आधुनिक काल

नाटक और गीति नाटक में अंतर बताइए ?

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 13, 2026

नाटक और गीति नाटक में अंतर बताइए (Natak Aur Geeti Natak Mein Antar Bataiye): आज के आर्टिकल में हम हिंदी साहित्य के आधुनिक काल के अन्तर्गत नाटक और गीति नाटक में अंतर के बारे में सम्पूर्ण जानकारी शेयर करेंगे।

नाटक और गीति नाटक में अंतर बताइए ?

नाटक और गीति नाट्य में मुख्य अंतर संवाद का होता है। नाटक के संवाद गद्य में और गीति नाट्य के संवाद पद्य में या लयात्मक कविता के रूप में होते हैं। काव्य के प्रयोग से गीति नाट्यों में भावावेग की तीव्रता और कल्पना की झंकार का वातावरण उत्पन्न होता है। उस काव्यात्मक विशेषता के अतिरिक्त गीति नाट्य का रूपबंध और रचना रूढ़ियाँ नाटक की होती हैं।

गीति नाट्य के कुछ उदाहरण हैं –

अंधायुग-धर्मवीर भारती। मत्स्यगंधा-उदयशंकर भट्ट।
एक कंठ विषपायी-दुष्यंत कुमार। स्वर्णश्री-गिरिजा कुमार माथुर।

हिंदी में गीति नाट्य-परंपरा का श्रीगणेश जयशंकर प्रसाद के ‘करुणालय’ से हुआ। यह हिंदी गीति नाट्य की प्रथम रचना है तो मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘अनघ’ द्वितीय गीति नाट्य है।

ये आर्टिकल भी  अभी पढ़ें

क्र.सं. अध्ययन श्रेणी (Category) श्रेणी विवरण (Category Overview) सभी लेख देखें
01 📖 हिंदी साहित्य का इतिहास आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल के सभी विस्तृत नोट्स। श्रेणी देखें →
02 🎭 भारतीय काव्यशास्त्र रस, छंद, अलंकार, शब्दशक्ति और प्रमुख आचार्यों के काव्य सिद्धांत। श्रेणी देखें →
03 💡 अलंकार एवं रस परिचय उदाहरण सहित शब्दालंकार, अर्थालंकार और नवरसों के सभी लेख। श्रेणी देखें →
04 ✍️ हिंदी व्याकरण संधि, समास, उपसर्ग, प्रत्यय और प्रतियोगी परीक्षाओं के व्याकरण नियम। श्रेणी देखें →

आषाढ़ का एक दिन – सारांश, पात्र, उद्देश्य और प्रश्न

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *