरित-दहन देखि तुलसी हहा करी।।
3. घनाक्षरी छंद (Ghanakshari Chhand)
यह भी कवित्त का ही एक रूप है जो दंडक श्रेणी में आता है।
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लक्षण: इसके प्रत्येक चरण में 32 या 33 वर्ण होते हैं। इसमें लघु-गुरु का कोई कड़ा नियम नहीं होता।
घनाक्षरी छंद के दो भेद (Types of Ghanakshari Chhand):
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रूप घनाक्षरी: इसके प्रत्येक चरण में 32 वर्ण होते हैं।
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उदाहरण:
नगर से दूर कुछ गाँव सी बस्ती है एक, हरे हरे खेतों के समीप अति अभिराम।
जहाँ पत्रजाल अन्तराल से झलकते हैं, लाल रूपरैल श्वेत छज्जों के सँवारे धाम।।
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देव घनाक्षरी: इसके प्रत्येक चरण में 33 वर्ण होते हैं।
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उदाहरण:
झील्ली झनकारै पिक चातक पुकारे बन, मोरनि गुहारे उठै जुगनू चमकि-चमकि।
घोर घन कारे भारे धुरवा धुरावे धाय, धू्मनि मचावै नाचै दामिनी दमकै दमिक।।
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4. निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में कहें तो, कवित्त छंद और घनाक्षरी छंद हिंदी काव्यशास्त्र के ऐसे वर्णिक छंद हैं जो वर्णों की निश्चित संख्या और यति-गति के नियमों पर आधारित होते हैं। बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे RPSC, UPTET, Hindi Sahitya) में इनसे जुड़े प्रश्न और उदाहरण अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इनकी मात्राओं और वर्णों की गिनती का अभ्यास करना बहुत जरूरी है।