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तमस उपन्यास का सारांश | Tamas Upanyas Summary in Hindi by Bhisham Sahni

तमस उपन्यास का सारांश भीष्म साहनी

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 13, 2026

तमस उपन्यास का सारांश: भीष्म साहनी की इस ऐतिहासिक और मार्मिक कृति का संपूर्ण परिचय, कथानक और साहित्यिक विश्लेषण

हिंदी साहित्य जगत में भीष्म साहनी का नाम एक अत्यंत प्रतिष्ठित, संवेदनशील और प्रगतिशील रचनाकार के रूप में लिया जाता है। उनका जन्म 8 अगस्त, 1915 ई. को रावलपिंडी (पाकिस्तान) में हुआ था। उनके द्वारा रचित उपन्यास ‘तमस उपन्यास का सारांश’ (Tamas Upanyas Ka Saransh) उनका सर्वाधिक चर्चित, बहुप्रशंसित और कालजयी उपन्यास है। इस उपन्यास में लेखक ने आजादी से पूर्व 1947 ई. के मार्च-अप्रैल के दौरान हुए भीषण सांप्रदायिक दंगों की कहानी को अत्यंत सजीवता, प्रामाणिकता और मार्मिकता के साथ प्रस्तुत किया है। यह उपन्यास यूजीसी नेट (UGC NET), टीजीटी (TGT), पीजीटी (PGT) और आरपीएससी (RPSC) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य और अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Quick Overview(संक्षिप्त परिचय)

  • उपन्यास का नाम: तमस (Tamas Novel)

  • लेखक: भीष्म साहनी (Bhisham Sahni)

  • प्रकाशन/रचना पृष्ठभूमि: 1947 के भारत विभाजन के समय के सांप्रदायिक दंगे

  • सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार (1975)

  • खंडों की संख्या: दो खंड

  • विशेष उपलब्धि: गोविंद निहलानी द्वारा इस उपन्यास पर प्रसिद्ध दूरदर्शन धारावाहिक का निर्माण किया गया था।

तमस उपन्यास का परिचय एवं रचनाकार भीष्म साहनी का व्यक्तित्व (Bhisham Sahni Tamas Novel)

भीष्म साहनी अपनी आत्मकथा ‘आज के अतीत’ में इस उपन्यास की रचना-प्रक्रिया के बारे में लिखते हैं—

“मुझे ठीक से याद नहीं कि कब बम्बई के निकट, भिवंडी नगर में हिंदू-मुसलमान दंगे हुए। पर मुझे इतना याद है कि उन दंगों के बाद मैंने ‘तमस’ लिखना आरंभ किया था… यह सचमुच अचानक ही हुआ, पर जब कलम उठाई और कागज सामने रखा तो ध्यान रावलपिंडी के दंगों की ओर चला गया। कांग्रेस का दफ्तर आँखों के सामने आया। कांग्रेस के मेरे साथी एक के बाद एक रामनाथ, बख्शीजी, बालीजी, अब्दुल अजीज, मेहरचंद आहुजा, अजीत, जनरैलों, मास्टर अर्जुन दास उनके चेहरे आँखों के सामने घूमने लगे। मैं उन दिनों की यादों में डूबता चला गया।”

  • गोपाल राय के अनुसार: “‘तमस’ उस अंधकार का द्योतक है, जो आदमी की इंसानियत और संवेदना को ढक लेता है और उसे हैवान बना देता है।शैतानी प्रवृत्तियाँ किस प्रकार समाज को जकड़ लेती हैं, इसका सजीव चित्रण इस कृति में मिलता है।”

तमस उपन्यास का कथानक, मूल संवेदना और उद्देश्य (Tamas Theme and Summary in Hindi)

‘तमस’ उपन्यास का सारांश और मूल संवेदना (Tamas Theme): भीष्म साहनी द्वारा रचित यह उपन्यास भारत के विभाजन से ठीक पूर्व वर्ष 1947 के मार्च-अप्रैल के दौरान रावलपिंडी और आसपास के क्षेत्रों में हुए भीषण सांप्रदायिक दंगों की दर्दनाक पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह उपन्यास कुल दो खंडों में विभक्त है, जहाँ पहले खंड में तनाव और दूसरे खंड में व्यापक दंगे व मानवीय त्रासदी दिखाई गई है।

प्रारंभ और साजिश

उपन्यास का आरंभ नत्थू चमार द्वारा सुअर मारने की घटना से होता है। मुराद अली जो अंग्रेजी सरकार का चमचा है, वह नत्थू चमार को पाँच रुपये देकर एक सुअर मरवाता है और उसे मस्जिद की सीढ़ियों पर फिकवा देता है। इस घटना से मुसलमानों में खलबली होती है और उसके प्रतिकारस्वरूप एक गाय भी मार दी जाती है। परिणामतः शहर में भयंकर सांप्रदायिक तनाव फैल जाता है।

मूल संवेदना (Uddeshya)

इसकी मूल संवेदना सांप्रदायिक वैमनस्य, धार्मिक कट्टरता और राजनीतिक स्वार्थ को उजागर करना है। रिचर्ड जैसे अंग्रेज अधिकारी स्थिति का लाभ उठाते हैं, जबकि मुराद अली जैसे स्वार्थी लोग दंगों की भूमिका तैयार करते हैं। इस खूनी संघर्ष में केवल गरीब और मासूम जनता का ही नुकसान होता है।

‘तमस’ उपन्यास के महत्वपूर्ण और प्रमुख पात्र (Tamas Upanyas Characters)

इस उपन्यास में चित्रित परिवेश ही स्वयं उसका नायक बन गया है, क्योंकि किसी एक पारंपरिक व्यक्ति को इस उपन्यास का मुख्य नायक नहीं कहा जा सकता। इसके प्रमुख और विशिष्ट पात्रों की सूची निम्नलिखित है:

  • नत्थू – निम्नवर्गीय पात्र, जाति से चमार, एक भोला-भाला व सीधा आदमी।

  • मुराद अली – अंग्रेजों का दलाल, खलचरित्र, सुअर षड्यंत्र का रचयिता। (अंत में रिलीफ कमेटी की बस से लाउडस्पीकर पकड़े, शांति की अपील भी यही करता है)।

  • बख्शी जी – जिला कांग्रेस कमेटी के सेक्रेटरी।

  • मेहता जी – जिला कांग्रेस कमेटी के सदस्य।

  • मास्टर रामदास – कांग्रेस कमेटी के सदस्य/कार्यकर्ता, कामचोर, स्वार्थ हेतु कांग्रेस से जुड़ाव रखने वाला व्यक्ति।

  • जनरैल सिंह – कांग्रेस के कार्यकर्ता, मानसिक रूप से विक्षिप्त किंतु एक ईमानदार व्यक्ति।

  • रिचर्ड – अंग्रेज अफसर, शहर का डिप्टी कमिश्नर।

  • लीजा – रिचर्ड की पत्नी।

  • वानप्रस्थी जी – धार्मिक व सांप्रदायिक उन्माद फैलाने वाले धर्मगुरु।

  • प्रधान जी (उर्फ लाला लक्ष्मीनारायण) – शहर का बड़ा व्यापारी, वानप्रस्थी जी का प्रमुख चेला।

  • रणवीर – दानवीर प्रधानजी (लक्ष्मीनारायण) का 15 वर्षीय पुत्र, जो ‘युवक समाज’ (हिन्दू बच्चों का एक कट्टर समूह) का नेता है और मुसलमानों के खिलाफ भड़काता है।

  • देवव्रत मास्टर – आर.एस.एस. कार्यकर्ता व अखाड़ा संचालक, जो बच्चों को धर्म के नाम पर लड़ना सिखाता है।

  • हयात बख्श व मौलादाद – मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता।

  • शाहनवाज – शहर का रईस मुसलमान, युवाओं में प्रियदर्शी।

  • रघुनाथ – शाहनवाज का दोस्त, जिसके परिवार को शाहनवाज सुरक्षित ठिकाना देता है।

  • इब्राहिम इत्रफरोश – शिवाले के मोहल्ले के आसपास घूम-घूमकर इत्र बेचने वाला मासूम लड़का, जिसकी हत्या कर दी जाती है।

  • हरनाम सिंह व बंतो – ढोक इलाहीबख्श गाँव का वृद्ध चाय वाला सिख व उसकी पत्नी।

  • प्रकासो – बलवे के दौरान अपने ब्राह्मण माता-पिता से भटकी हुई युवा ब्राह्माणी, जिसे अल्लाह रक्खा अपना लेता है।

  • अन्य पात्र: दत्तः (कम्युनिस्ट पार्टी का कार्यकर्ता), शेरा सिंह, सोहन सिंह, मीरदाद, राजो, अल्लाह रक्खा, किशनसिंह, निहंगसिंह, सरदार तेजासिंह, रमजान और इकबालसिंह आदि।

तमस उपन्यास की महत्वपूर्ण घटनाएँ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • मुराद अली के कहने पर नत्थू द्वारा सुअर को मरवाना और उसे मस्जिद के सामने फेंका जाना।

  • बख्शीजी और उनके कांग्रेस कमेटी के सदस्यों द्वारा प्रभातफेरी एवं मुस्लिम बस्तियों में सफाई कार्य करना।

  • जिले के अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर रिचर्ड एवं उसकी पत्नी लीजा का जीवन तथा भारत के लोगों की नस्ल व संस्कृति पर चर्चा करना।

  • प्रभातफेरी में कांग्रेस कमेटी के सदस्यों पर मुस्लिम बस्ती में पथराव होना तथा बख्शीजी द्वारा तनाव कम करने का प्रयत्न करना।

  • हिंदू लोगों द्वारा दंगा-फसाद के समय की रणनीति तैयार करना तथा अंग्रेज अधिकारी रिचर्ड द्वारा केवल झूठे आश्वासन दिया जाना।

  • हिंदू बहुल इलाकों में मुस्लिमों का तथा मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदुओं का भयानक भय व्याप्त होना।

  • गाँव में सिखों और बलवाइयों के बीच भीषण लड़ाई होना तथा सिख महिलाओं और बच्चों द्वारा अपनी इज्जत बचाने के लिए कुएं में कूदकर जान देना।

  • सोहनसिंह और मीरदाद जैसे समझदार लोगों द्वारा दंगे रुकवाने की पुरजोर कोशिश करना, किंतु अंततः दोनों की हत्या होना।

  • अंततः अंग्रेज सरकार का कड़ा हस्तक्षेप करना और दंगों का शांत होना, तथा रिलीफ कमेटी द्वारा राहत कार्य चलाया जाना।

उपन्यास के प्रमुख कथन और उनके वक्ता(Important Quotes from Tamas)

“यह विचार कि हमारा आचरण हमारी मान्यताओं के अनुरूप होना चाहिए, एक ऐसा मौकापरस्त आदर्शवाद है जिससे सिविल सर्विस में नाम लिखाने में अफसर अपना पिंड छुड़ा लेता है।” — (रिचर्ड)

“कोई भी व्यक्ति अपना व्यवसाय चुनते समय उसके नैतिक पक्ष के बारे में सोचता ही कब है, वह तो केवल निजी लाभ और निजी हित के बारे में ही सोचता है।” — (रिचर्ड)

“बहुत चालाक नहीं बनो, रिचर्ड। मैं सब जानती हूँ। देश के नाम पर लोग तुम्हारे साथ लड़ते है और धर्म के नाम पर तुम इन्हें आपस में लड़ाते हो। क्यों, ठीक है ना?” — (लीजा)

“दुख से छुटकारा पाने के लिए आदमी सबसे पहले औरत की तरफ ही मुड़ता है।” — (नत्थू)

“रणनीति यही कहती है कि निर्णय अविलंब लिया जाना चाहिए। स्थिति को पहचान लेना, उसकी तह तक जा पहुँचना और तत्परता से निर्णय कर लेना नेता के लिए अनिवार्य है।” — (रणवीर)

“घृणा और द्वेष इतनी जल्दी प्रेम और सद्भावना में नहीं बदल सकते, वे केवल भाँडे हास्य और व्यंग्य में ही बदल सकते हैं।” — (इकबालसिंह)

“यह सब हिंदुओं की चालाकी है, बख्शीजी, हम सब जानते हैं। आप चाहें जो कहें, कांग्रेस हिंदुओं की जमात है। कांग्रेस हिंदुओं की जमात है और मुस्लिम लीग मुसलमानों की। कांग्रेस मुसलमानों की रहनुमाई नहीं कर सकती।” — (महमूद)

“बड़ा आसान है, लीजा। मुसलमानों के नामों के अंत में अली, दीन, अहमद, ऐसे-ऐसे शब्द लगे रहते हैं जबकि हिंदुओं के नामों के पीछे ऐसे शब्द जैसे लाल, चंद्र, राम लगे रहते हैं। रोशनलाल होगा तो हिन्दू, रोशनदीन होगा तो मुसलमान, इकबालचंद होगा तो हिन्दू, और जो इकबाल अहमद होगा तो मुसलमान।” — (रिचर्ड)

“हम जाहिल लोग लड़ते हैं, समझदार, खानदानी लोग नहीं लड़ते। यहाँ सभी आए हैं हिन्दू भी, सिख भी, मुसलमान भी; मगर कैसे प्यार-मोहब्बत से बातें कर रहे हैं….” — (लेखक)

“साहिबान, इस तरह हम कोई काम नहीं कर सकेंगे। फिरकावाराना अनासर के खिलाफ हमें लड़ना है। यह जरूरी नहीं कि किसको नुमाइन्दगी मिले, जरूरी यह है कि अमन कमेटी सभी फिरकों की एक मुस्तरका जमात बने, ताकि हम हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई मिलकर एक प्लेटफार्म से अमन की अपील कर सकें।” — (देवदत्त)

“फिसाड करनेवाला भी अंग्रेज, फिसाद रोकनेवाला भी अंग्रेज, भूखों मारनेवाला भी अंग्रेज, रोटी देनेवाला भी अंग्रेज, घर से बेघर करनेवाला भी अंग्रेज, घरों में बसानेवाला भी अंग्रेज….” — (बख्शी जी)

आषाढ़ का एक दिन – सारांश, पात्र, उद्देश्य और प्रश्न

💡 परीक्षार्थियों के लिए विशेष परीक्षा उपयोगी टिप्स (UGC NET / TGT / PGT)

  • 📌 साहित्य अकादमी पुरस्कार: याद रखें कि भीष्म साहनी को इस उपन्यास के लिए 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

  • 🎯 रचना का आधार: यह उपन्यास 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय रावलपिंडी और आसपास के क्षेत्रों में हुए सांप्रदायिक दंगों के कड़वे यथार्थ पर आधारित है।

  • 💡 पात्रों की महत्ता: इसमें किसी एक व्यक्ति को नायक न मानकर पूरे समाज, व्यवस्था और परिवेश को ही कथा के केंद्र में रखा गया है। मुराद अली और नत्थू जैसे पात्र परीक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष:

‘तमस’ केवल एक उपन्यास मात्र नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं के पतन, राजनीतिक षड्यंत्रों और सांप्रदायिक अंधकार का एक सजीव दस्तावेज है। भीष्म साहनी ने इसमें यह बखूबी दिखाया है कि कैसे धर्म की आड़ में आम आदमी को मोहरा बनाया जाता है और राजनीति किस तरह इंसानी खून पर अपनी रोटियां सेकती है। यह कृति हिंदी उपन्यासों में एक मील का पत्थर साबित हुई है।

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## FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. 'तमस' उपन्यास के लेखक कौन हैं और यह किस पृष्ठभूमि पर लिखा गया है?
‘तमस’ उपन्यास के लेखक प्रसिद्ध हिंदी कथाकार भीष्म साहनी हैं। यह उपन्यास भारत के विभाजन से ठीक पूर्व वर्ष 1947 के मार्च-अप्रैल के दौरान हुए भीषण सांप्रदायिक दंगों और राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है।

Q2. भीष्म साहनी को 'तमस' उपन्यास के लिए कौन सा प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला था?
भीष्म साहनी को उनके इस चर्चित उपन्यास ‘तमस’ के लिए वर्ष 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा इस पर प्रसिद्ध फिल्मकार गोविंद निहलानी द्वारा धारावाहिक का निर्माण भी किया गया था।

Q3. 'तमस' उपन्यास की शुरुआत किस मुख्य घटना से होती है?
उपन्यास की शुरुआत नत्थू चमार नामक एक गरीब और भोले व्यक्ति द्वारा सुअर मारे जाने की घटना से होती है। मुराद अली नामक पात्र उसे पाँच रुपये देकर सुअर मरवाता है और उसे शहर की एक मस्जिद के सामने फिकवा देता है, जिससे शहर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठते हैं।

Q4. 'तमस' उपन्यास की मूल संवेदना (Theme) क्या है?
इस उपन्यास की मूल संवेदना सांप्रदायिक वैमनस्य, धार्मिक कट्टरता, राजनीतिक स्वार्थ और मानवीय संवेदनाओं के पतन को उजागर करना है। लेखक ने यह दिखाया है कि कैसे अंग्रेज शासक और स्थानीय स्वार्थी तत्व धर्म के नाम पर आम जनता को आपस में लड़ाते हैं।

Q5. क्या 'तमस' उपन्यास में किसी एक मुख्य नायक को दर्शाया गया है?
नहीं, ‘तमस’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी एक पारंपरिक व्यक्ति को नायक नहीं बनाया गया है, बल्कि संपूर्ण परिवेश, समाज और उस समय का युगीन यथार्थ ही इस उपन्यास का मुख्य नायक या केंद्र बिंदु बनकर उभरता है।

Q6. यूजीसी नेट (UGC NET) और अन्य परीक्षाओं के लिए 'तमस' क्यों महत्वपूर्ण है?
यह उपन्यास हिंदी साहित्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC) के पाठ्यक्रम में शामिल है। परीक्षाओं में इसके पात्रों (जैसे नत्थू, मुराद अली, रिचर्ड, बख्शीजी), प्रकाशन वर्ष, पुरस्कार और महत्वपूर्ण कथनों से संबंधित प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं।

Q7. 'तमस' उपन्यास कुल कितने खंडों में विभाजित है?
‘तमस’ उपन्यास कुल दो खंडों में विभक्त है। प्रथम खंड में सांप्रदायिक तनाव और उसकी साजिशों की कहानी कही गई है, जबकि दूसरे खंड में दंगे का विस्तार कई गाँवों और व्यापक स्तर पर मानवीय त्रासदी के रूप में सामने आता है।

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