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रिपोर्ताज़ विधा क्या है? हिंदी का प्रथम रिपोर्ताज़ और प्रमुख रचनाकार (Reportage in Hindi)

अंतिम संशोधित (Last Updated): September 2, 2026

रिपोर्ताज क्या है (reportaj kya hai): आज के आर्टिकल में हम हिंदी साहित्य के आधुनिक काल के अन्तर्गत रिपोर्ताज पर सम्पूर्ण जानकारी शेयर करेंगे।

रिपोर्ताज क्या है ?

क्या आपने कभी ऐसी रचना पढ़ी है जो किसी घटना या युद्ध की सिर्फ सूखी रिपोर्ट न हो, बल्कि उसमें ऐसा जीवंत रोमांच और साहित्य का रस हो कि पढ़ते ही रोंगटे खड़े हो जाएं? हिंदी साहित्य में इसी ऊर्जावान और तथ्यात्मक-साहित्यिक विधा का नाम ‘रिपोर्ताज़’ (Reportage) है।

आइए, बहुत ही आसान और दिलचस्प तरीके से समझते हैं कि रिपोर्ताज़ क्या है, इसकी शुरुआत कहाँ से हुई और हिंदी में इसके कौन-कौन से प्रमुख स्तंभ हैं।

‘रिपोर्ताज’ अंग्रेजी शब्द ‘रिपोर्ट’ (Report) का समानार्थी फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। ‘रिपोर्ताज'(Reportaj) का संबंध ‘रिपोर्ट’ से है। अमरनाथ के अनुसार – “घटना का यथातथ्य वर्णन रिपोर्ताज का प्रमुख लक्षण है परन्तु रिपोर्ट के कलात्मक और साहित्यिक रूप को ही ‘रिपोर्ताज’ कहते हैं। तात्पर्य यह है कि “रिपोर्ताज’ ऐसी रिपोर्ट है जिसमें साहित्यिकता एवं कलात्मकता का समावेश होता है।” बहुत से साहित्यकारों की यह मान्यता है कि ‘रिपोर्ताज’ में भावना का आवेग होता है, जो मनुष्य के संघर्ष को देखकर जन्म लेता है।

रिपोर्ताज का जन्म 1936 ई. में हुआ। इसके जन्मदाता अमेरिकी लेखक इलिया एहटेनबर्ग हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका के अनेक रिपोर्ताज इनके द्वारा लिखे गये, फलस्वरूप रिपोर्ताज का उदय हुआ। हिंदी में रिपोर्ताज का जन्म ‘रूपाभ’ पत्रिका में प्रकाशित शिवदान सिंह की ‘लक्ष्मीपुरा में’ (1938) रचना से माना जाता है। तूफानों के बीच (1946, रांगेय राघव), पहाड़ों में प्रेममय संगीत (1955, उपेन्द्रनाथ अश्क), गरीब और अमीर पुस्तकें (1958, रामनारायण उपाध्याय), ऋण जल धन जल (1975, फणीश्वरनाथ रेणु), बाढ़, बाढ़, बाढ़ (विवेकी राय), फाइटर की डायरी (2013, मैत्रेयी पुष्पा) हिंदी के कुछ प्रमुख रिपोर्ताज हैं।

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हिंदी के प्रमुख रिपोर्ताज़ और उनके रचनाकार

हिंदी जगत में कई दिग्गजों ने अपने तीखे और जीवंत लेखन से रिपोर्ताज़ विधा को समृद्ध किया है। परीक्षा की दृष्टि से प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:

  • रांगेय राघव: तूफानों के बीच (बंगाल के अकाल पर आधारित)

  • प्रकाशचंद गुप्त: बंगाल का अकाल

  • शिवसागर मिश्र: वे लड़ेंगे हजार साल

  • धर्मवीर भारती: युद्ध यात्रा

  • वि्वेकी राय: जुलूस रुका है

  • फणीश्वर नाथ रेणु: ऋण जल धन जल (1975), नेपाली क्रांति कथा (1978), श्रुत अश्रुत पूर्व (1984), एकलव्य के नोट्स

  • कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर: क्षण बोले कर मुस्काए

  • उपेंद्र नाथ अश्क: पहाड़ों में प्रेम में संगीत

  • रामकुमार भ्रमर: पेरिस के नोट्स

  • निर्मल वर्मा: पराग एक स्वप्न

  • कमलेश्वर: क्रांति करते हुए आदमी को देखना

  • भदंत आनंद कौसल्यायन: देश की मिट्टी बोलती है

  • शमशेर बहादुर: प्लाट का मोर्चा

  • श्रीकांत वर्मा: अपोलो का रथ

  • राजेंद्र अवस्थी: गर्मियों में पहाड़ पर

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निष्कर्ष (Conclusion)

संक्षेप में कहा जा सकता है कि ‘रिपोर्ताज़’ केवल घटनाओं का तथ्यात्मक विवरण मात्र नहीं है, बल्कि यह पत्रकारिता और साहित्य का एक ऐसा अनूठा संगम है जो समाज की सच्चाइयों, संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं को कलात्मक रूप से हमारे सामने जीवंत कर देता है। शिवदान सिंह चौहान के ‘लक्ष्मीपुरा’ से शुरू हुआ यह सफर आज हिंदी गद्य साहित्य की एक अत्यंत लोकप्रिय और सशक्त विधा बन चुका है।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

Q1: ‘रिपोर्ताज़’ मूल रूप से किस भाषा का शब्द है?
उत्तर: रिपोर्ताज़ मूलतः फ्रेंच भाषा का शब्द है, जो द्वितीय विश्व युद्ध से संबंधित विधा के रूप में विकसित हुआ।

Q2: हिंदी का प्रथम रिपोर्ताज़ किसे और किसके द्वारा रचित माना जाता है?
उत्तर: शिवदान सिंह चौहान द्वारा रचित ‘लक्ष्मीपुरा’ (1946 ई.) को हिंदी का प्रथम रिपोर्ताज़ माना जाता है, जो ‘रूपार्भ’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

Q3: ‘ऋण जल धन जल’ और ‘नेपाली क्रांति कथा’ किस प्रसिद्ध रचनाकार के रिपोर्ताज़ हैं?
उत्तर: यह प्रसिद्ध रचनाकार फणीश्वर नाथ रेणु के प्रमुख रिपोर्ताज़ हैं।

Q4: ‘तूफानों के बीच’ रिपोर्ताज़ किस घटना पर आधारित है और इसके लेखक कौन हैं?
उत्तर: यह रिपोर्ताज़ बंगाल के अकाल पर आधारित है और इसके लेखक रांगेय राघव हैं।

Q5: ‘अपोलो का रथ’ और ‘प्लाट का मोर्चा’ के रचनाकार क्रमशः कौन हैं?
उत्तर: ‘अपोलो का रथ’ श्रीकांत वर्मा का और ‘प्लाट का मोर्चा’ शमशेर बहादुर सिंह का प्रसिद्ध रिपोर्ताज़ है।

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