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UGC NET Communication Notes in Hindi: संप्रेषण के प्रकार, मॉडल, बाधाएँ और MCQ (इकाई 4)

UGC NET Communication Notes in Hindi: संप्रेषण के प्रकार, मॉडल, बाधाएँ और MCQ

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 19, 2026

🗓️ अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026  |  ✍️ केवल कृष्ण घोड़ेला  |  UGC NET Paper 1, इकाई 4

संप्रेषण (Communication) UGC NET Paper 1 की इकाई 4 है। इसमें मॉडल, अमौखिक संप्रेषण, बाधाएँ और जनसंचार के सिद्धांतों से नाम, वर्ष और भेद पूछे जाते हैं, जिन्हें तालिका में याद करना आसान होता है। इस लेख में UGC NET Communication Notes in Hindi तालिकाओं के साथ हैं, और साथ में परीक्षा पैटर्न वाले 16 MCQ (बहु-कथन, कथन-कारण, सुमेलित और क्रम वाले प्रश्नों सहित)।

⚡ संक्षिप्त उत्तर

  • इकाई: UGC NET Paper 1 की इकाई 4: संप्रेषण (Communication)
  • प्रश्न: सामान्यतः लगभग 5 प्रश्न, कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं
  • अर्थ: लैटिन Communis (समान) से बना; विचार साझा करके समान समझ बनाना
  • मॉडल: लासवेल (1948), शैनन–वीवर (1949), ऑसगुड–श्रैम (1954, चक्रीय), बर्लो SMCR (1960)
  • अमौखिक: काइनेसिक्स, प्रॉक्सेमिक्स (एडवर्ड हॉल), पराभाषा, क्रोनेमिक्स
  • जनमाध्यम: मैकलुहान (1964), एजेंडा-निर्धारण (1972), मौन का सर्पिल (1974)
⚠️ UGC NET दिसंबर 2026 के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 28 अक्टूबर 2026 है (NTA की सार्वजनिक सूचना के अनुसार)। तिथियाँ, पैटर्न और पूरा सिलेबस: UGC NET Paper 1 Notes in Hindi: पूरी गाइड।

📌 इस शृंखला के लेख

📑 इस लेख में:

  1. संप्रेषण क्या है? अर्थ, परिभाषाएँ और तत्त्व
  2. संप्रेषण के मॉडल
  3. संप्रेषण के प्रकार
  4. मौखिक और अमौखिक संप्रेषण
  5. अंतर-सांस्कृतिक संप्रेषण
  6. समूह-संप्रेषण
  7. कक्षा-संप्रेषण
  8. संप्रेषण की बाधाएँ
  9. जनसंचार माध्यम और समाज
  10. डिजिटल युग में संप्रेषण
  11. त्वरित पुनरावृत्ति और परीक्षा के जाल
  12. Communication MCQ in Hindi
  13. तैयारी कैसे करें
  14. पूरी ई-बुक
  15. FAQ

संप्रेषण क्या है? अर्थ, परिभाषाएँ और तत्त्व

संप्रेषण (Communication) शब्द लैटिन ‘Communis’ (समान) से बना है। इसका आशय है विचार, भावना या सूचना को साझा करके समान समझ बनाना। हिंदी में ‘संचार’ और ‘संप्रेषण’ प्रायः पर्याय माने जाते हैं; ‘संप्रेषण’ में प्रेषण-क्रिया पर और ‘संचार’ में प्रवाह पर बल है।

विद्वान परिभाषा / कथन
लुईस ए. एलन संप्रेषण में वे सब क्रियाएँ आती हैं जिनसे एक व्यक्ति दूसरे के मस्तिष्क में अपनी बात पहुँचाता है।
कीथ डेविस संप्रेषण एक व्यक्ति से दूसरे तक सूचना और समझ पहुँचाने की प्रक्रिया है।
हैरल्ड लासवेल कौन, क्या, किस माध्यम से, किससे, किस प्रभाव के साथ कहता है।
शैनन व वीवर एक मस्तिष्क दूसरे मस्तिष्क को प्रभावित करने की समस्त प्रक्रिया।

संप्रेषण के तत्त्व (घटक)

घटक आशय
प्रेषक / स्रोत (Source) संदेश की उत्पत्ति; विचार को संकेतों में ढालता है
कूटबद्धता (Encoding) विचार को शब्द, चित्र या संकेत में बदलना
संदेश (Message) भेजी जाने वाली सूचना या विचार
माध्यम / चैनल संदेश का वाहक: वायु-तरंगें, कागज़, इंटरनेट, टेलीविज़न
प्राप्तकर्ता (Receiver) संदेश ग्रहण करने वाला
विकूटन (Decoding) संकेतों से अर्थ निकालना
प्रतिपुष्टि (Feedback) प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया; इससे प्रक्रिया द्वि-मार्गी या चक्रीय बनती है
शोर (Noise) अर्थ-ग्रहण में बाधा डालने वाला कोई भी तत्त्व: भौतिक, मनोवैज्ञानिक या अर्थगत
संदर्भ (Context) परिस्थिति: भौतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक

प्रभावी संप्रेषण की विशेषताएँ

  • स्पष्टता, शुद्धता और संक्षिप्तता; अनावश्यक विस्तार से बचाव।
  • द्वि-मार्गी प्रवाह: प्रतिपुष्टि का अवसर।
  • प्राप्तकर्ता-केंद्रित: भाषा, स्तर, रुचि और संस्कृति के अनुरूप।
  • समयबद्धता और प्रासंगिकता।
  • सहानुभूति और सक्रिय श्रवण।
  • सुसंगतता: मौखिक और अमौखिक संकेतों में मेल।

📌 7 C: प्रभावी संप्रेषण के सात गुण

Clear (स्पष्ट), Concise (संक्षिप्त), Concrete (ठोस), Correct (शुद्ध), Coherent (संगत), Complete (पूर्ण), Courteous (शिष्ट)।

संप्रेषण के मॉडल (Models of Communication)

मॉडल प्रवर्तक / वर्ष प्रमुख बिंदु
अरस्तू का मॉडल अरस्तू (लगभग 300 ई.पू.), ‘रेटॉरिक’ वक्ता → भाषण → श्रोता; एकरेखीय; अनुनय पर बल; ethos, pathos, logos
लासवेल का सूत्र हैरल्ड लासवेल (1948) Who says What in Which channel to Whom with What effect; जनसंचार के विश्लेषण का सूत्र
शैनन–वीवर (गणितीय) मॉडल क्लॉड शैनन व वॉरेन वीवर (1949) स्रोत → प्रेषित्र → संकेत → शोर → ग्राही → गंतव्य; एकरेखीय; मूलतः टेलीफ़ोन-संचार के लिए
बर्लो का SMCR मॉडल डेविड बर्लो (1960) Source–Message–Channel–Receiver; स्रोत और प्राप्तकर्ता के कौशल, दृष्टिकोण, ज्ञान, सामाजिक व्यवस्था और संस्कृति पर बल
श्रैम का मॉडल विल्बर श्रैम (1954) अनुभव-क्षेत्र (Field of Experience): साझा अनुभव के बिना संप्रेषण कठिन
ऑसगुड–श्रैम (वृत्ताकार) मॉडल चार्ल्स ऑसगुड व श्रैम (1954) चक्रीय; हर सहभागी एनकोडर, डिकोडर और इंटरप्रेटर; प्रतिपुष्टि पर बल
न्यूकॉम्ब का ABX मॉडल थिओडोर न्यूकॉम्ब (1953) A, B (व्यक्ति) और X (विषय) में संतुलन की प्रवृत्ति
डान्स का सर्पिल (Helical) मॉडल फ्रैंक डान्स (1967) संप्रेषण सर्पिल की तरह लगातार विकसित होता है, पूर्व अनुभव से प्रभावित
वेस्टले–मैकलीन मॉडल 1957 जनसंचार में द्वारपाल (Gatekeeper) की भूमिका
द्वि-चरणीय प्रवाह (Two-step Flow) लैज़र्सफ़ील्ड व कैट्ज़ (1944/55) जनमाध्यम → विचार-नेता (Opinion Leaders) → जनसाधारण
हाइपोडर्मिक सुई / गोली सिद्धांत 1930-40 का दशक माध्यम का प्रभाव सीधा और शक्तिशाली; दर्शक निष्क्रिय (बाद में आलोचित)
संप्रेषण के मॉडल: लासवेल, शैनन-वीवर, बर्लो रैखिक और ऑसगुड-श्रैम चक्रीय मॉडल की तुलना

📌 रैखिक बनाम चक्रीय

रैखिक (Linear): अरस्तू, लासवेल, शैनन–वीवर, बर्लो; प्रतिपुष्टि नहीं या सीमित। चक्रीय / लेन-देन (Transactional): ऑसगुड–श्रैम, डान्स का सर्पिल; प्रतिपुष्टि लगातार, दोनों पक्ष एक साथ प्रेषक और प्राप्तकर्ता।

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संप्रेषण के प्रकार

(क) सहभागियों की संख्या के आधार पर

प्रकार आशय उदाहरण
अंतःवैयक्तिक (Intrapersonal) स्वयं से संवाद: चिंतन, आत्म-संवाद डायरी लिखना, निर्णय पर विचार
अंतर-वैयक्तिक (Interpersonal) दो व्यक्तियों के बीच आमने-सामने शिक्षक-छात्र वार्ता, साक्षात्कार
समूह (Group) छोटे समूह में बहु-दिशात्मक संवाद सेमिनार, समिति-बैठक
सार्वजनिक (Public) एक वक्ता और बड़ा श्रोता-समूह व्याख्यान, भाषण
जनसंचार (Mass) माध्यमों से विशाल, विषम और अनाम जनसमूह तक समाचार-पत्र, रेडियो, टीवी, सोशल मीडिया
संगठनात्मक (Organizational) संस्था के भीतर औपचारिक या अनौपचारिक संवाद परिपत्र, ज्ञापन, बैठक

(ख) प्रवाह की दिशा के आधार पर (संगठन में)

प्रकार दिशा उदाहरण
अधोगामी (Downward) ऊपर से नीचे आदेश, नीति, निर्देश
ऊर्ध्वगामी (Upward) नीचे से ऊपर रिपोर्ट, सुझाव, शिकायत
क्षैतिज (Horizontal) समान स्तर पर विभागों के बीच समन्वय
विकर्ण (Diagonal) अलग विभाग और अलग स्तर परियोजना-टीम

(ग) औपचारिकता के आधार पर

  • औपचारिक: संगठन-संरचना से तय चैनल; अभिलेख-युक्त।
  • अनौपचारिक: व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित। ग्रेपवाइन (Grapevine) अफ़वाह या गपशप का अनौपचारिक तंत्र है; कीथ डेविस ने ‘क्लस्टर चेन’ को सबसे सामान्य बताया।
  • औपचारिक नेटवर्क पैटर्न: चेन, पहिया (Wheel), वृत्त (Circle), Y-पैटर्न और सर्व-चैनल (All-channel)।

💡 तुलना

पहिया (Wheel): केंद्रीकृत, तेज़ निर्णय, पर संतुष्टि कम। सर्व-चैनल (All-channel): सबसे अधिक सहभागिता और संतुष्टि, पर धीमा।

मौखिक और अमौखिक संप्रेषण

पक्ष मौखिक (Verbal) अमौखिक (Non-verbal)
माध्यम बोले या लिखे गए शब्द हाव-भाव, मुद्रा, स्वर, दूरी, वेशभूषा
प्रकार मौखिक (बोलचाल), लिखित (पत्र, ईमेल) कायिक, पराभाषिक, समीपता, समय, स्पर्श
विशेषता स्पष्ट, लिखित रूप में अभिलेख-योग्य प्रायः अचेतन; भावनाओं का वाहक
सीमा अर्थ-भ्रम, भाषा-बाधा संस्कृति के अनुसार अलग व्याख्या

अमौखिक संप्रेषण के रूप

शाखा अध्ययन-क्षेत्र प्रमुख विद्वान
काइनेसिक्स (Kinesics) शारीरिक गति, मुद्रा, चेहरे के भाव, हाव-भाव रे बर्डव्हिस्टल
प्रॉक्सेमिक्स (Proxemics) व्यक्तिगत स्थान और दूरी का प्रयोग एडवर्ड हॉल (1966)
हैप्टिक्स (Haptics) स्पर्श-संप्रेषण —
क्रोनेमिक्स (Chronemics) समय का संप्रेषणात्मक प्रयोग (समय-पालन) —
पराभाषा (Paralanguage) स्वर-स्तर, गति, बल, विराम, लय जॉर्ज ट्रेगर
ऑक्यूलेसिक्स (Oculesics) नेत्र-संपर्क —
कलाकृति (Artifacts) वेशभूषा, आभूषण, रंग, कार्यालय-सज्जा —

एडवर्ड हॉल के चार दूरी-क्षेत्र

क्षेत्र लगभग दूरी उपयोग
अंतरंग (Intimate) 18 इंच तक निकट संबंध: परिवार, घनिष्ठ मित्र
व्यक्तिगत (Personal) 18 इंच से 4 फुट मित्रों से बातचीत
सामाजिक (Social) 4 से 12 फुट औपचारिक या व्यावसायिक बातचीत
सार्वजनिक (Public) 12 फुट से अधिक व्याख्यान, जन-संबोधन

⚠️ मेहराबियन का 7-38-55 नियम: सावधानी

भावनाओं या मनोवृत्ति के असंगत संदेशों के विशिष्ट प्रयोगों में शब्द 7%, स्वर 38%, शारीरिक भाषा 55% का अनुमान दिया गया। यह सूत्र केवल ऐसे भावनात्मक या असंगत संदेशों के लिए है, सभी संप्रेषण पर लागू नहीं होता। परीक्षा में यही जाल बनता है।

सुनना (Hearing) शारीरिक क्रिया है, जबकि श्रवण (Listening) अर्थ-ग्रहण की सचेत क्रिया है।

श्रवण का प्रकार उद्देश्य
विभेदनात्मक ध्वनियों और संकेतों में अंतर पहचानना
समालोचनात्मक (Critical) तर्क और साक्ष्य का मूल्यांकन
सहानुभूतिपूर्ण (Empathic) वक्ता की भावनाओं को समझना
रसास्वादनात्मक (Appreciative) संगीत, कविता या कथा का आनंद
सूचनात्मक (Informational) तथ्य और ज्ञान ग्रहण करना

अंतर-सांस्कृतिक संप्रेषण (Intercultural Communication)

अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के व्यक्तियों या समूहों के बीच विचार-विनिमय। भाषा, मूल्य, प्रतीक, समय-बोध और अमौखिक संकेतों में अंतर से अर्थ-भ्रम हो सकता है।

सिद्धांत / अवधारणा सार
हॉफ्स्टेडे के सांस्कृतिक आयाम (गीर्ट हॉफ्स्टेडे) शक्ति-दूरी; व्यक्तिवाद बनाम सामूहिकता; पुरुषत्व बनाम स्त्रीत्व; अनिश्चितता-परिहार; दीर्घकालिक बनाम अल्पकालिक अभिमुखता; भोग-विलास बनाम संयम
उच्च-संदर्भ बनाम निम्न-संदर्भ संस्कृति (एडवर्ड हॉल) उच्च-संदर्भ (जापान, भारत, अरब): अर्थ संदर्भ और अमौखिक संकेतों में निहित। निम्न-संदर्भ (अमेरिका, जर्मनी): स्पष्ट शब्दों में
मोनोक्रोनिक बनाम पॉलीक्रोनिक (हॉल) एक समय में एक कार्य और समय-पालन बनाम एक साथ अनेक कार्य और लचीला समय
जातीयता-केंद्रवाद (Ethnocentrism) अपनी संस्कृति को श्रेष्ठ मानकर दूसरों को परखना
रूढ़िबद्ध धारणा (Stereotype) किसी समूह के बारे में सामान्यीकृत मान्यता
सांस्कृतिक आघात (कालेरवो ओबर्ग) नई संस्कृति में ढलने की कठिनाई; चरण: हनीमून, संकट, समायोजन, अनुकूलन
सांस्कृतिक सापेक्षवाद हर संस्कृति को उसके अपने संदर्भ में समझना

💡 अंतर-सांस्कृतिक संप्रेषण में सुझाव

सक्रिय श्रवण; खुला मन; संकेतों के अर्थ की पुष्टि; सरल भाषा और मुहावरों से बचाव; सांस्कृतिक संवेदनशीलता का विकास।

समूह-संप्रेषण (Group Communication)

समूह सामान्य लक्ष्य के लिए आपस में अंतःक्रिया करने वाले दो या अधिक व्यक्ति हैं। समूह-संप्रेषण में सहभागिता, भूमिका, मानक (Norms) और नेतृत्व निर्णायक होते हैं।

टकमैन का समूह-विकास मॉडल (1965; 1977 में पाँचवाँ चरण) आशय
1. गठन (Forming) सदस्य परिचित होते हैं, लक्ष्य स्पष्ट होता है
2. संघर्ष (Storming) मतभेद और नेतृत्व की खींचतान
3. मानकीकरण (Norming) नियम और भूमिकाएँ तय होती हैं
4. निष्पादन (Performing) समूह प्रभावी ढंग से काम करता है
5. समापन (Adjourning) काम पूरा होने पर समूह का विघटन
समूह-संप्रेषण की तकनीक स्वरूप
समूह-चर्चा (Group Discussion) किसी विषय पर परस्पर चर्चा; नेतृत्व, तर्क और श्रवण-कौशल की परख
विचार-मंथन (Brainstorming), एलेक्स ऑसबॉर्न अधिकाधिक विचार; आरंभ में आलोचना निषिद्ध; मात्रा से गुणवत्ता
परिसंवाद (Symposium) एक विषय के अलग-अलग पक्षों पर विशेषज्ञों के संक्षिप्त वक्तव्य
पैनल चर्चा मंच पर विशेषज्ञों की संचालक-निर्देशित चर्चा
वाद-विवाद (Debate) पक्ष-विपक्ष में तर्क-प्रस्तुति
भूमिका-निर्वाह (Role Play) स्थिति-विशेष की जीवंत प्रस्तुति
डेल्फ़ी तकनीक विशेषज्ञों से गुमनाम बहु-चरणीय राय लेकर सहमति बनाना
नाममात्र समूह तकनीक (Nominal Group) व्यक्तिगत विचार → साझा → मतदान; दबदबे से बचाव
अवधारणा आशय
समूह-चिंतन (Groupthink), इर्विंग जेनिस एकमत बनाए रखने की प्रवृत्ति से आलोचनात्मक चिंतन का ह्रास; गलत निर्णय
सामाजिक अकर्मण्यता (Social Loafing) समूह में व्यक्ति का कम प्रयास करना
समूह-ध्रुवीकरण चर्चा के बाद समूह का मत और उग्र हो जाना
समूह-संसक्ति (Cohesion) सदस्यों में आपसी आकर्षण और एकजुटता

कक्षा-संप्रेषण (Classroom Communication)

कक्षा में शिक्षक–विद्यार्थी और विद्यार्थी–विद्यार्थी के बीच अर्थ-निर्माण की लगातार चलने वाली प्रक्रिया। प्रभावी कक्षा-संप्रेषण द्वि-मार्गी, सहभागितापूर्ण और सहायक वातावरण वाला होता है।

पक्ष अपेक्षित व्यवहार
भाषा सरल, स्पष्ट, स्तर के अनुकूल; शब्दावली की व्याख्या
प्रश्न-कौशल खुले और सोचने को प्रेरित करने वाले प्रश्न; प्रतीक्षा-काल (Wait time) देना
प्रतिपुष्टि तत्काल, रचनात्मक, विशिष्ट; दंड-रहित
अमौखिक संकेत नेत्र-संपर्क, मुस्कान, मुद्रा, कक्षा में चलना
श्रवण विद्यार्थी की बात ध्यान से सुनना
तकनीक पावरपॉइंट, वीडियो, LMS; अति-प्रयोग से बचें (कॉग्निटिव लोड)
समावेशन अलग भाषा, क्षमता और पृष्ठभूमि का सम्मान

📌 कक्षा में संप्रेषण-चक्र

शिक्षक (एनकोड) → विषय-वस्तु या माध्यम → विद्यार्थी (डिकोड) → प्रतिपुष्टि (प्रश्न या प्रतिक्रिया) → शिक्षक द्वारा समायोजन। प्रभावशीलता का मापदंड यह है कि विद्यार्थी ने क्या समझा, यह नहीं कि शिक्षक ने क्या कहा।

शिक्षण से जुड़े अन्य बिंदु (विधियाँ, शिक्षक के गुण, मूल्यांकन) इकाई 1: Teaching Aptitude Notes में हैं।

संप्रेषण की बाधाएँ (Barriers to Communication)

वर्ग उदाहरण निवारण
भौतिक / पर्यावरणीय शोर, दूरी, खराब प्रकाश, कमज़ोर नेटवर्क उपयुक्त स्थान, तकनीकी साधन
भाषागत / शब्दार्थगत कठिन शब्द, अस्पष्टता, बहु-अर्थक शब्द, तकनीकी जार्गन सरल भाषा, उदाहरण
मनोवैज्ञानिक पूर्वाग्रह, भावावेश, भय, अरुचि, ध्यान की कमी सहानुभूति, विश्वास-निर्माण
सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़िबद्ध धारणाएँ, जातीयता-केंद्रवाद, लिंग-भेद सांस्कृतिक संवेदनशीलता
संगठनात्मक लंबी पदानुक्रम-श्रृंखला, अनौपचारिक चैनल का अभाव खुला संवाद, चैनल का सरलीकरण
तकनीकी संचार-साधन की त्रुटि, सूचना-अतिभार (Information Overload) उचित माध्यम का चयन
श्रवण-संबंधी चयनात्मक श्रवण, पूर्व-निर्णय सक्रिय श्रवण
निस्पंदन (Filtering) संदेश को ऊपर जाते समय छानना या विकृत करना पारदर्शिता, प्रतिपुष्टि
संप्रेषण की बाधाओं के प्रकार: भौतिक, भाषागत, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक-सांस्कृतिक, संगठनात्मक, तकनीकी और श्रवण-संबंधी

जोहारी विंडो (Johari Window): जोसेफ़ लफ़्ट व हैरी इंगम (1955)

स्वयं को ज्ञात स्वयं को अज्ञात
दूसरों को ज्ञात खुला क्षेत्र (Open / Arena) अंध क्षेत्र (Blind Spot)
दूसरों को अज्ञात छिपा क्षेत्र (Facade / Hidden) अज्ञात क्षेत्र (Unknown)

प्रभावी संप्रेषण में खुला क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास किया जाता है: स्वयं-प्रकटीकरण से छिपा क्षेत्र घटता है और प्रतिपुष्टि लेने से अंध क्षेत्र घटता है।

जनसंचार माध्यम और समाज (Mass Media & Society)

जनसंचार में तकनीकी माध्यमों से एक साथ विशाल, विजातीय और बिखरे श्रोता-समूह तक संदेश पहुँचाया जाता है। इसकी विशेषताएँ हैं: सार्वजनिक संदेश, विशाल पहुँच, सीमित या विलंबित प्रतिपुष्टि (पारंपरिक माध्यमों में), संस्थागत स्रोत और द्वारपालन (Gatekeeping)।

माध्यम वर्ग प्रमुख लक्षण
मुद्रित (Print) समाचार-पत्र, पत्रिका, पुस्तक स्थायी अभिलेख, गहराई, साक्षरता आवश्यक
रेडियो श्रव्य सस्ता, ग्रामीण और निरक्षर तक पहुँच; सामुदायिक रेडियो
टेलीविज़न दृश्य-श्रव्य सबसे अधिक प्रभाव-क्षमता; मनोरंजन और सूचना
फ़िल्म / सिनेमा दृश्य-श्रव्य जन-भावना और संस्कृति पर प्रभाव
डिजिटल / नवीन मीडिया वेबसाइट, सोशल मीडिया, पॉडकास्ट, OTT द्वि-मार्गी, तत्काल, उपयोगकर्ता-जनित सामग्री

जनसंचार के प्रमुख सिद्धांत

सिद्धांत प्रवर्तक सार
माध्यम ही संदेश है; वैश्विक ग्राम मार्शल मैकलुहान (1964) माध्यम का स्वरूप ही समाज पर प्रभाव डालता है; गर्म बनाम शीतल माध्यम (रेडियो गर्म, टीवी शीतल)
एजेंडा-निर्धारण मैक्कॉम्ब्स व शॉ (1972) मीडिया यह तय करता है कि लोग किस बारे में सोचें
संवर्धन (Cultivation) जॉर्ज जर्बनर टीवी के भारी उपयोग से यथार्थ की धारणा मीडिया-चित्रण जैसी बनना (‘मीन वर्ल्ड सिंड्रोम’)
उपयोग व संतुष्टि एलिहू कैट्ज़ आदि दर्शक सक्रिय है; अपनी आवश्यकता के अनुसार माध्यम चुनता है
मौन का सर्पिल एलिज़ाबेथ नोएल-न्यूमान (1974) अल्पमत में होने के भय से लोग मत व्यक्त नहीं करते
द्वारपाल (Gatekeeping) कर्ट लेविन; डेविड मैनिंग व्हाइट (1950) संपादक या नीति तय करती है कि कौन-सी सूचना जनता तक पहुँचे
ज्ञान-अंतराल परिकल्पना टिचेनर, डोनोह्यू, ओलियन (1970) सूचना-समृद्ध और सूचना-निर्धन के बीच अंतर बढ़ता है
सामाजिक उत्तरदायित्व सिद्धांत हचिन्स आयोग (1947) स्वतंत्र प्रेस के साथ उत्तरदायित्व भी

भारत में जनसंचार: ऐतिहासिक और संस्थागत पक्ष

विषय तथ्य
पहला समाचार-पत्र ‘हिकीज़ बंगाल गज़ट’ (1780)
हिंदी का प्रथम समाचार-पत्र ‘उदंत मार्तंड’ (1826, कलकत्ता; संपादक जुगल किशोर शुक्ल)
ऑल इंडिया रेडियो यह नाम 1936 से; ‘आकाशवाणी’ नाम 1956 से
दूरदर्शन प्रयोगात्मक प्रसारण 15 सितंबर 1959; नियमित प्रसारण 1965; रंगीन प्रसारण 1982 (एशियाई खेल)
प्रसार भारती अधिनियम 1990; गठन 1997 में; AIR और दूरदर्शन की स्वायत्त संस्था
भारतीय प्रेस परिषद (PCI) वर्तमान रूप प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के अंतर्गत (पहले 1966 में स्थापित); प्रेस की स्वतंत्रता और नैतिक मानकों की रक्षा
CBFC सिनेमैटोग्राफ़ अधिनियम, 1952 के अंतर्गत फ़िल्मों का प्रमाणन
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) भारत सरकार की नोडल सूचना एजेंसी
समाचार-पत्र पंजीयक (RNI) समाचार-पत्रों का पंजीकरण; प्रेस और आवधिक पत्रिका पंजीकरण अधिनियम, 2023 ने 1867 के पुराने अधिनियम की जगह ली
TRAI दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (1997)
सामुदायिक रेडियो सामुदायिक रेडियो नीति, 2006: शैक्षिक संस्थाओं और NGO को स्टेशन की अनुमति
अनुच्छेद 19(1)(क) वाक्-स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता; प्रेस की स्वतंत्रता इसी में निहित; 19(2) में युक्तियुक्त निर्बंधन
IT नियम, 2021 मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार-संहिता: सोशल मीडिया मध्यवर्तियों और डिजिटल समाचार/OTT पर दायित्व

⚠️ सावधानी

मीडिया-विनियमन (प्रसारण और डिजिटल) पर नए कानून या मसौदे समय-समय पर आते हैं। परीक्षा से पहले PIB या मंत्रालय की अधिसूचना से नवीनतम स्थिति जाँच लें।

समाज पर जनमाध्यमों के प्रभाव

सकारात्मक नकारात्मक
सूचना और शिक्षा का प्रसार; जागरूकता फेक न्यूज़, अफ़वाह, डीपफेक; भ्रामक सूचना (Misinformation) और दुष्प्रचार (Disinformation)
लोकतांत्रिक सहभागिता; प्रहरी की भूमिका पेड न्यूज़, सनसनीखेज़ पत्रकारिता, मीडिया-ट्रायल
सांस्कृतिक आदान-प्रदान उपभोक्तावाद, सांस्कृतिक अतिक्रमण
हाशिये की आवाज़ को मंच निजता का हनन, साइबर-बुलिंग, स्क्रीन-लत

मीडिया-साक्षरता (Media Literacy) माध्यम-संदेशों तक पहुँचने, उनका विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजन करने की क्षमता है। तथ्य-जाँच के चरण: स्रोत जाँचें, लेखक या संस्था देखें, अन्य विश्वसनीय स्रोतों से मिलान करें, तिथि और संदर्भ देखें, चित्र या वीडियो की रिवर्स-सर्च करें।

डिजिटल युग में संप्रेषण

  • ईमेल-शिष्टाचार: स्पष्ट विषय-पंक्ति, संक्षिप्त संदेश, उचित संबोधन; To, Cc और Bcc का सही प्रयोग; ‘Reply All’ में सावधानी।
  • वीडियो-कॉन्फ़्रेंसिंग: पृष्ठभूमि, प्रकाश, ध्वनि और म्यूट का अनुशासन; समय-पालन।
  • सोशल मीडिया: द्वि-मार्गी, तात्कालिक, व्यापक पहुँच; डिजिटल पदचिह्न स्थायी; निजता और साइबर-नैतिकता।
  • एआई-सहायित संप्रेषण: चैटबॉट, स्वचालित अनुवाद, पाठ-सारांश; सटीकता की जाँच और ज़िम्मेदार उपयोग ज़रूरी।
  • नेटिकेट (Netiquette): ऑनलाइन शिष्ट व्यवहार; सहमति के बिना किसी की निजी जानकारी साझा न करें।
पारंपरिक मीडिया डिजिटल / नवीन मीडिया
एकतरफ़ा, संपादक-नियंत्रित द्वि-मार्गी, उपयोगकर्ता-जनित
निश्चित समय-सारणी ऑन-डिमांड, 24×7
लागत अधिक प्रवेश की बाधा बहुत कम
सत्यापन-प्रणाली मज़बूत सत्यापन चुनौतीपूर्ण

ईमेल, इंटरनेट और डिजिटल पहलों की तकनीकी बातें इकाई 8: ICT Notes in Hindi में हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति और परीक्षा के जाल

विषय याद रखने योग्य
मॉडल लासवेल (5 प्रश्न), शैनन–वीवर (शोर), बर्लो (SMCR), ऑसगुड–श्रैम (चक्रीय), डान्स (सर्पिल)
अमौखिक काइनेसिक्स, प्रॉक्सेमिक्स (हॉल: 18 इंच, 4 फुट, 12 फुट), पराभाषा, क्रोनेमिक्स
अंतर-सांस्कृतिक हॉफ्स्टेडे के आयाम; उच्च/निम्न-संदर्भ (हॉल)
जनमाध्यम मैकलुहान, एजेंडा-निर्धारण, संवर्धन, उपयोग-संतुष्टि, मौन का सर्पिल
संस्थाएँ PCI (प्रेस), CBFC (फ़िल्म), प्रसार भारती (1997), TRAI

⚠️ परीक्षा के आम जाल

  • लासवेल और शैनन–वीवर दोनों रैखिक हैं; चक्रीय मॉडल ऑसगुड–श्रैम और डान्स का सर्पिल हैं।
  • शोर (Noise) की अवधारणा शैनन–वीवर के मॉडल से जुड़ी है।
  • मेहराबियन का 7-38-55 केवल भावनात्मक या असंगत संदेशों के लिए है।
  • उपयोग-संतुष्टि में दर्शक सक्रिय है; निष्क्रिय दर्शक की धारणा हाइपोडर्मिक सुई सिद्धांत की है।
  • एडवर्ड हॉल: दूरी-क्षेत्र (प्रॉक्सेमिक्स) और उच्च/निम्न-संदर्भ संस्कृति दोनों उन्हीं के हैं; हॉफ्स्टेडे के आयाम अलग हैं।
  • प्रसार भारती: अधिनियम 1990, गठन 1997।

Communication MCQ in Hindi (UGC NET पैटर्न, उत्तर और व्याख्या सहित)

इनमें सीधे प्रश्नों के साथ बहु-कथन, कथन I-कथन II, अभिकथन-कारण, सुमेलित और कालक्रम वाले प्रश्न भी हैं, जैसे UGC NET में आते हैं। पहले उत्तर सोचें, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक करें।

प्रश्न 1. ‘Who says what in which channel to whom with what effect’ यह संप्रेषण-सूत्र किसका है?

  • (क) शैनन–वीवर
  • (ख) बर्लो
  • (ग) लासवेल
  • (घ) ऑसगुड
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✅ उत्तर: (ग) लासवेल. यह हैरल्ड लासवेल (1948) का सूत्र है, जिससे जनसंचार का विश्लेषण किया जाता है। शैनन–वीवर का मॉडल ‘शोर’ के लिए प्रसिद्ध है और बर्लो का SMCR है।

प्रश्न 2. संप्रेषण के मॉडलों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

(A) शैनन–वीवर मॉडल एकरेखीय (रैखिक) है।

(B) ऑसगुड–श्रैम मॉडल चक्रीय है।

(C) लासवेल का सूत्र प्रतिपुष्टि को केंद्रीय तत्त्व मानता है।

(D) बर्लो के SMCR में S, M, C, R का अर्थ स्रोत, संदेश, चैनल और प्राप्तकर्ता है।

  • (क) केवल (A) और (B)
  • (ख) केवल (A), (B) और (D)
  • (ग) केवल (B), (C) और (D)
  • (घ) (A), (B), (C) और (D) सभी
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ख) केवल (A), (B) और (D). (A), (B) और (D) सही हैं। (C) गलत है: लासवेल का सूत्र रैखिक है और उसमें प्रतिपुष्टि केंद्रीय तत्त्व नहीं है।

प्रश्न 3. “माध्यम ही संदेश है” (Medium is the Message) किसका कथन है?

  • (क) मार्शल मैकलुहान
  • (ख) वेस्टले
  • (ग) लासवेल
  • (घ) जर्बनर
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✅ उत्तर: (क) मार्शल मैकलुहान. मार्शल मैकलुहान ने 1964 में Understanding Media में यह कहा, और ‘वैश्विक ग्राम’ (Global Village) की अवधारणा भी उन्हीं की है।

प्रश्न 4. कथन I: एडवर्ड हॉल के अनुसार 4 से 12 फुट की दूरी ‘सामाजिक’ क्षेत्र की मानी जाती है। कथन II: मेहराबियन का 7-38-55 नियम सभी प्रकार के संप्रेषण पर लागू होता है।

  • (क) कथन I और II दोनों सही हैं
  • (ख) कथन I सही, कथन II गलत है
  • (ग) कथन I गलत, कथन II सही है
  • (घ) कथन I और II दोनों गलत हैं
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✅ उत्तर: (ख) कथन I सही, कथन II गलत है. कथन I सही है: अंतरंग (18 इंच तक), व्यक्तिगत (18 इंच–4 फुट), सामाजिक (4–12 फुट), सार्वजनिक (12 फुट से अधिक)। कथन II गलत है: यह अनुपात केवल भावनाओं या मनोवृत्ति के असंगत संदेशों वाले प्रयोगों के लिए है।

प्रश्न 5. सूची I (अमौखिक संप्रेषण की शाखा) को सूची II (अध्ययन-क्षेत्र) से सुमेलित कीजिए:

सूची I सूची II
(A) काइनेसिक्स (I) स्वर का उतार-चढ़ाव, गति और बल
(B) प्रॉक्सेमिक्स (II) शारीरिक गति और हाव-भाव
(C) पराभाषा (III) समय का संप्रेषणात्मक प्रयोग
(D) क्रोनेमिक्स (IV) व्यक्तिगत स्थान और दूरी का प्रयोग
  • (क) A-I, B-II, C-III, D-IV
  • (ख) A-II, B-IV, C-I, D-III
  • (ग) A-II, B-I, C-IV, D-III
  • (घ) A-IV, B-II, C-III, D-I
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ख) A-II, B-IV, C-I, D-III. काइनेसिक्स = शारीरिक गति और हाव-भाव (II); प्रॉक्सेमिक्स = स्थान या दूरी (IV), एडवर्ड हॉल; पराभाषा = स्वर की विशेषताएँ (I); क्रोनेमिक्स = समय का प्रयोग (III)।

प्रश्न 6. जनमाध्यमों के संदर्भ में ‘एजेंडा-निर्धारण सिद्धांत’ के प्रवर्तक हैं:

  • (क) हॉफ्स्टेडे
  • (ख) न्यूकॉम्ब
  • (ग) जॉन डिवी
  • (घ) मैक्कॉम्ब्स और शॉ
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (घ) मैक्कॉम्ब्स और शॉ. मैक्सवेल मैक्कॉम्ब्स और डोनाल्ड शॉ (1972): मीडिया यह तय करता है कि लोग किस बारे में सोचें।

प्रश्न 7. अभिकथन (A): शैनन–वीवर मॉडल को रैखिक मॉडल कहा जाता है। कारण (R): इसमें संदेश स्रोत से गंतव्य की ओर एक ही दिशा में चलता है और प्रतिपुष्टि का स्पष्ट तत्त्व नहीं है।

  • (क) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  • (ख) (A) और (R) दोनों सही हैं, पर (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  • (ग) (A) सही है, पर (R) गलत है
  • (घ) (A) गलत है, पर (R) सही है
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (क) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है. शैनन–वीवर (1949) में स्रोत → प्रेषित्र → संकेत (शोर के साथ) → ग्राही → गंतव्य का एकदिशीय प्रवाह है। इसी कारण यह रैखिक है, इसलिए (R), (A) की सही व्याख्या है।

प्रश्न 8. जोहारी विंडो में ‘दूसरों को ज्ञात, पर स्वयं को अज्ञात’ क्षेत्र कहलाता है:

  • (क) खुला क्षेत्र
  • (ख) अंध क्षेत्र
  • (ग) छिपा क्षेत्र
  • (घ) अज्ञात क्षेत्र
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ख) अंध क्षेत्र. यह अंध क्षेत्र (Blind Spot) है। खुला क्षेत्र दोनों को ज्ञात है, छिपा क्षेत्र केवल स्वयं को ज्ञात है, और अज्ञात क्षेत्र किसी को ज्ञात नहीं।

प्रश्न 9. निम्नलिखित घटनाओं को कालक्रम (पहले से बाद) में व्यवस्थित कीजिए:

(A) ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन

(B) ऑल इंडिया रेडियो को ‘आकाशवाणी’ नाम मिलना

(C) ‘हिकीज़ बंगाल गज़ट’ का प्रकाशन

(D) प्रसार भारती का गठन

  • (क) (C), (A), (B), (D)
  • (ख) (A), (C), (B), (D)
  • (ग) (C), (A), (D), (B)
  • (घ) (C), (B), (A), (D)
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (क) (C), (A), (B), (D). हिकीज़ बंगाल गज़ट 1780 → उदंत मार्तंड 1826 → ‘आकाशवाणी’ नाम 1956 → प्रसार भारती का गठन 1997।

प्रश्न 10. जनसंचार के सिद्धांतों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

(A) जर्बनर का संवर्धन (Cultivation) सिद्धांत टीवी के भारी उपयोग के प्रभाव से जुड़ा है।

(B) नोएल-न्यूमान का ‘मौन का सर्पिल’ अल्पमत में होने के भय से जुड़ा है।

(C) ‘उपयोग और संतुष्टि’ सिद्धांत में दर्शक को सक्रिय माना गया है।

(D) ‘उपयोग और संतुष्टि’ सिद्धांत में दर्शक को पूरी तरह निष्क्रिय माना गया है।

  • (क) केवल (A) और (B)
  • (ख) केवल (A), (B) और (C)
  • (ग) केवल (B), (C) और (D)
  • (घ) (A), (B), (C) और (D) सभी
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ख) केवल (A), (B) और (C). (A), (B) और (C) सही हैं। (D) गलत है: उपयोग-संतुष्टि सिद्धांत में दर्शक सक्रिय है और अपनी आवश्यकता के अनुसार माध्यम चुनता है। निष्क्रिय दर्शक की धारणा हाइपोडर्मिक सुई सिद्धांत की है।

प्रश्न 11. प्रसार भारती का गठन किस वर्ष हुआ?

  • (क) 1990
  • (ख) 1997
  • (ग) 2002
  • (घ) 2006
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ख) 1997. प्रसार भारती अधिनियम 1990 में पारित हुआ, पर निगम का गठन 1997 में हुआ। यह AIR और दूरदर्शन की स्वायत्त संस्था है।

प्रश्न 12. समूह-चिंतन (Groupthink) की अवधारणा किसने दी?

  • (क) टकमैन
  • (ख) एलेक्स ऑसबॉर्न
  • (ग) इर्विंग जेनिस
  • (घ) डेविड बर्लो
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ग) इर्विंग जेनिस. इर्विंग जेनिस ने बताया कि एकमत बनाए रखने की प्रवृत्ति से आलोचनात्मक चिंतन कम हो जाता है। टकमैन समूह-विकास (Forming, Storming आदि) और ऑसबॉर्न विचार-मंथन से जुड़े हैं।

प्रश्न 13. सूची I (संस्था) को सूची II (कार्य) से सुमेलित कीजिए:

सूची I सूची II
(A) भारतीय प्रेस परिषद (PCI) (I) सिनेमैटोग्राफ़ अधिनियम, 1952 के अंतर्गत फ़िल्म-प्रमाणन
(B) CBFC (II) प्रेस की स्वतंत्रता और नैतिक मानकों की रक्षा
(C) प्रसार भारती (III) AIR और दूरदर्शन की स्वायत्त संस्था
(D) TRAI (IV) दूरसंचार का विनियमन
  • (क) A-I, B-II, C-III, D-IV
  • (ख) A-II, B-III, C-I, D-IV
  • (ग) A-II, B-I, C-III, D-IV
  • (घ) A-II, B-I, C-IV, D-III
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ग) A-II, B-I, C-III, D-IV. PCI प्रेस की स्वतंत्रता और नैतिक मानकों की रक्षा करती है (II); CBFC फ़िल्म-प्रमाणन करता है (I); प्रसार भारती AIR और दूरदर्शन की स्वायत्त संस्था है (III); TRAI दूरसंचार का विनियामक है (IV)।

प्रश्न 14. ‘सूचना-अतिभार’ (Information Overload) संप्रेषण की किस श्रेणी की बाधा है?

  • (क) भौतिक बाधा
  • (ख) तकनीकी बाधा
  • (ग) सांस्कृतिक बाधा
  • (घ) भाषागत बाधा
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ख) तकनीकी बाधा. सूचना की मात्रा ग्रहण-क्षमता से अधिक हो जाने पर संप्रेषण बाधित होता है; इसे तकनीकी बाधाओं में गिना जाता है।

प्रश्न 15. अभिकथन (A): मेहराबियन का 7-38-55 नियम सभी प्रकार के संप्रेषण पर लागू होता है। कारण (R): यह अनुपात भावनाओं या मनोवृत्ति के असंगत संदेशों वाले विशिष्ट प्रयोगों पर आधारित है।

  • (क) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  • (ख) (A) सही है, पर (R) गलत है
  • (ग) (A) गलत है, पर (R) सही है
  • (घ) (A) और (R) दोनों गलत हैं
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ग) (A) गलत है, पर (R) सही है. (R) सही है: शब्द 7%, स्वर 38% और शारीरिक भाषा 55% का अनुमान केवल भावनात्मक या असंगत संदेशों के प्रयोगों में मिला। इसलिए (A) गलत है, क्योंकि इसे सभी संप्रेषण पर लागू नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 16. व्यक्तिवाद बनाम सामूहिकता और शक्ति-दूरी जैसे सांस्कृतिक आयामों का प्रतिपादन किसने किया?

  • (क) एडवर्ड हॉल
  • (ख) गीर्ट हॉफ्स्टेडे
  • (ग) कालेरवो ओबर्ग
  • (घ) फ्रैंक डान्स
👉 उत्तर देखें

✅ उत्तर: (ख) गीर्ट हॉफ्स्टेडे. गीर्ट हॉफ्स्टेडे ने शक्ति-दूरी, व्यक्तिवाद-सामूहिकता, पुरुषत्व-स्त्रीत्व, अनिश्चितता-परिहार आदि आयाम दिए। एडवर्ड हॉल उच्च/निम्न-संदर्भ संस्कृति से और ओबर्ग सांस्कृतिक आघात से जुड़े हैं।

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ई-बुक की इकाई 1 (शिक्षण अभिवृत्ति) पूरी मुफ़्त है: 30 पन्ने, 40 अभ्यास प्रश्न। इसी ढाँचे में संप्रेषण के नोट्स ई-बुक में हैं।

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संप्रेषण की तैयारी कैसे करें? (5 दिन की योजना)

दिन क्या पढ़ें
दिन 1 अर्थ, परिभाषाएँ, तत्त्व और सभी मॉडल (तुलना तालिका बनाएँ)
दिन 2 संप्रेषण के प्रकार, मौखिक-अमौखिक, हॉल के दूरी-क्षेत्र
दिन 3 अंतर-सांस्कृतिक, समूह और कक्षा-संप्रेषण, बाधाएँ, जोहारी विंडो
दिन 4 जनसंचार के सिद्धांत, भारत की संस्थाएँ और तिथियाँ, डिजिटल संप्रेषण
दिन 5 16 MCQ दोबारा हल करें, गलत हुए प्रश्नों का रिवीज़न, एक मॉक टेस्ट

UGC NET Paper 1 Notes in Hindi: पूरी ई-बुक

संप्रेषण के विस्तृत नोट्स, माइंड मैप और अभ्यास प्रश्न सभी 10 इकाइयों की ई-बुक (247 पन्ने, Hindi Medium) में हैं।

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संप्रेषण से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

❓ UGC NET Paper 1 में संप्रेषण (Communication) क्या है?

संप्रेषण UGC NET Paper 1 की इकाई 4 है। इसमें संप्रेषण का अर्थ, तत्त्व और मॉडल, मौखिक-अमौखिक, अंतर-सांस्कृतिक, समूह और कक्षा-संप्रेषण, संप्रेषण की बाधाएँ तथा जनसंचार माध्यम और समाज पढ़े जाते हैं।

❓ UGC NET में संप्रेषण से कितने प्रश्न आते हैं?

Paper 1 की 10 इकाइयों से कुल 50 प्रश्न आते हैं, इसलिए संप्रेषण से सामान्यतः लगभग 5 प्रश्न (10 अंक) आते हैं।

❓ संप्रेषण के मुख्य तत्त्व कौन-से हैं?

प्रेषक (स्रोत), संदेश, माध्यम (चैनल), प्राप्तकर्ता और प्रतिपुष्टि। इनके साथ कूटबद्धता (Encoding), विकूटन (Decoding), शोर (Noise) और संदर्भ भी प्रक्रिया के हिस्से हैं।

❓ लासवेल का संप्रेषण सूत्र क्या है?

हैरल्ड लासवेल (1948) का सूत्र है: Who says What in Which channel to Whom with What effect, यानी कौन, क्या, किस माध्यम से, किससे और किस प्रभाव के साथ कहता है।

❓ रैखिक और चक्रीय संप्रेषण मॉडल में क्या अंतर है?

रैखिक मॉडल (अरस्तू, लासवेल, शैनन–वीवर, बर्लो) में संदेश एक दिशा में चलता है और प्रतिपुष्टि नहीं या सीमित होती है। चक्रीय या लेन-देन वाले मॉडल (ऑसगुड–श्रैम, डान्स का सर्पिल) में दोनों पक्ष एक साथ प्रेषक और प्राप्तकर्ता होते हैं और प्रतिपुष्टि लगातार चलती है।

❓ मौखिक और अमौखिक संप्रेषण में क्या अंतर है?

मौखिक संप्रेषण में बोले या लिखे गए शब्द माध्यम होते हैं। अमौखिक संप्रेषण में हाव-भाव, मुद्रा, स्वर, दूरी, स्पर्श, समय और वेशभूषा जैसे संकेत होते हैं, जो प्रायः अचेतन होते हैं और भावनाएँ बताते हैं।

❓ एडवर्ड हॉल के चार दूरी-क्षेत्र कौन-से हैं?

अंतरंग (18 इंच तक), व्यक्तिगत (18 इंच से 4 फुट), सामाजिक (4 से 12 फुट) और सार्वजनिक (12 फुट से अधिक)। इसे प्रॉक्सेमिक्स कहते हैं।

❓ संप्रेषण की प्रमुख बाधाएँ कौन-सी हैं?

भौतिक, भाषागत, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक-सांस्कृतिक, संगठनात्मक, तकनीकी और श्रवण-संबंधी बाधाएँ। सूचना-अतिभार और संदेश का निस्पंदन (Filtering) भी इनमें गिने जाते हैं।

❓ जोहारी विंडो क्या है?

जोसेफ़ लफ़्ट और हैरी इंगम (1955) का मॉडल, जो स्वयं और दूसरों को ज्ञात या अज्ञात बातों के आधार पर चार क्षेत्र बताता है: खुला, अंध, छिपा और अज्ञात क्षेत्र। प्रभावी संप्रेषण में खुला क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

❓ एजेंडा-निर्धारण सिद्धांत क्या कहता है?

मैक्कॉम्ब्स और शॉ (1972) के अनुसार मीडिया यह तय नहीं करता कि लोग क्या सोचें, बल्कि यह कि किस बारे में सोचें।

❓ उच्च-संदर्भ और निम्न-संदर्भ संस्कृति में क्या अंतर है?

एडवर्ड हॉल के अनुसार उच्च-संदर्भ संस्कृतियों (जैसे जापान, भारत) में अर्थ का बड़ा भाग संदर्भ और अमौखिक संकेतों में होता है। निम्न-संदर्भ संस्कृतियों (जैसे अमेरिका, जर्मनी) में बात स्पष्ट शब्दों में कही जाती है।

❓ Communication Notes PDF in Hindi कहाँ मिलेंगे?

सभी 10 इकाइयों के हिंदी नोट्स हिंदी साहित्य चैनल की ई-बुक में हैं, जो store.hindisahity.com पर उपलब्ध है। नमूना देखने के लिए इकाई 1 की PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं।

निष्कर्ष

संप्रेषण में अंक वहीं मिलते हैं जहाँ नाम, वर्ष और भेद पक्के हों: मॉडल (रैखिक या चक्रीय), अमौखिक संप्रेषण की शाखाएँ, बाधाओं के प्रकार और जनसंचार के सिद्धांत। इन्हें तालिका से दोहराएँ और बहु-कथन तथा सुमेलित प्रश्नों का अभ्यास करें।

केवल कृष्ण घोड़ेला: हिंदी साहित्य चैनल

✍️ लेखक परिचय

केवल कृष्ण घोड़ेला

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)

हिंदी साहित्य चैनल के संचालक। UGC NET, RPSC और हिंदी साहित्य की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का लंबे समय से मार्गदर्शन कर रहे हैं। इस लेख की जानकारी NTA के पाठ्यक्रम, सरकारी स्रोतों और मानक पुस्तकों के आधार पर तैयार की गई है।

स्रोत: NTA UGC NET, प्रसार भारती, पत्र सूचना कार्यालय (PIB) और मानक पुस्तकें। संस्थाओं और नियमों में बदलाव होते रहते हैं, अंतिम जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोत देखें।

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