अंतिम संशोधित (Last Updated): September 30, 2026
हिंदी एकांकी का उद्भव, विकास, प्रमुख एकांकीकार और कृतियाँ
हिंदी गद्य साहित्य और रंगमंच के इतिहास में “हिंदी एकांकी का उद्भव और विकास” एक अत्यंत महत्वपूर्ण, रोचक और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC, असिस्टेंट प्रोफेसर आदि) की दृष्टि से सर्वाधिक स्कोरिंग विषय है। एक अंक, एक घटना, एक संवेदना या एक ही प्रधान समस्या पर आधारित दृश्य-शव्य रचना ‘एकांकी’ कहलाती है। इस विस्तृत लेख में हम एकांकी के स्वरूप, उसके तत्त्वों, संस्कृत नाट्य परंपरा, विकास यात्रा और प्रमुख एकांकीकारों के कृतित्व का संपूर्ण अध्ययन करेंगे।

📌 एक नजर में (Quick Overview): इस लेख में आगे क्या पढ़ेंगे?
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एकांकी का अर्थ, परिभाषा और संस्कृत पृष्ठभूमि: एकांकी की संरचना, मुख्य तत्त्व (संकलन त्रय) और संस्कृत में इसके समकक्ष रूप।
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हिंदी का प्रथम एकांकी और एकांकीकार: भारतेंदु, जयशंकर प्रसाद, रामकुमार वर्मा और भुवनेश्वर के योगदान पर विद्वानों के मत।
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हिंदी के प्रमुख एकांकीकार: डॉ. रामकुमार वर्मा, भुवनेश्वर प्रसाद, उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’, उदयशंकर भट्ट, जगदीश चन्द्र माथुर और अन्य लेखकों का परिचय।
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महत्वपूर्ण एकांकी संग्रह और रचनाएँ: वर्षवार सूची और क्रमानुसार विस्तृत विवरण।
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🎯 परीक्षा स्पेशल टिप्स: विद्यार्थियों के लिए मुख्य ट्रिक्स और परीक्षा उपयोगी बिंदु।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs): 10 विस्तृत प्रश्न-उत्तर।
एकांकी का अर्थ, परिभाषा और संस्कृत पृष्ठभूमि
‘एक + अंक + ई’ (एक अंक वाला रूपक या नाटक) से मिलकर एकांकी शब्द बना है, जो कि एक पुल्लिंग शब्द है। एकांकी का निर्माण रूपक के भेद से किया जाता है, जिसमें ‘अंक’ इसका प्रमुख आधार होता है। एकांकी में जीवन के किसी एक खंड, एक घटना, एक समस्या या एक ही भाव का अत्यंत संघनित चित्रण रहता है।
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संस्कृत नाट्य परंपरा: संस्कृत में एकांकी के समकक्ष रूपक के अन्य भेद ‘भाण’, ‘व्यायोग’, ‘वीथी’, ‘अंक’ और ‘प्रहसन’ माने जाते हैं। संस्कृत में एकांकी का सार्थक शब्द ‘गोष्ठी’ माना गया है। एकांकी के अन्य नामों में ‘छोटा नाटक’, ‘लघु नाटक’ और ‘नाटिका’ शामिल हैं।
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पाश्चात्य प्रभाव: एकांकी का विकास अंग्रेजी के ‘वन एक्ट प्ले’ (One Act Play) के आधार पर माना गया है।
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प्रेरणा स्रोत: एक-अंकीय भास की रचनाएँ (जैसे—मध्यम व्यायोग, दूत वाक्य, कर्णभार, उरुभंग, दूत-घटोत्कच) संस्कृत एकांकी के विकास की प्रेरक मानी जाती हैं।
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संकलन त्रय: नाटक की अपेक्षा एकांकी में संकलन त्रय (स्थान, समय एवं कार्य की एकता) का निर्वाह अनिवार्य रूप से होता है।
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मुख्य तत्त्व: संवाद एकांकी के सबसे मुख्य तत्त्व हैं। इसके अन्य तत्त्वों में कथानक, पात्र, भाषा-शैली, उद्देश्य और अभिनेयता शामिल हैं।
हिंदी का प्रथम एकांकी और एकांकीकार (First Ekanki & Playwright)
हिंदी एकांकी के आरंभ और प्रथम एकांकीकार को लेकर विभिन्न आलोचकों और इतिहास ग्रंथों में निम्नलिखित रचनाएँ और रचनाकार स्वीकृत हैं:
| क्रम संख्या | रचनाकार / आलोचक का नाम | प्रथम एकांकी / रचना | प्रकाशन वर्ष | विशेष संदर्भ / मत |
| 1. |
भारतेंदु हरिश्चंद्र |
बसंतपूजा |
1872 ई. |
डॉ. सत्येंद्र के अनुसार इन्हें हिंदी का प्रथम एकांकीकार माना जाता है। |
| 2. |
जयशंकर प्रसाद |
एक घूँट |
1928 ई. (या 1929 ई.) |
आचार्य रामचंद्र शुक्ल, अज्ञेय, डॉ. नामवर सिंह और हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार आधुनिक ढंग का पहला एकांकी। |
| 3. |
डॉ. रामकुमार वर्मा |
बादल की मृत्यु |
1930 ई. |
इन्हें हिंदी में आधुनिक एकांकी का जनक माना जाता है। |
| 4. |
भुवनेश्वर प्रसाद |
कारवाँ |
1935 ई. |
आधुनिक बोध और बर्नार्ड शॉ के प्रभाव वाले शुरुआती क्रांतिकारी एकांकी के रूप में प्रख्यात। |
| 5. |
राजकुमार उपाध्याय ‘मणि’ |
एकांकी सप्तक (संपादित) |
2010 ई. |
एकांकी विधा के संकलन के रूप में महत्वपूर्ण प्रकाशन। |
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हिंदी के प्रमुख एकांकी और एकांकीकार
| एकांकी का नाम | एकांकीकार | विषय / श्रेणी | मुख्य विशेषता / परिचय |
| दीपदान |
डॉ. रामकुमार वर्मा |
ऐतिहासिक / सांस्कृतिक |
चित्तौड़गढ़ के इतिहास और त्याग-बलिदान पर आधारित अत्यंत मर्मस्पर्शी और लोकप्रिय एकांकी। |
| पृथ्वीराज की आँखें |
डॉ. रामकुमार वर्मा |
ऐतिहासिक |
शब्दभेदी बाण चलाने की घटना और ऐतिहासिक प्रसंग पर आधारित कलात्मक एकांकी। |
| रेशमी टाई |
उपेंद्रनाथ ‘अश्क’ |
सामाजिक / पारिवारिक | उच्च मध्यवर्गीय जीवन की विसंगतियों और आधुनिक जीवनशैली पर व्यंग्य। |
| जोंक | उपेंद्रनाथ ‘अश्क’ | सामाजिक / व्यंग्यपरक | समाज के शोषक चरित्र और परजीवी मानसिकता पर तीखा व्यंग्य। |
| संस्कार और भावना | विष्णु प्रभाकर | मनोवैज्ञानिक / पारिवारिक |
मानवीय संवेदनाओं, पुरानी मान्यताओं और नए दृष्टिकोण के बीच द्वंद्व व हृदय परिवर्तन। |
| रीढ़ की हड्डी | डॉ. जगदीशचंद्र माथुर | सामाजिक समस्या | विवाह जैसी सामाजिक समस्या और नारी स्वाभिमान को उजागर करने वाला प्रसिद्ध एकांकी। |
| कौमुदी महोत्सव |
डॉ. रामकुमार वर्मा |
ऐतिहासिक |
प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और राजनैतिक पृष्ठभूमि पर रचित चर्चित कृति। |
| भोर का तारा | डॉ. जगदीशचंद्र माथुर | ऐतिहासिक / सांस्कृतिक | कालिदास के जीवन के शुरुआती दौर और कला-प्रेम पर आधारित एकांकी। |
हिंदी के प्रमुख एकांकीकार एवं उनका कृतित्व
1. डॉ. रामकुमार वर्मा
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विशेषताएँ: इन्हें हिंदी का सर्वश्रेष्ठ और आधुनिक एकांकी का जनक माना जाता है। इन्होंने सामाजिक, ऐतिहासिक एवं समस्यामूलक एकांकी लिखे तथा कुल 154 एकांकी लिखे हैं।
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प्रमुख एकांकी संग्रह:
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बादल की मृत्यु (1930 ई.)
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पृथ्वीराज की आँखें (1937 ई.)
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रेशमी टाई (1949 ई.)
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चारुमित्र (1943 ई.)
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विभूति (1943 ई.)
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सप्तकिरण (1947 ई.)
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रूपरंग (1948 ई.)
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कौमुदी महोत्सव (1949 ई.)
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ध्रुवतारिका (1950 ई.)
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ऋतुराज (1951 ई.)
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रजतरश्मि (1952 ई.)
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दीपदान (1954 ई.)
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कामकन्दला (1955 ई.)
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कपूर (1956 ई.)
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इंद्रधनुष (1957 ई.), रिमझिम (1957 ई.)
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अन्य प्रमुख: औरंगजेब की आखिरी रात, दस मिनट, मयूरपंख, बापू, विजयपर्व, कड़ा और कृपाण, नाना फडणवीस, महाराणा प्रताप, शिवाजी, अशोक का शोक, जौहर की ज्योति, अग्निशिखा, जयादित्य, संत तुलसीदास, जय वर्द्धमान, भगवान बुद्ध, समुद्रगुप्त, पराक्रमांक, सम्राट कनिष्क, स्वयंवरा, वत्सराज उदयन, महामेघवाहन खारवेल, जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर।
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2. भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव (भुवनेश्वर)
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विशेषताएँ: इनके एकांकियों में भावुकता का अभाव है, इनकी भाषा वक्रोक्ति से युक्त है और इन पर पाश्चात्य नाटककार बर्नार्ड शॉ का स्पष्ट प्रभाव है।
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प्रमुख एकांकी:
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कारवाँ (1935 ई.)
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श्यामा (1938 ई.)
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एक साम्यहीन साम्यवादी (1934 ई.)
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सवा आठ बजे (1938 ई.)
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आदमखोर (1938 ई.)
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शैतान, प्रतिभा का विवाह (1936 ई.)
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स्ट्राइक, रहस्य रोमांच, मृत्यु (1936 ई.), लॉटरी (1935 ई.)
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सीकों की गाडी (1950 ई.)
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चंगेज खाँ, ऊसर, पतिता (1944 ई.)
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ताँबे के कीड़े (1946 ई.)
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अकबर (1950 ई.), इतिहास की केंचुल (1948 ई.)
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फोटोग्राफ के सामने (1945 ई.)
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रोशनी और आग (1941 ई.)
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सिकन्दर (1950 ई.), आजादी की नींद (1948 ई.)
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3. उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’
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विशेषताएँ: इन्होंने सामाजिक, मनोवैज्ञानिक एवं व्यंग्यात्मक एकांकी लिखे।
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प्रमुख एकांकी व संग्रह:
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पापी (1937 ई.)
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लक्ष्मी का स्वागत, देवताओं की छाया में, चरवाहे, तूफान से पहले, मोहब्बत, क्रॉसवर्ड पहेली, आपस का समझौता, विवाह के दिन, जोंक, चिलमन, खिड़की, जीवनसाथी, चुंबक, मैमना, चमत्कार, अंधी गली, आदिमार्ग, अंजो दीदी, कैसा साब-कैसी आया, बतसिया, समाना मालिक, कैद और उड़ान, अधिकार का रक्षक, स्वर्ग की झलक, साहब को जुकाम है, पर्दा उठाओ : पर्दा गिराओ, सूखी डाली, भँवर।
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4. उदयशंकर भट्ट
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विशेषताएँ: इनके एकांकियों की संख्या लगभग 75 मानी जाती है।
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प्रमुख एकांकी: एक ही कब्र में (1936), आदिम युग, दुर्गा, नेता, नकली और असली, बड़े आदमी की मृत्यु, विष की पुड़िया, मुंशी अनोखेलाल, प्रथम विवाह, मनु और मानव, कुमार संभव, गिरती दीवारें, पिशाचों का नाच, बीमार का इलाज, आत्म प्रदान, जीवन, वापसी, मंदिर के द्वार पर दो अतिथि, अघटित, अंधकार, नये मेहमान, नया नाटक, विस्फोट, बाबूजी, धूम्रशिखा, महस्वतंत्रता का युग, मायोपिया, अपनी-अपनी खाट पर, वार्गेन, गृहदशा, गांधीजी का रामराज्य, धर्म परम्परा, एकला चलो रे, अमर अर्चना, मालती-माधव, वन महोत्सव, मदन-दहन, विश्वमित्र, मत्स्यगंधा, समस्या का अन्त, आज का आदमी, वर निर्वाचन, स्त्री का हृदय, पर्दे के पीछे, दस हजार, सेठ भालचन्द।
5. सेठ गोविन्ददास
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प्रमुख एकांकी: स्पर्धा (1935), बुद्ध की एक शिष्या, नानक की नमाज, तेगबहादुर की भविष्यवाणी, परमहंस का पत्नीप्रेम, कृषियज्ञ, बुद्ध के सच्चे सनेही कौन?, मानवमन, मैत्री, ईद और होली, हंगर-स्ट्राइक, सच्चा कांग्रेसी कौन?, बन्द नोट, जाति उत्थान, वह मरा क्यों?
6. जगदीश चन्द्र माथुर
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प्रमुख एकांकी: मेरी बाँसुरी (1936), भोर का तारा, घोंसले, भाषण, बंदी, शारदीया, कलिंग विजय, रीढ़ की हड्डी, मकड़ी का जाला, खण्डहर, कबूतर खाना, ओ मेरे सपने, खिड़की की राह
7. लक्ष्मीनारायण लाल एवं अन्य प्रमुख एकांकीकार
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लक्ष्मीनारायण लाल: मड़वे का भोर, अन्धा कुआँ, ताजमहल के आँसू, पर्वत के पीछे, नाटक बहुरंगी और दूसरा दरवाजा।
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विष्णु प्रभाकर: स्वाधीनता संग्राम, लिपस्टिक की मुस्कान, दृष्टि खोज, प्रकाश और परछाईं, ऊँचा पर्वत, ये रेखाएँ – ये दायरे, अशोक, मैं मानव हूँ, मैं तुम्हें क्षमा करूँगा, बीमार, गहरा सागर, तीसरा आदमी, डरे हुए लोग, अभया।
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वृन्दावन लाल वर्मा: लो भाई पंचो लो, कश्मीर का काँटा।
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भगवती चरण वर्मा: चौपाल, सबसे बड़ा आदमी।
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नरेश मेहता: सुबह के घण्टे।
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जैनेन्द्र कुमार: टकराहट।
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हरिकृष्ण ‘प्रेमी’: मातृ मन्दिर, राष्ट्रमन्दिर, न्यायमन्दिर, वाणी मन्दिर।
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विनोद रस्तोगी: पुरुष का पाप, पत्नी का परित्याग, साम्राज्य और सुहागरात, सौंदर्य का प्रायश्चित, आज मेरा विवाह है, दो चाँद, प्यास और प्यास, काला दाग, कसम कुरान की, सोना और मिट्टी, रथके पाहिए, पैसा, जनसेवा और लड़की, मुन्ना मर गया, मंगल मानव और मशीन।
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प्रभाकर माचवे: गली की मोड़ पर, पागलखाने में, पंचकन्या, पर्वतश्री, रामगिरि, संकट पर संकट, वधू चाहिए, गाँधी की राह पर।
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धर्मवीर भारती: नदी प्यासी थी।
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मोहन राकेश: अण्डे के छिलके।
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मार्कण्डेय: पत्थर और परछाइयाँ।
🎯 परीक्षा स्पेशल: एकांकी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और शॉर्टकट ट्रिक्स
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संकलन त्रय: एकांकी में स्थान, समय और कार्य की एकता को ‘संकलन त्रय’ कहा जाता है, जो इसकी अनिवार्य शर्त है।
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बर्नार्ड शॉ का प्रभाव: हिंदी एकांकीकार ‘भुवनेश्वर प्रसाद’ की शैली पर पाश्चात्य नाटककार बर्नार्ड शॉ का स्पष्ट प्रभाव देखा जाता है।
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प्रथम आधुनिक एकांकी: जयशंकर प्रसाद रचित ‘एक घूँट’ (1928 ई.) को हिंदी का प्रथम आधुनिक एकांकी माना जाता है।
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संस्कृत संदर्भ: संस्कृत में एकांकी के लिए ‘गोष्ठी’ शब्द का प्रयोग होता है, तथा इसके प्रेरणा स्रोत भास की एक-अंकीय रचनाएँ हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में कहें तो, हिंदी एकांकी का उद्भव और विकास संस्कृत नाट्य रूपों की परंपरा और पाश्चात्य ‘वन एक्ट प्ले’ के समन्वय से हुआ है। भारतेंदु युग से शुरू होकर प्रसाद, रामकुमार वर्मा और भुवनेश्वर जैसे रचनाकारों के हाथों से गुजरते हुए एकांकी ने समाज की ज्वलंत समस्याओं, ऐतिहासिक गौरव और मनोवैज्ञानिक सत्यों को प्रभावी मंच प्रदान किया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से एकांकी के तत्त्व, संस्कृत भेद और प्रमुख एकांकीकारों के कृतित्व को याद रखना अत्यंत आवश्यक है।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
विशेष नोट :
महत्वपूर्ण सूचना: प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT) में हिंदी साहित्य के इतिहास से एकांकीकारों के क्रम, उनकी प्रसिद्ध प्रवृत्तियाँ और प्रमुख रचनाओं के प्रकाशन वर्ष से संबंधित प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं। इसलिए नीचे दिए गए शेष प्रश्नों को भी ध्यानपूर्वक पढ़ें।