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कबीर ग्रंथावली (श्यामसुंदर दास) : 50+ अति महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और मुख्य तथ्य | One-Liner Notes

“कबीर ग्रंथावली (संपादक: श्यामसुंदर दास) पर आधारित इस विशेष लेख में कबीरदास जी का दर्शन, हठयोग, उलटबासियाँ, प्रतीक, अलंकार, छंद और 50+ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर पढ़ें। TGT, PGT, UGC NET, Assistant Professor एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हिन्दी साहित्य नोट्स।”

कबीर ग्रंथावली-श्यामसुंदर दास(MCQ)

  1. कबीरदास जी के अनुसार निकटतम सम्बन्धी कौन है?

    • सद्गुरु

  2. कबीर ग्रन्थावली को अप्रामाणिक माना हैं ?

    • डाॅ. रामकुमार वर्मा

  3. कबीर की भाषा को सधुक्कङी भाषा कहा है ?

    • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

  4. कबीरदास के अनुसार ‘अनमनी’ शब्द से आशय है-

    • हठयोग की एक क्रिया

  5. कबीर के साहित्य को प्रकाश में लाने का श्रेय किसको है ?

    • एच.एच. विल्सन

  6. कबीरदास जी ने गुरु के उपदेश को बताया है-

    • बाण के समान

  7. किसने कहा कि कबीर वाणी के डिक्टेटर थे ?

    • हजारी प्रसाद द्विवेदी

  8. कबीर साहित्य का सर्वप्रथम संकलन किसने किया ?

    • धर्मदास

  9. कबीर ने आत्मा को माना है ?

    • पत्नी

  10. कबीरदास ने सुपात्र व कुपात्र शिष्य को उपमान दिया है-

    • वंशीवत्

  11. ’दुलहनि गबहूँ मंगलाचार’ कबीर ने यहाँ दुलहनि शब्द का प्रयोग किसके लिए किया है ?

    • स्त्रियों के लिए

  12. ’चरन कंवल चित् लाइये राँम नाँम गाइ रे’

    रेखांकित पद में कौनसा समास है ?

    • कर्मधारय

  13. संसार रूपी मायाजाल को कैसे काटा सकता है-

    • गुरु की उपदेश से

  14. कबीर का दर्शन है –

    • अद्वैतवाद

  15. आपहिं आप बंधाइया, द्वै लोचन मरहिं पियास रे।।

    यहाँ ’आपहिं आप बँधाइया’ का अभिप्राय है –

    • व्यक्ति स्वतः इस संसार में जकङता है।

  16. कबीरदास जी ने सद्गुरु की तुलना किससे की है-

    • लुहार

  17. कहैं कबीर हम ब्याहि चले, पुरिष एक अविनासी।

    यहाँ अविनाशी पुरुष किसे कहा गया है ?

    • परमात्मा

  18. समंदर लागी आगि, नदियाँ जलि कोइला भई।

    देखि कबीरा जागि, मंछी रुषाँ चढ़ि गई।।

    इस पद में कौनसा छंद है –

    • सोरठा

  19. ‘गुरु गोविन्द तौ एक हैं, दूधा यहू आकार

    आपा मेट जीवत मरै, तौ पावै करतार।।’

    उक्त पंक्तियों में आए ‘जीवत मरै व करतार’ शब्दों से आशय है-

    • जीवनमुक्त, सृष्टि कत्र्ता ईश्वर

  20. हँसि हँसि कन्त न पाइये, जिनि पाया तिनि रोइ।

    जो हाँसेही हरि मिलै, तौ नहीं दुहागिनि कोइ।।

    कबीर ने परमात्मा की प्राप्ति के मार्ग को बताया है –

    • कठिन और वेदनापूर्ण

  21. चोट सतांणी विरह की, सब तन जर जर होई।

    मारणहारा जाँणि है, के जिहिं लागी सोइ।। यहाँ कबीर ने मारणहारा शब्द किसके के लिये प्रयुक्त किया है –

    • परम ब्रह्म

  22. ‘पंच संगी पिव पिव करैं’। रेखांकित पदों से क्या आशय है ?

    • पंच ज्ञानेन्द्रियाँ

  23. चकवी बिछुटी रैणि की, आइ मिली परभाति।

    जे जन बिछुटे राम सूं, ते दिन मिले न राति।।

    कबीर ने चकवी किसे कहा है –

    • आत्मा

  24. कबीर प्रेम न चषिया, चेषि न लीया साब।

    सूनै घर का पाहुणां ज्यूँ आया त्यूं जाव।।

    रेखांकित शब्द का अभिप्राय है –

    • अतिथि

  25. ‘गुण गायैं गुण नाम कटै।’ उक्त पंक्तियों में रेखांकित पद से क्या आशय है-

    • सत्व, रज, तम

  26. कबीर सूता क्या करै, उठि न रोवै दुक्ख।

    जाका बासा गोर मैं, सो क्यूँ सोवै सुक्ख।।

    यहाँ कबीर ने संसार को किस रूप में माना है –

    • कब्र

  27. सतगुर हम सूँ रीझि करि, एक कह्या प्रसंग।

    बरस्या बादल प्रेम का, भीजि गया सब अंग।।

    कबीर ने प्रेम का बादल किसे कहा है –

    • गुरु द्वारा ज्ञान प्रबोध को

  28. ‘कबीर पीर पिरावनी’। ‘पिरावनी’ शब्द से आशय है-

    • पीड़ा देने वाली

  29. कहै कबीर गुर ग्यान थैं, एक आध उबरंत।।

    यहाँ उबरंत शब्द का अभिप्राय है –

    • उबरना

  30. ‘रैणां दूर विछोहिया, रहु रे संषन झुरि।

    देबलि देबलि धाहड़ी, देसी ऊगे सूरि।।’

    उक्त पंक्तियों में संषम (शंख) शब्द प्रतीक रूप में प्रयुक्त हुआ है-

    • जीव

  31. कबीर ने स्वयं अनुभव किये हुये उपदेशों को कहा है –

    • साखी

  32. ‘कबीर तेज अनंत का, मानौ ऊगी सूरज सेणि।

    पति संगि जागी सुन्दरि, कोतिग रीठा तोणि।’

    उक्त पंक्तियाँ ली गई हैं-

    • परचा अंग से

  33. गुरु गोविन्द तौ एक है, दूजा यहू आकार।

    आपा मेट जीवत मरै, तौ पावै करतार।।

    कबीर ने इस पद में आपा शब्द किसके लिये प्रयोग में लिया है ?

    • अहंकार

  34. कबीर गुर गरबा मिल्या, रलि गया आटैं लूंण।

    जाति-पाँति कुल सब मिटे, नाँव धरौगे कूण।।

    इस साखी में निम्न में से किसके साहात्म्य को स्वीकारा गया है –

    • गुरु

  35. कबीर की रचनाओं में हठयोग साधना निम्न में से किस प्रभाव का परिणाम है ?

    • नाथ साहित्य

  36. माया दीपक नर पतंग, भ्रमि भ्रमि इवैं पङंत।

    कबीर ने संसार को किसके समान बताया है ?

    • दीपक के समान जलाने वाला।

  37. सतगुर सवाँन को सगा, सोधी सईं न दाति।

    हरिजी सवाँन को हितू, हरिजन सईं न जाति।।

    कबीर ने किस जाति को श्रेष्ठ बताया है –

    • भगवत् भक्त

  38. सतगुर बपुरा क्या करै, जे सिषही मांहै चूक।

    भावै त्यूँ प्रबोधि ले ज्यूँ बंसि बजाई फूँक।।

    कबीर के इस पद का भाव है –

    • शिष्य की पात्रता

  39. पूरे सूँ परचा भया, सब दुख मेल्या दूरि।

    निर्मल कीन्हीं आत्मां, ताथैं सदा हजूरि।।

    यहाँ पूरे सूँ से क्या अभिप्राय है –

    • परमात्मा

  40. कबीर का जन्म किस वर्ष हुआ था –

    • सन् 1398

  41. रात्यूँ रूँनी बिरहनीं ज्यूँ बंचै कूँ कुँज।

    कबीर अन्तर प्रजल्या प्रगटया बिरहा पुंज।।

    कबीर ने यहाँ विरहिणी किसे कहा है –

    • आत्मा

  42. बिरहिन ऊभी पथ सिरि, पंथी बूझे धाई।

    एक सबद कहि पीव का कबर मिलौगे आइ।।

    यहाँ कबीर ने किस भाव को व्यंजित किया है ?

    • विरह की तीव्रता को

  43. बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।

    राम बियोगी ना जीवै, जिवै तो बौरा होई।।

    कबीर के इस पद में कौनसा अलंकार है –

    • रूपक

  44. मानसरोवर सुभर जल, हंसा केलि कराहिं।

    मुकताहल मुकता चुगैं, अब उङि अनत न जाहिं।।

    कबीर दर्शन में यहाँ हंसा किसे कहा गया है –

    • जीवात्मा

  45. षट दल कंवल निवासिया, चहु कौं फेरि मिलाइ रे।।

    दहुँ कै बीचि समाधियाँ, तहाँ काल न पासै आइ रे।।

    कबीर दर्शन में कंवल शब्द निम्न में से किस अभिप्राय को प्रकट करता है ?

    • चक्र

  46. गुरु प्रसाद सूई कै नांकै, हस्तो आवै जांही।।

    कबीर ने इस पद में निम्न में से किस अभिप्राय को स्थापित किया है –

    • गुरु की कृपा से असंभव कार्य भी संभव है।

  47. ’पहुप बिना एक तरवर फलियाँ, बिन कर तूर बजाया।’

    इस पंक्ति में कौनसा अलंकार है ?

    • विभावना

  48. ‘चरननि लागि करौ बरिआई।’ यहाँ रेखांकित पद का अर्थ है-

    • सेवा

  49. ’सायर जले सकल बन दाजे, मंछ अहेरा खेलै’।

    इस पंक्ति में कौनसा अलंकार है –

    • असंगति

  50. कबीर के साहित्य में उलटबासियाँ कहाँ से ग्रहण की गई है ?

    • सिद्ध साहित्य

  51. कबीर का हठयोग किस मत पर आधारित है ?

    • नाथ साहित्य

  52. कबीर के गुरु थे ?

    • रामानन्द

  53. रामचन्द्र शुक्ल ने निर्गुण मार्ग का निर्दिष्ट प्रवर्तक किसे माना है ?

    • कबीर

  54. कबीर ने किससे प्रभावित होकर परमात्मा को प्रियतम माना ?

    • वैष्णवों से

  55. कबीर के काव्य में प्रधानता है ?

    • बुद्धि तत्त्व की।

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