नकेनवाद क्या है ?

नकेनवाद क्या है ?

बिहार के नलिनविलोचन शर्मा ने अपने दो साथियों नरेश और केशरी कुमार को मिलाकर ‘नकेनवाद’ की स्थापना की थी। नकेनवाद का नाम इन तीन कवियों के नाम के पहले अक्षर से मिलकर बना है। इसकी स्थापना 1956 में की गई। इसका दूसरा नाम ‘प्रपद्यवाद’ भी दिया गया। यह हिन्दी साहित्य की एक प्रयोगवादी शाखा है।

इसमें प्रयोगवाद को स्पष्ट करने के लिए 10 सूत्री सामने रखे गए; जिसका सार यही है कि ‘प्रपद्यवाद’ न सिर्फ शास्त्र या दल- निर्धारित नियमों को, बल्कि महान पूर्ववर्तियों की परिपाटियों को भी गलत मानता है। इसे अपना अनुकरण भी वर्जित है।

प्रपद्यवाद प्रयोग को साध्य मानता है, जबकि प्रयोगवाद इसे साधन। ‘प्रपद्यवाद’ और प्रयोगवाद में यही अंतर है। नकेनवादियों का ‘प्रपद्यवाद’ अज्ञेय के प्रयोगवाद की स्पर्द्धा में खड़ा किया गया आंदोलन था।

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