काव्यशास्त्र

वियोग शृंगार की कितनी दशाएं मानी गई है?

अंतिम संशोधित (Last Updated): September 2, 2026

वियोग शृंगार की कितनी दशाएं मानी गई है?

वियोग शृंगार के अन्तर्गत काव्यशास्त्रियों ने आश्रय की दस दशाओं का उल्लेख किया है –

  1. अभिलाषा (हम तो कान्ह केलि की भूखी)।

  2. चिंता (निसिदिन बरसत नैन हमारे)।

  3. स्मरण।

  4. गुणकथन (हमको हरि की कथा सुनाओ)।

  5. उद्वेग (तिहारि प्रीति किंधौ तरवारि)।

  6. प्रलाप (मधुवन तुम कत रहत हरे?)।

  7. उन्माद (ऊधो न हम बिटही न तुम दास)।

  8. व्याधि (सुनहु स्याम जु वै वज्र वनिता बिरह तुम्हारे भई रावरी)।

  9. जड़ता (हरिमुख निरखि निमेख बसारे)।

  10. मूर्च्छा (सोचत अति पछताति राधिका मूर्छित धरनी ढहि)।

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