प्रसिद्ध काव्य पंक्तियाँ, हिंदी साहित्य का इतिहास

Hindi Sahitya ki Pramukh Panktiyan | हिंदी साहित्य की प्रमुख पंक्तियाँ | Hindi Literature

हिंदी साहित्य की 100 महत्वपूर्ण पंक्तियाँ और उनके रचनाकार

हिंदी साहित्य की 100 अति-महत्वपूर्ण एवं चर्चित पंक्तियाँ (Top 100 Important Lines in Hindi Literature)

हिंदी साहित्य के इतिहास, काव्यशास्त्र और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC, KVS, NVS और असिस्टेंट प्रोफेसर) में हिंदी काव्य-पंक्तियों से सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा हॉल में कई बार विद्यार्थी कवि या रचना को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए इस लेख में भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल की 100 सबसे प्रसिद्ध और परीक्षा-उपयोगी पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ आ-क्रमानुसार (Alphabetical Order) संकलित किया गया है। यदि आप हिंदी विषय से किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह सूची आपके लिए एक अचूक साधन साबित होगी।

एक नजर में (Quick Overview)

  • विषय: हिंदी साहित्य की 100 अति-महत्वपूर्ण एवं चर्चित काव्य-पंक्तियाँ

  • कवर किए गए काल: भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल के प्रमुख कवि

  • उपयोगी परीक्षाएँ: UGC NET, TGT, PGT, RPSC, KVS, NVS और असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी

 100 प्रमुख पंक्तियाँ (कवियों के क्रमानुसार सूची)

अज्ञेय की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

1. मैं मरूँगा सुखी, मैंने जीवन की धज्जियाँ उड़ाई हैं — अज्ञेय

2. हरी घास पर क्षणभर, फेंक दो यह धनुष — अज्ञेय

अमीर खुसरो की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

3. एक नार ने अचरज किया, साँप मार पिंजरे में दिया — अमीर खुसरो

4. मैं हिंदुस्तान की तूती हूँ, अगर तुम वास्तव में मुझसे कुछ पूछना चाहते हो तो हिंदवी में पूछो — अमीर खुसरो

आचार्य रामचंद्र शुक्ल की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

5. यदि प्रबंध काव्य एक विस्तृत वनस्थली है तो मुक्तक चुना हुआ गुलदस्ता — आचार्य शुक्ल

6. मैं मजदूर हूँ, मजदूरी किए बिना मुझे भोजन करने का अधिकार नहीं — रामचंद्र शुक्ल

7. सूर अपनी आँखों से वात्सल्य का कोना-कोना झाँक आए हैं — रामचंद्र शुक्ल

आलम की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

8. कनक छुरी सी कामिनी काहे को कटि छीन — आलम

उस्मान की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

9. बलदीप देखा अंगरेजा, तहाँ जाई जेहि कठिन करेजा — उस्मान (चित्रावली से)

केशवदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

10. देखे मुख भावै अनदेखे कमल चंद, ताते मुख मुरझे कमला न चंद — केशवदास

11. जदपि सुजाति सुलच्छनी सुबरन सरस सुवृत्त, भूषण बिनु न विराजै कविता बनिता मित्त — केशवदास

कुंभनदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

12. संतन को कहा सीकरी सो काम, आवत जात पनहियाँ टूटी बिसरि गयो हरि नाम — कुंभनदास

कुतुबन की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

13. रुकमिनि पुनि वैसहि मरि गई, कुलवंती सत सो सति भई — कुतुबन

कृष्णदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

14. मो मन गिरिधर छवि पै अटक्यो, ललित त्रिभंग चाल पै चलि कै, चिबुक चारु गड़ि ठटक्यो — कृष्णदास

चंद्रबरदाई की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

15. पुस्तक जल्हण हाथ दै चलि गज्जन नृप काज — चंद्रबरदाई

16. मनहु कला ससभान कला सोलह सो बनिय — चंद्रबरदाई

चंद्रधर शर्मा गुलेरी की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

17. उत्तर अपभ्रंश ही पुरानी हिंदी है — चंद्रधर शर्मा गुलेरी

चंद्रशेखर की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

18. आलम नेवाज सिरताज पातसाहन के, गाज ते दराज कौन नजर तिहारी है — चंद्रशेखर

चरणदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

19. यह सिर नवे न राम कू, नाहीं गिरियो टूट, आन देव नहिं परसिये, यह तन जायो छूट — चरणदास

जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

20. छोड़ो मत यह सुख का कण है — जयशंकर प्रसाद

21. काव्य आत्मा की संकल्पात्मक अनुभूति है — जयशंकर प्रसाद

22. बीती विभावरी जागरी, अंबर पनघट में डुबो रही तारा घट उषा नागरी — जयशंकर प्रसाद

23. अरुण यह मधुमय देश हमारा — जयशंकर प्रसाद

जगनिक की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

24. बारह बरस लौ कूकर जिए, अरु तेरह लै जिए सियार, बरस अठारह छत्री जिए, आगे जीवन को धिक्कार — जगनिक

देव की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

25. अभिधा उत्तम काव्य है मध्य लक्षणा लीन, अधम व्यंजना रस विरस, उलटी कहत नवीन — देव

नंददुलारे वाजपेयी की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

26. प्रयोगवाद बैठे-ठाले का धंधा है — नंददुलारे वाजपेयी

नाभादास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

27. कलि कुटिल जीव निस्तार हित वाल्मीकि तुलसी भयो — नाभादास

नूर मोहम्मद की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

28. जानत है वह सिरजनहारा, जो किछु है मन मरम हमारा। हिंदू मग पर पाँव न राखेऊ, का जो बहुतै हिंदी भाखेऊ — नूरमोहम्मद

नागार्जुन की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

29. सिन्दूरी अशोकों पर उस पार प्रिदर्शिके! तुम कब से बैठी हो? — नागार्जुन

30. कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास — नागार्जुन

प्रतापनारायण मिश्र की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

31. आठ मास बीतें जजमान, अब तो करो दच्छिना दान — प्रतापनारायण मिश्र

32. पढ़ि कमाय कीन्हों कहा हरे देश क्लेश, जैसे कन्ता घर रहे तैसे रहे विदेस — प्रतापनारायण मिश्र

परमानंद दास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

33. कहा करौ बैकुंठहिं जाय, जहाँ नहिं नंद, जहाँ न जसोदा, नहिं जहँ गोपी, ग्वाल न गाय — परमानंद दास

बोधा की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

34. यह प्रेम को पंथ कराल महा तरवारि की धार पर धावनो है — बोधा

35. एक सुभान कै आनन पै कुरबान जहाँ लग रूप जहाँ को — बोधा

भिखारीदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

36. काव्य की रीति सिखि सुकवीन सो, देखी सुनि बहुलोक की बातें — भिखारीदास

भरतमुनि की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

37. विभावानुभावसंचारीभावसंयोगद्रसनिष्पत्तिः — भरतमुनि

भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

38. इन मुसलमान जनन पर कोटिन हिंदू बारिह — भारतेंदु

39. सखा श्रीकृष्ण के गुलाम राधा रानी के — भारतेंदु

40. निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल — भारतेंदु हरिश्चंद्र

बालकृष्ण भट्ट की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

41. साहित्य जनसमूह के हृदय का विकास है — बालकृष्ण भट्ट

मलूकदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

42. अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम — मलूकदास

मतिराम की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

43. आँखिन मूँदिबे के मिस आनि, अचानक पीठि उरोज लगावै — मतिराम

44. कुंदन को रंग फीकों लगे — मतिराम

मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

45. केवल मनोरंजन न कवि का कर्म होना चाहिए, उसमें उचित उपदेश का मर्म होना चाहिए — मैथिलीशरण गुप्त

46. नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ काम करो — मैथिलीशरण गुप्त

47. अब तो श्रम कण देंगे गवाही, यह सिंधु भी देखा है — मैथिलीशरण गुप्त

माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

48. चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ — माखनलाल चतुर्वेदी

49. मुझे तोड़ लेना बनमाली! उस पथ पर देना तुम फेंके — माखनलाल चतुर्वेदी

महादेवी वर्मा की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

50. मैं नीर भरी दुख की बदली — महादेवी वर्मा

51. पंत जी की प्रसिद्ध पंक्तियाँ और महादेवी जी की वेदना — (विपुल व्यथा से सुसज्जित) — महादेवी वर्मा

52. मिलन का नाम मत लो, मैं विरह में चिर हूँ — महादेवी वर्मा

मीराबाई की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

53. बसो मेरे नैनन में नंदलाल, मोहिनी मूरत, साँवरि सूरत, नैना बने रसाल — मीराबाई

मंझन की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

54. विक्रम धँसा प्रेम का बारा, सपनावती कहँ गयऊ पतारा — मंझन (मधुमालती से)

बनारसीदास जैन की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

55. कब घर में बैठे रहें, नाहिंन हाट बाजार, मधुमालती, मृगावती पोथी दोउ उचार — बनारसीदास जैन

रहीम की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

56. सुरतिय, नरतिय, नागतिय, चाहत अस होय, गोद लिए हुलसी फिरै तुलसी सो सुत होय — रहीम

57. रहीमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय — रहीम

रसखान की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

58. मानुष हों तो वही रसखान बसौं मिलि गोकुल गाँव के ग्वारन — रसखान

59. या लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुपुर को तजि डारौं — रसखान

रसलीन की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

60. अमिय, हलाहल, मदभरे, सेत, स्याम, रतनार, जियत, मरत, झुकि-झुकि परत, जेहि चितवत एक बार — रसलीन

रैदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

61. प्रभु जी तुम चंदन हम पानी — रैदास

रज्जब की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

62. धुनि ग्रमे उत्पन्नो, दादू योगेंद्र महामुनि — रज्जब

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

63. सिंहासन खाली करो कि जनता आती है — रामधारी सिंह दिनकर

64. कलम आज उनकी जय बोल — रामधारी सिंह दिनकर

65. वैशाली की नगर-महोत्सव की वह रात — दिनकर

66. जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी इतिहास — दिनकर

वृंद की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

67. भले बुरे सम, जौ लौं बोलत नाहीं, जानि परत हैं काक पिक, ऋतु बसंत के माहिं — वृंद

विद्यापति की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

68. माधव हम परिणाम निराशा — विद्यापति

69. देसिल बअना सब इन मिट्ठा, त तैसौन जपुअ अवहट्ठा — विद्यापति

70. बालचंद बिज्जावई भाषा, नहिं दुहु नहिं लग्गाई दुज्जन हासा — विद्यापति

ब्रजनाथ की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

71. नेही महा ब्रजभाषा प्रवीन और सुंदरतानि के भेद को जानै — ब्रजनाथ

विठ्ठलनाथ की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

72. पुष्टिमार्ग का जहाज जात है सो जाको कछु लेना हो सो लेउ — विठ्ठलनाथ

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

73. स्नेह निर्झर बह गया है, रेत ज्यों तन रह गया है — निराला

74. राम की शक्तिपूजा का प्रसंग (अन्याय कि जिता दासवर्ण? — निराला)

75. सरोज स्मृति: “दुख ही जीवन की कथा रही, क्या कहूँ आज जो नहीं कही” — निराला

76. जागो फिर एक बार — निराला

सुमित्रानंदन पंत की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

77. खुल गए छंद के बंध — पंत

78. राजनीति का प्रश्न नहीं रे आज, जगत के सम्मुख एक वृहत सांस्कृतिक समस्या — पंत

79. वियोगी होगा पहला कवि, सेह से उपजा होगा गगान — पंत

80. सुन्दर है विहग सुमन सुंदर, मानव तुम सबसे सुंदरतम — पंत

सरहपा की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

81. जाहि मन पवन न संचरई रवि ससि नहिं पवेस — सरहपा

सूरदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

82. मो सम कौन कुटिल खलकामी — सूरदास

83. भरोसो दृढ़ इन चरनन केरो — सूरदास

84. हरि हू राजनीति पढ़ि आए — सूरदास

85. मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ — सूरदास

86. ऊधो मोहि ब्रज बिसरत नाहीं — सूरदास

संत कबीरदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

87. झलमल झगरा झूलते बाकी रही न काहू, गोरख अटके कालपुर कौन कहवै साहु — कबीर

88. दशरथ सुत तिहुँ लोक बखाना, राम नाम का मरम है आना — कबीर

89. मुझको क्या तू ढूँढ़े बंदे, मैं तो तेरे पास में — कबीर

90. अपना मस्तक काटिकै बीर हुआ कबीर — कबीर

91. सो जागी जाके मन में मुद्रा, रात-दिवस ना करई निद्रा — कबीर

92. काहे री नलिनी तू कुम्हिलानी, तेही के नालि सरोवर पानी — कबीर

संत दादूदयाल की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

93. अवधू रहिया हाटे वाटे रूप बिरछ की छाया, तजिवा काम क्रोध लोभ मोह संसार की माया — दादू

हजारीप्रसाद द्विवेदी की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

94. निराला से बढ़कर स्वच्छंदतावादी कवि हिंदी में कोई नहीं है — हजारीप्रसाद द्विवेदी

95. यदि इस्लाम न भी आया होता तो भी भक्ति साहित्य का बारह आना वैसा ही होता जैसा आज — हजारीप्रसाद द्विवेदी

96. तुलसी का सारा काव्य समन्वय की विराट चेष्टा है — हजारीप्रसाद द्विवेदी

हेमचंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

97. भल्ला हुआ जु मारिआ बहिणि म्हारा कंतु, लज्जेजं तु वयंसिहू जइ मग्गा घरु संतु — हेमचंद्र

होल्हराय की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

98. लोटा तुलसीदास को लाख टका को मोल — होल्हराय

गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

99. केशव कहि न जादु का कहिए — तुलसीदास

100. पराधीन सपनेहु सुख नाहीं — तुलसीदास

विशेष टिप्स (परीक्षा के लिए छात्रों के लिए उपयोगी बातें)

  1. रचना और रचनाकार का मिलान: प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर सूची-I और सूची-II के मिलान वाले प्रश्न आते हैं, इसलिए इन 100 पंक्तियों के साथ उनके कवियों के नाम अच्छी तरह याद कर लें।

  2. विशेष संदर्भ को पहचानें: कुछ पंक्तियाँ विशेष ग्रंथों से ली गई हैं (जैसे निराला की ‘सरोज स्मृति’ या तुलसीदास की ‘विनयपत्रिका’ से)। परीक्षा में ग्रंथ का नाम भी पूछ लिया जाता है, उसे कोष्ठक में जरूर देखें।

  3. कीवर्ड पर फोकस करें: प्रत्येक पंक्ति के मुख्य शब्दों (जैसे “चंदन-पानी”, “सिंहासन खाली करो”, “नीर भरी दुख की बदली”) से कवि की पहचान करने का अभ्यास करें।

निष्कर्ष

हिंदी साहित्य का इतिहास केवल सन और प्रवृत्तियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उन अमर पंक्तियों और भावनाओं का जीवंत दस्तावेज है जो युगों-युगों से पाठकों और परीक्षार्थियों को प्रेरित करती आ रही हैं। उम्मीद है कि यह 100 महत्वपूर्ण पंक्तियों का यह व्यापक संकलन आपकी आगामी परीक्षाओं में सफलता की राह को पूरी तरह आसान बनाएगा। नियमित अभ्यास और पुनरावृत्ति (Revision) से आप परीक्षा में इन प्रश्नों को आसानी से हल कर सकेंगे।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाली पंक्तियाँ)

Q1. यदि प्रबंध काव्य एक विस्तृत वनस्थली है तो मुक्तक चुना हुआ गुलदस्ता — यह प्रसिद्ध कथन किसका है?
यह प्रसिद्ध आलोचनात्मक कथन हिंदी के शीर्षस्थ आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल का है। आचार्य शुक्ल जी ने यह कथन प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य की तुलना करते हुए हिंदी साहित्य के इतिहास में प्रकट किया था, जो कि काव्यशास्त्र की परीक्षाओं में सबसे अधिक बार पूछा जाने वाला महत्वपूर्ण प्रश्न है।
Q2. प्रभु जी तुम चंदन हम पानी — यह प्रसिद्ध पंक्तियाँ किस कवि की हैं?
यह परम प्रसिद्ध भक्ति-पंथ की पंक्तियाँ संत शिरोमणि रैदास (संत रविदास) की हैं। इन पंक्तियों के माध्यम से संत रैदास ने अपने आराध्य भगवान के साथ अपनी अनन्य, अद्वैत और अनन्य प्रेमयुक्त भक्ति भावना को अत्यंत सुंदर रूप में व्यक्त किया है।
Q3. सिंहासन खाली करो कि जनता आती है — यह ओजस्वी पंक्तियाँ किसकी हैं?
यह ओजस्वी और क्रांतिकारी पंक्तियाँ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रसिद्ध कविता से ली गई हैं। यह रचना भारतीय जनमानस में क्रांति, शोषितों के अधिकार और लोकतांत्रिक सत्ता के प्रति जन-चेतना जगाने के लिए हिंदी साहित्य में मील का पत्थर मानी जाती है।
Q4. मैं नीर भरी दुख की बदली — यह प्रसिद्ध गीत किसकी रचना है?
यह अमर और संवेदनशील गीत छायावाद की प्रमुख स्तंभ और ‘आधुनिक मीरा’ के रूप में विख्यात कवयित्री महादेवी वर्मा का है। यह उनकी प्रसिद्ध रचना ‘सांध्यगीत’ संकलन से लिया गया है, जिसमें जीवन के संघर्ष, करुणा और दार्शनिक रहस्यात्मकता का सुंदर चित्रण मिलता है।
Q5. अमिय हलाहल मदभरे सेत स्याम रतनार — यह पंक्ति किस कवि की है?
यह प्रसिद्ध शृंगारिक एवं सौंदर्यपरक पंक्ति रीतिसिद्ध धारा के प्रतिष्ठित कवि ‘रसलीन’ की है। यह उनके प्रसिद्ध ग्रंथ ‘रसप्रबोध’ से ली गई है, जो हिंदी रीतिकाल के काव्य-सौंदर्य और नायिका-भेद के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Q6. प्रयोगवाद बैठे-ठाले का धंधा है — यह तीखा कथन किसने कहा था?
यह प्रसिद्ध और तीखा आलोचनात्मक कथन हिंदी के प्रतिष्ठित समीक्षक नंददुलारे वाजपेयी द्वारा प्रयोगवाद की प्रवृत्तियों के संदर्भ में कहा गया था। यह कथन हिंदी साहित्य के इतिहास में आधुनिक काव्य आंदोलनों और वाद-विवाद के इतिहास को समझने के लिए बार-बार परीक्षाओं में उद्धृत किया जाता है।
Q7. संतन को कहा सीकरी सो काम — यह उक्ति किस भक्त कवि से जुड़ी है?
यह प्रसिद्ध और ऐतिहासिक उक्ति अष्टछाप के प्रमुख भक्त कवि कुंभनदास से जुड़ी है। जब मुगल सम्राट अकबर ने उन्हें विशेष रूप से फतेहपुर सीकरी आमंत्रित किया था, तब भक्त कवि कुंभनदास ने भगवान के भजन में बाधा मानकर यह निर्भीक और गौरवशाली प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।
Q8. तुलसी का सारा काव्य समन्वय की विराट चेष्टा है — यह किसने कहा है?
यह अत्यंत महत्वपूर्ण और मौलिक आलोचनात्मक कथन प्रख्यात साहित्यकार आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का है। द्विवेदी जी ने गोस्वामी तुलसीदास के लोकभक्ति, समाज और विभिन्न वैचारिक धाराओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने की उनकी अद्भुत क्षमता को रेखांकित करते हुए यह बात कही थी।
Q9. अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम — यह पंक्तियाँ किसकी हैं?
यह प्रसिद्ध संतोषवादी और निर्गुण संत-वाणी की पंक्तियाँ संत मलूकदास की हैं। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने मानव जीवन में अकर्मण्यूपन का उपदेश नहीं दिया, बल्कि ईश्वर की सर्वव्यापकता और उसकी व्यवस्था पर पूर्ण अटूट विश्वास रखने का दार्शनिक संदेश दिया है।
Q10. जाहि मन पवन न संचरई रवि ससि नहिं पवेस — यह किसकी रचना है?
यह प्रसिद्ध और दार्शनिक रहस्यवादी पंक्ति सिद्ध साहित्य के आदिकाल के प्रमुख कवि ‘सरहपा’ की चर्यापदों से संबंधित है। हिंदी साहित्य के आरंभिक काल, वज्रयान और सहजयान साधना पद्धति के अध्ययन के दृष्टिकोण से यह परीक्षा की दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण पंक्ति है।

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