वियोग शृंगार की कितनी दशाएं मानी गई है?
वियोग शृंगार के अन्तर्गत काव्यशास्त्रियों ने आश्रय की दस दशाओं का उल्लेख किया है –
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अभिलाषा (हम तो कान्ह केलि की भूखी)।
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चिंता (निसिदिन बरसत नैन हमारे)।
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स्मरण।
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गुणकथन (हमको हरि की कथा सुनाओ)।
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उद्वेग (तिहारि प्रीति किंधौ तरवारि)।
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प्रलाप (मधुवन तुम कत रहत हरे?)।
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उन्माद (ऊधो न हम बिटही न तुम दास)।
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व्याधि (सुनहु स्याम जु वै वज्र वनिता बिरह तुम्हारे भई रावरी)।
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जड़ता (हरिमुख निरखि निमेख बसारे)।
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मूर्च्छा (सोचत अति पछताति राधिका मूर्छित धरनी ढहि)।